Begin typing your search...

सीक्रेट मीटिंग में रखा गया था ‘अंसार अंत्रिम’ का खाका, ऐसे फूटा व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का गुब्बारा

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने टेरर मॉड्यूल 'व्हाइट कॉलरट आतंकी मॉड्यूल' का भंडाफोड़ किया है. इस मॉड्यूल को डॉक्टरों के जरिए चलाया जा रहा था. श्रीनगर में हुई एक खुफिया मीटिंह में 'अंसार अंत्रिम' नाम का एक संगठन बना, जिसका काम देश में आतंकी गतिविधियां करना था.

सीक्रेट मीटिंग में रखा गया था ‘अंसार अंत्रिम’ का खाका, ऐसे फूटा व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का गुब्बारा
X
( Image Source:  AI GENERATED IMAGE- SORA )
समी सिद्दीकी
Edited By: समी सिद्दीकी

Published on: 16 Feb 2026 10:31 AM

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक कथित 'व्हाइट कॉलरट आतंकी मॉड्यूल' का खुलासा किया है, जिसे कई डॉक्टरों ने मिलकर बनाया था. पुलिस के मुताबिक इस संगठन का नाम 'अंसार अंत्रिम' था और इसका मकसद आतंकी गतिविधियों को अंजाम देना था.

संगठन का पता चलने के बाद पुलिस ने इस मामले में कई डॉक्टरों को गिरफ्तार किया था. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अधिकारियों ने रविवार को दावा किया कि आरोपियों ने साल 2016 में कट्टरपंथी विचारधारा अपनाई थी.

कौन कर रहा है इस मॉड्यूल की जांच?

अधिकारियों ने रविवार को बताया कि इस मॉड्यूल की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) कर रही है. जांच में एक उभरता हुआ ऑपरेशनल नेटवर्क और एक मजबूत वित्तीय ढांचा सामने आया है, जो अलगाववादी और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को समर्थन दे सकता था.

सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले तीन सालों में इलाके में एक्टिव 8,000 से ज्यादा म्यूल अकाउंट की पहचान कर उन्हें फ्रीज किया है. अधिकारियों के मुताबिक, यह एक बेहद संगठित और जटिल मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क था.

अधिकारियों ने इन खातों को साइबर अपराध की कड़ी की सबसे कमजोर लेकिन सबसे अहम कड़ी बताया. उनका कहना है कि इन खातों के बिना चोरी किए गए पैसे को बिना पहचान वाली क्रिप्टोकरेंसी में बदलना संभव नहीं होता.

कैसे चतुराई दिखाते हैं ठग?

अधिकारियों ने बताया कि ठगी की रकम का लेनदेन जानबूझकर जटिल बनाया जाता है. पैसे को तेजी से कई खातों में ट्रांसफर किया जाता है और छोटी-छोटी रकम में बांट दिया जाता है ताकि जांच एजेंसियों की नजर से बचा जा सके. केंद्रीय एजेंसियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि भले ही म्यूल अकाउंट धारक सीधे तौर पर ठगी की योजना न बनाते हों या पीड़ितों से बात न करते हों, लेकिन वे मनी लॉन्ड्रिंग में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। बैंकिंग डिटेल साझा कर और कमीशन लेकर वे अंतरराष्ट्रीय अपराध के लिए “वित्तीय ढांचा” उपलब्ध कराते हैं.

कैसे दिल्ली ब्लास्ट के आरोपियों ने बनाया अंसार अंत्रिम संगठन?

यह मॉड्यूल ऐसे समय सामने आया है जब 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले के पास कार ब्लास्ट हुआ था, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई थी. अब तक जुटाए गए सबूतों के आधार पर अधिकारियों ने बताया कि आरोपी डॉक्टर, मुजमिल गन्नी, उमर-उन-नबी (जो अब मृत है), आदिल राठर, उसका भाई मुजफ्फर राठर (फरार), मौलवी इरफान, कारी आमिर और तुफैल गाजी- अप्रैल 2022 में श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके ईदगाह में मिले थे.

इस बैठक में उन्होंने ‘अंसार अंत्रिम’ नाम से एक आतंकी संगठन बनाने का फैसला किया था. आदिल को संगठन का ‘अमीर’ (प्रमुख), मौलवी इरफान को ‘डिप्टी अमीर’ और गन्नी को कोषाध्यक्ष बनाया गया. अधिकारियों ने बताया कि ‘अंसार’ शब्द आमतौर पर वैश्विक प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल-कायदा से जुड़ा माना जाता है.

क्यों पड़ी संगठन की जरूरत?

गिरफ्तार डॉक्टरों और मौलवियों ने पूछताछ में बताया कि नया संगठन बनाने की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि सक्रिय आतंकियों से उनके संपर्क टूट चुके थे. बैठक में सदस्यों को अलग-अलग भूमिकाएं और ऑपरेशनल कोड भी सौंपे गए थे.

साल 2023 में समूह ने हरियाणा के सोहना और नूंह इलाके से खाद खरीदने का फैसला किया, उमर के निर्देश पर फरीदाबाद की एक केमिकल दुकान से एनपीके (जिसे इस संदर्भ में पोटैशियम नाइट्रेट कहा गया) भी खरीदा गया.

कैसे बनाना सीखा आईईडी?

पूछताछ के दौरान गिरफ्तार डॉक्टरों ने बताया कि उमर ने ऑनलाइन वीडियो देखकर इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) बनाने की बुनियादी जानकारी हासिल की और ट्रायएसिटोन ट्रिपेरॉक्साइड (टीएटीपी) तैयार करने में सफल रहा. टीएटीपी एक शक्तिशाली पेरॉक्साइड विस्फोटक है, जिसका इस्तेमाल कई आतंकी हमलों में किया गया है.

क्या संगठन में और लोग होने वाले थे भर्ती?

अधिकारियों के मुताबिक, आदिल ने नए संगठन के लिए सदस्यों की तलाश शुरू की और दक्षिण कश्मीर के दानिश उर्फ जसिर को इसमें शामिल किया. आदिल दानिश को फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी के किराए के आवास में ले गया, जहां उसने उमर और गन्नी को टीएटीपी विस्फोटक तैयार करते हुए देखा. बाद में उमर ने दानिश को ‘फिदायीन’ (आत्मघाती) हमला करने के लिए मनाने की कोशिश की, लेकिन दानिश ने आखिरी वक्त पर इनकार कर दिया. उसका कहा था कि इस्लाम में आत्महत्या हराम है.

क्या था उमर-उन-नबी का प्लान?

पुलवामा का 28 वर्षीय डॉक्टर उमर-उन-नबी इस नेटवर्क का सबसे अधिक कट्टरपंथी और मुख्य संचालक माना जा रहा है. अधिकारियों को शक है कि वह कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक फैले नेटवर्क के जरिए एक शक्तिशाली कार आईईडी धमाका करने का प्लान बना रहा था.

सबूतों से संकेत मिलता है कि उसकी मूल योजना किसी भीड़भाड़ वाली जगह, संभवतः राष्ट्रीय राजधानी या किसी धार्मिक स्थल पर वीबीआईईडी लगाने और फिर फरार होने की थी. हालांकि, श्रीनगर पुलिस की जांच में गन्नी की गिरफ्तारी और विस्फोटक सामग्री की बरामदगी के बाद यह साजिश कमजोर पड़ गई. माना जा रहा है कि इसी घबराहट में लाल किले के बाहर समय से पहले विस्फोट हो गया.

कैसे खुला नेटवर्क का राज़?

इस अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा 19 अक्टूबर को हुआ, जब श्रीनगर के बाहरी इलाके नौगाम के बुनपोरा में जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर दीवारों पर लगे मिले. श्रीनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर सीसीटीवी फुटेज की जांच की, जिसके बाद तीन स्थानीय युवकों- आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर-उल-अशरफ और मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद को गिरफ्तार किया गया. इन तीनों के खिलाफ पहले से पत्थरबाजी के मामले दर्ज थे.

पूछताछ के आधार पर शोपियां के पूर्व पैरामेडिक और बाद में इमाम बने मौलवी इरफान अहमद को भी गिरफ्तार किया गया. आरोप है कि उसने पोस्टर उपलब्ध कराए और अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर डॉक्टरों को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित किया.

IndiaIndia News
अगला लेख