'नरवणे की किताब लीक करना साज़िश', ‘Four Stars of Destiny’ पर थम नहीं रहा बवाल! दिल्ली पुलिस की FIR में क्या-क्या?
पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब 'Four Stars of Destiny' पर बवाल रुकने के का नाम नहीं ले रहा है. पुलिस को इस में बड़ी साज़िश का शक है.
Naravane Book Controversy: पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की आत्मकथा 'Four Stars of Destiny' के कथित लीक को लेकर विवाद जारी है. इस बीच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मल्टी नेशनल जांच शुरू कर दी है. सूत्रों के मुताबिक, यह किताब रक्षा मंत्रालय की मंजूरी से पहले ही इंटरनेशनल डिजिटल बाजारों में पहुंच गई थी.
मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आपराधिक साजिश के आरोप में एफआईआर दर्ज की है. कांग्रेस लीडर राहुल गांधी के पास इस किताब की एक कॉपी है और ऐस में ये भी सवाल उठ रहा है कि ये किताब उन तक कैसे पहुंच गई.
दिल्ली पुलिस को क्या है शक?
शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह लीक किसी अकेली डिजिटल पायरेसी की घटना नहीं थी, बल्कि प्लान किया गया काम था. जिसमें, रक्षा से जुड़ी पुस्तकों के लिए तय आधिकारिक स्वीकृति प्रक्रिया को दरकिनार किया गया था.
क्या कर रही हैं जांच एजेंसियां?
जांच एजेंसियां अब अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया में डिजिटल और वित्तीय लेनदेन के सुराग खंगाल रही हैं. आरोप है कि आधिकारिक मंजूरी से पहले ही इन देशों के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर किताब उपलब्ध कराई गई.
यह विवाद तब और बढ़ गया जब राहुल गांधी ने संसद में इस किताब का हवाला देने की कोशिश की, जिसके बाद राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया. प्रकाशक पेंगुइन इंडिया ने साफ किया है कि यह किताब कभी प्रकाशित नहीं हुई और इसकी कोई ऑफीशियल कॉपी मौजूद नहीं है.
दिल्ली पुलिस की जांच में क्या बात आई सामने?
जांच में सामने आया है कि लीक की गई कॉपी पहले विदेशी बाजारों में ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई. अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी में संचालित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इसकी बिक्री के संकेत मिले. सूत्रों के मुताबिक, लीक कंटेंट का पहला अपलोड “.io” डोमेन वाली एक वेबसाइट से जुड़ा मिला है.
“.io” एक कंट्री कोड टॉप-लेवल डोमेन (ccTLD) है, जो मूल रूप से ब्रिटिश इंडियन ओशन टेरिटरी को आवंटित है और तकनीकी कंपनियों व स्टार्टअप्स में व्यापक रूप से उपयोग होता है.
इसके बाद यह सामग्री कई अन्य होस्टिंग प्लेटफॉर्म्स पर मिरर की गई, यानी अलग-अलग साइटों पर दोबारा अपलोड की गई.
ISBN से बढ़ी जांच की दिशा
जांच का एक अहम पहलू लीक प्रति में इंटरनेशनल स्टैंडर्ड बुक नंबर (ISBN) की मौजूदगी है. यह 13 अंकों का वैश्विक पहचान नंबर होता है, जो किसी पुस्तक के वाणिज्यिक प्रकाशन और वितरण के लिए जरूरी होता है. अधिकारियों का कहना है कि ISBN की मौजूदगी से संकेत मिलता है कि यह केवल ड्राफ्ट नहीं थी, बल्कि प्रकाशन के लिए तैयार की गई प्रोसेस्ड कॉपी थी.





