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झड़प, वोटिंग से रोकने का आरोप और सियासी घमासान; बांग्लादेश चुनाव के 10 अहम अपडेट
शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश में यह पहला चुनाव है. लेकिन, इस बीच अलग-अलग जगहों से झड़प और वोटिंग रोके जाने की घटानाएं सामने आ रही हैं.
( Image Source:
AI GENERATED IMAGE- SORA )
Bangladesh Elections 2026: बांग्लादेश में आज चुनाव हो रहे हैं. शेख हसीना के सत्ता से जाने के बाद यह पहला चुनाव है. 299 सीटों के लिए वोटिंग जारी है. सरकार बनाने के लिए 150 सीटों का बहुमत जरूरी है. सत्ता के लिए मुकाबला बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच है.
बांग्लादेश चुनाव अहम भारत के लिए काफी अहम माने जा रहे हैं. क्योंकि भारत मुस्लिम मुल्क के साथ अपनी सीमा साझा करता है और शेख हसीना के सत्ता से जाने के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों में थोड़ी खटास देखने को मिली है. इसकी एक वजह हिंदू समुदाय के खिलाफ अत्याचारों को भी माना जा सकता है.
बांग्लादेश चुनाव 2026- क्या हैं टॉप 10 अपडेट्स?
- शेरपुर-3 सीट पर एक उम्मीदवार की मौत के बाद वहां मतदान रद्द कर दिया गया है. देश में 12.77 करोड़ पंजीकृत मतदाता पहले-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली के तहत अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं, मतदान सुबह 7.30 बजे स्थानीय समय (भारतीय समयानुसार सुबह 7 बजे) शुरू हुआ और शाम तक नतीजों के रुझान आने की उम्मीद है.
- ढाका के मिरपुर-10 निर्वाचन क्षेत्र में जमात-ए-इस्लामी और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के समर्थकों के बीच झड़पों की खबरें सामने आई हैं. इसी सीट से जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान चुनाव मैदान में हैं.
- मौलवी बाजार इलाके का माहौल थोड़ा संगीन है. क्योंकि चुनाव से पहले बीते रोज़ ही हिंदू युवक रतन साहूकार की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर दी गई. इलाके में भारी पुलिसफोर्स को तैनात किया गया है.
- बांग्लादेश के डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, ढाका-9 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार तसनीम जारा ने आरोप लगाया है कि मतदान के दिन उनके पोलिंग एजेंटों को कई मतदान केंद्रों पर रोका गया. उन्होंने दावा किया कि उनके कई एजेंटों को या तो केंद्र में प्रवेश नहीं करने दिया गया या फिर उन्हें बाहर निकाल दिया गया.
- संसद की 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं. इन सीटों पर सीधे चुनाव नहीं होता, बल्कि चुने गए सांसद आनुपातिक प्रतिनिधित्व और सिंगल ट्रांसफरेबल वोट प्रणाली के जरिए इन सदस्यों का चुनाव करते हैं.
- 1991 से लेकर 2009 तक शेख हसीना और खालिदा जिया बारी-बारी से प्रधानमंत्री पद संभालती रहीं. 2009 में अवामी लीग के सत्ता में आने के बाद शेख हसीना लगातार 15 साल से अधिक समय तक प्रधानमंत्री रहीं. उन्होंने 2024 का चुनाव भी जीता था, लेकिन कुछ महीनों बाद ही उन्हें पद छोड़ना पड़ा.
- इस लिहाज से यह चुनाव दशकों में पहली बार ऐसे हो रहे हैं, जब देश की दो सबसे प्रभावशाली राजनीतिक शख्सियतें चुनावी मैदान में नहीं हैं. बांग्लादेश पूरी तरह बदले हुए राजनीतिक माहौल में मतदान कर रहा है और नए दौर की शुरुआत की उम्मीदें जताई जा रही हैं.
- इस राजनीतिक खालीपन के बीच खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान ने वापसी की है. 60 वर्षीय तारिक रहमान करीब 17 साल के निर्वासन के बाद दिसंबर में देश लौटे और उन्होंने अपनी मां, बीएनपी और अपने समर्थन आधार का फायदा उठाते हुए खुद को प्रधानमंत्री पद का प्रमुख दावेदार बना लिया है.
- अवामी लीग को छात्र आंदोलन के दौरान हुई कार्रवाई के कारण चुनाव में भाग लेने से बाहर रखा गया है. ऐसे में मुख्य मुकाबला बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच माना जा रहा है.
- इन चुनावों का असर केवल बांग्लादेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत, चीन और पाकिस्तान जैसे क्षेत्रीय देशों पर भी पड़ेगा. भारत की मदद से स्वतंत्रता पाने वाला बांग्लादेश शेख हसीना के कार्यकाल तक नई दिल्ली के करीब माना जाता था, लेकिन हाल के समय में उसका झुकाव बीजिंग और इस्लामाबाद की ओर बढ़ा है.





