ChatGPT बनेगा मार्केटिंग टूल? OpenAI छोड़ने वाली रिसर्चर की चेतावनी - यूजर्स की प्राइवेट बातें बन सकती हैं हथियार
OpenAI की पूर्व रिसर्चर Zoe Hitzig ने चेतावनी दी है कि अगर ChatGPT में विज्ञापन जोड़े गए तो यूज़र्स की निजी बातचीत का दुरुपयोग हो सकता है. उनका कहना है कि यह सिर्फ बिज़नेस मॉडल नहीं, बल्कि भरोसे और नैतिकता का सवाल है.
ChatGPT का इस्तेमाल आपने भी जरूर किया होगा. आप ही क्या, आज लगभग हर कोई किसी न किसी काम के लिए इसका इस्तेमाल कर रहा है. लेकिन क्या हो अगर यही ChatGPT आपकी प्राइवेसी के लिए ही खतरा बन जाए. जी हां, ये सच है और ये हम नहीं कह रहे बल्कि ChatGPT को बनाने वाली कंपनी OpenAI में काम कर चुकी एक पूर्व रिसर्चर ने ये दावा किया है. हालांकि, अब वो कंपनी छोड़ चुकी हैं.
इडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक OpenAI से जुड़ी एक अहम आवाज अब बाहर आ चुकी है - और जाते-जाते उसने ChatGPT में विज्ञापन (Advertising) को लेकर गंभीर चेतावनी दी है. OpenAI की पूर्व रिसर्चर जोई हिट्ज़िग (Zoe Hitzig) ने कंपनी छोड़ने के बाद कहा है कि ChatGPT अब सिर्फ एक टेक टूल नहीं रहा, बल्कि यह करोड़ों यूज़र्स की ज़िंदगी का बेहद निजी रिकॉर्ड बन चुका है. ऐसे में अगर इसमें विज्ञापन जोड़े गए, तो यह सिर्फ बिज़नेस मॉडल का बदलाव नहीं, बल्कि निजता और भरोसे के साथ खिलवाड़ होगा.
ChatGPT बना ‘डिजिटल डायरी’
हिट्ज़िग का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में ChatGPT ने जो डेटा इकट्ठा किया है, वह सोशल मीडिया से बिल्कुल अलग प्रकृति का है. सोशल मीडिया पर लोग अपनी बात सोच-समझकर और सार्वजनिक रूप से लिखते हैं, जबकि ChatGPT से बातचीत को लोग निजी मानते हैं. हिट्ज़िग ने लिखा, “कई सालों से ChatGPT यूज़र्स ने इंसानी बातचीत का ऐसा डेटा तैयार किया है, जिसकी कोई मिसाल नहीं. लोग इसे इसलिए अपनाते रहे क्योंकि उन्हें लगा कि वे किसी ऐसे सिस्टम से बात कर रहे हैं जिसका कोई छिपा हुआ मकसद नहीं है.”
लोग ChatGPT से सिर्फ पढ़ाई या नौकरी की जानकारी नहीं पूछते. वे इससे अपने मेडिकल डर, रिश्तों की परेशानियां, धर्म और आस्था से जुड़े सवाल, पहचान और जीवन के उद्देश्य और दिमागी उलझनें जैसे बेहद निजी मुद्दों पर बात करते हैं. यही वजह है कि ChatGPT धीरे-धीरे एक डिजिटल काउंसलर, दोस्त और सलाहकार जैसा बन गया है.
विज्ञापन क्यों खतरनाक हो सकता है?
जोई हिट्ज़िग की चिंता बैनर ऐड या स्पॉन्सर्ड मैसेज तक सीमित नहीं है. उनका कहना है कि असली खतरा उस डेटा के स्वरूप में है जो ChatGPT के पास जमा हो चुका है. उन्होंने चेतावनी दी कि, “अगर विज्ञापन उस निजी डेटा पर आधारित होंगे, तो यह यूज़र्स को ऐसे तरीकों से प्रभावित कर सकता है जिन्हें हम अभी समझ भी नहीं पा रहे, रोकना तो दूर की बात है.” मतलब यह कि अगर किसी व्यक्ति ने ChatGPT को बताया है कि उसे कैंसर का डर है, रिश्तों में तनाव है या वह ईश्वर को लेकर असमंजस में है - और उसी आधार पर उसे कोई विज्ञापन या सुझाव मिलने लगे - तो यह सीधा-सीधा भावनात्मक हेरफेर (emotional manipulation) की ओर बढ़ सकता है.
OpenAI का डेटा सुरक्षित रखने का दावा कितना दमदार?
OpenAI पहले ही संकेत दे चुका है कि वह भविष्य में ChatGPT में विज्ञापन टेस्ट कर सकता है. हालांकि कंपनी का कहना है कि वह यूज़र्स की बातचीत को विज्ञापनदाताओं के साथ साझा नहीं करेगी. कंपनी का आधिकारिक बयान रहा है, “हम आपकी ChatGPT बातचीत को विज्ञापनदाताओं से निजी रखते हैं और हम आपका डेटा कभी नहीं बेचते.” हिट्ज़िग ने यह भी साफ किया कि वह OpenAI पर अभी नियम तोड़ने का आरोप नहीं लगा रहीं. उनकी चिंता भविष्य को लेकर है. उनका कहना है कि जैसे ही विज्ञापन कमाई का हिस्सा बनेंगे, वैसे ही कंपनी पर व्यावसायिक दबाव बढ़ेगा.
‘नियम टूटेंगे नहीं, लेकिन बदल सकते हैं’
हिट्ज़िग का तर्क है कि आज भले ही कंपनी कहे कि डेटा सुरक्षित रहेगा, लेकिन जब राजस्व मॉडल विज्ञापन पर टिकेगा, तो प्रलोभन भी बढ़ेगा. उन्होंने लिखा कि OpenAI “एक ऐसा आर्थिक इंजन बना रही है जो अपने ही नियमों को कमजोर करने के लिए प्रेरित कर सकता है.” यानी आज की नीयत चाहे अच्छी हो, लेकिन कल का बिज़नेस प्रेशर सीमाएं धुंधली कर सकता है. यही वह मोड़ है जहां टेक्नोलॉजी और नैतिकता आमने-सामने खड़ी हो जाती हैं.
पहले भी बदला है AI का व्यवहार
बता दें कि पहले भी ChatGPT को लेकर आलोचना हो चुकी है कि वह जरूरत से ज्यादा हां में हां मिलाने वाला और कभी-कभी अत्यधिक चापलूस हो जाता था. कुछ विशेषज्ञों का मानना था कि यह सिर्फ तकनीकी गलती नहीं, बल्कि सिस्टम को ज्यादा “आकर्षक और लत लगाने वाला” बनाने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है. अगर भविष्य में विज्ञापन से कमाई जुड़ गई, तो डर यह है कि सिस्टम यूज़र को ज्यादा देर रोके रखने, भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने और ज्यादा “पसंदीदा जवाब” देने की ओर झुक सकता है, ताकि विज्ञापन देखने के मौके बढ़ें.
समाधान क्या हो सकता है?
हिट्ज़िग ने सिर्फ चेतावनी नहीं दी, बल्कि समाधान की दिशा भी सुझाई. उन्होंने कहा कि AI कंपनियों पर स्वतंत्र निगरानी (independent oversight) होनी चाहिए. इसके अलावा यूज़र डेटा को लेकर कानूनी सुरक्षा मजबूत की जानी चाहिए, नियम ऐसे हों जिन्हें बिज़नेस मॉडल बदलकर आसानी से तोड़ा न जा सके. उनके मुताबिक, यह जरूरी है कि यूज़र का हित मुनाफे से ऊपर रखा जाए.
असली चुनौती: यूजर खुद
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या लोग वाकई विज्ञापन के विरोध में ChatGPT छोड़ देंगे? सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के डेटा विवादों के बावजूद ज्यादातर लोग आज भी उनका इस्तेमाल करते हैं. सर्वे बताते हैं कि अगर AI टूल्स के फ्री वर्जन में विज्ञापन आएंगे, तो भी बड़ी संख्या में लोग उनका उपयोग जारी रखेंगे. इसे विशेषज्ञ “प्राइवेसी फटीग” कहते हैं - यानी लोग जानते हैं कि उनकी निजता खतरे में है, लेकिन सुविधा के आगे समझौता कर लेते हैं.
OpenAI के सामने चौराहा
OpenAI इस वक्त एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है. ChatGPT अब सिर्फ एक चैटबॉट नहीं रहा. यह डिजिटल असिस्टेंट, टीचर, मेंटल हेल्थ सपोर्ट टूल, करियर गाइड
और सोचने का साथी तक बन चुका है. इस पर लोगों का भरोसा सोशल मीडिया से कहीं ज्यादा गहरा है. ऐसे में विज्ञापन लाना सिर्फ एक बिज़नेस फैसला नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी का सवाल बन जाता है. जोई हिट्ज़िग की चेतावनी इसी भरोसे को लेकर है. उनका कहना है कि अगर ChatGPT को कमाई का हथियार बनाया गया, तो यह इंसानों की निजी ज़िंदगी को भी बाज़ार का हिस्सा बना सकता है.





