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Bangladesh Election 2026: तख्तापलट के बाद पहला बड़ा इम्तिहान, क्या सत्ता में लौटेगी BNP?

बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव के लिए मतदान हो रहा है. यह सिर्फ एक नियमित चुनाव नहीं, बल्कि देश के राजनीतिक इतिहास का बेहद निर्णायक मोड़ माना जा रहा है.

Bangladesh Election 2026 BNP Tarique Rahman
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Bangladesh Election 2026

( Image Source:  X/ @bdbnp78 )
विशाल पुंडीर
Edited By: विशाल पुंडीर

Updated on: 12 Feb 2026 8:22 AM IST

Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव के लिए मतदान हो रहा है. यह सिर्फ एक नियमित चुनाव नहीं, बल्कि देश के राजनीतिक इतिहास का बेहद निर्णायक मोड़ माना जा रहा है. अवामी लीग की गैरमौजूदगी में सत्ता की लड़ाई अब सीधे तौर पर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के बीच सिमटती नजर आ रही है.

5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के तख्तापलट के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों ने इस चुनाव को और भी अहम बना दिया है. अवामी लीग पर चुनावी प्रतिबंध लगने के बाद बीएनपी सबसे बड़ी और प्रमुख राजनीतिक ताकत के रूप में उभरी है. ऐसे में 2026 का आम चुनाव बांग्लादेश की नई सत्ता संरचना तय करने वाला साबित हो सकता है.

कैसा रहा BNP का इतिहास?

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) देश की पुरानी और प्रभावशाली पार्टियों में से एक है. इसकी स्थापना 1 सितंबर 1978 को तत्कालीन राष्ट्रपति जियाउर्रहमान ने की थी. बीएनपी ने 1991 में पहली बार सत्ता हासिल की, जब खालिदा जिया प्रधानमंत्री बनीं। इसके बाद 2001 में उन्होंने दूसरी बार सरकार बनाई। उस समय उनकी सरकार में जमात-ए-इस्लामी भी शामिल थी. हालांकि 2006 के बाद से बीएनपी दोबारा सत्ता में नहीं लौट सकी. 2009, 2014, 2018 और 2024 के आम चुनावों में शेख हसीना की अवामी लीग ने लगातार जीत दर्ज की. 2014 में बीएनपी ने चुनाव में धांधली के आरोप लगाए थे, जबकि 2024 के आम चुनाव का पार्टी ने बहिष्कार किया था.

कैसे बदली सियासी तस्वीर?

5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद देश की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। अवामी लीग पर चुनाव लड़ने पर रोक लग गई और बीएनपी को मुख्य विपक्षी नहीं, बल्कि संभावित सत्ताधारी दल के रूप में देखा जाने लगा. तख्तापलट से पहले खालिदा जिया जेल में थीं और उनके बेटे तारिक रहमान लंदन में निर्वासन का जीवन जी रहे थे. शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद खालिदा जिया को रिहा किया गया और तारिक रहमान भी लंबे अंतराल के बाद ढाका लौटे. हालांकि चुनाव की घोषणा के कुछ ही दिनों बाद खालिदा जिया का निधन हो गया, जिससे बीएनपी के लिए भावनात्मक माहौल भी बना.

क्या जनता की नब्ज पकड़ पाएंगे तारिक रहमान?

तारिक रहमान ने ढाका पहुंचते ही पार्टी की कमान संभाली और चुनावी अभियान को गति दी। वह दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं और बीएनपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार भी हैं. पार्टी 300 में से 292 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि 8 सीटें सहयोगी दलों को दी गई हैं. उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि 17-18 सालों तक देश से दूर रहने के बाद क्या वे बांग्लादेश की जनता की उम्मीदों और आकांक्षाओं को सही मायने में समझ पाएंगे?

तारिक रहमान ने क्या दिया नारा?

तारिक रहमान ने इस चुनाव में "Bangladesh Before All" का नारा दिया है. उन्होंने विस्तृत चुनावी घोषणापत्र जारी किया है और कई मुफ्त योजनाओं की घोषणा भी की है. चुनाव प्रचार के दौरान अंतरराष्ट्रीय डेलीगेशन और राजनयिकों ने भी उनसे मुलाकात की.

BNP के सामने क्या है चुनौती?

बीएनपी के सामने मुख्य चुनौती जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन से है. खास बात यह है कि इस गठबंधन को युवाओं की नई पार्टी NCP का भी समर्थन प्राप्त है. ऐसे में मुकाबला दो स्तरों पर है एक ओर युवा वोटर NCP की ओर झुक सकते हैं, तो दूसरी ओर इस्लामी शासन के समर्थक जमात-ए-इस्लामी के साथ जा सकते हैं.

कितने मतदाता और क्या है बहुमत का आंकड़ा?

31 अक्टूबर 2025 तक बांग्लादेश में कुल 12,77,11,793 मतदाता पंजीकृत हैं। इस बार पहली बार पोस्टल वोटिंग की सुविधा दी गई है, जिससे लगभग 1.5 करोड़ प्रवासी श्रमिकों को मतदान में भाग लेने का अवसर मिलेगा. राष्ट्रीय संसद की 300 सीटों पर प्रत्यक्ष मतदान होता है। इसके अलावा 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जिन्हें चुनाव परिणामों के आधार पर पार्टियों में बांटा जाता है. बहुमत के लिए 151 सीटों का आंकड़ा जरूरी है.

क्या बदल जाएगी बांग्लादेश की सियासत?

2026 का यह आम चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीतिक दिशा तय करने वाला चुनाव माना जा रहा है. अवामी लीग की अनुपस्थिति, बीएनपी की वापसी की कोशिश, जमात-ए-इस्लामी की चुनौती और नए युवा समीकरण. इन सबके बीच यह चुनाव देश के लोकतांत्रिक भविष्य की नई पटकथा लिख सकता है. अब निगाहें नतीजों पर टिकी हैं कि क्या तारिक रहमान जनता का भरोसा जीत पाएंगे या बांग्लादेश की राजनीति किसी नए मोड़ पर मुड़ जाएगी.

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