Begin typing your search...

बांग्लादेश में आम चुनाव आज, कौन मारेगा बाजी और किस-किस देश की टिकी नजर? एक क्लिक में जानें सबकुछ

लगभग डेढ़ साल की उथल-पुथल, हिंसा और राजनीतिक भूचाल के बाद अब बांग्लादेश अपने सबसे अहम मोड़ पर खड़ा है. 12 फरवरी को देश में आम चुनाव हो रहे हैं. ये सिर्फ सरकार बदलने का चुनाव नहीं है, बल्कि यह तय करेगा कि बांग्लादेश आगे किस दिशा में जाएगा- स्थिरता की ओर या नए टकराव की ओर

Bangladesh Election 2026 hasina yunus tarique photo
X

BNP, जमात या छात्र शक्ति? बांग्लादेश का फैसला तय करेगा भारत और चीन की दिशा

( Image Source:  Sora_ AI )

Bangladesh Election 2026: करीब डेढ़ साल पहले तक बांग्लादेश की राजनीति पर शेख हसीना और उनकी पार्टी अवामी लीग का दबदबा था, लेकिन जुलाई 2024 में शुरू हुए छात्र आंदोलन ने ऐसा रूप लिया कि सरकार हिल गई. सरकारी नौकरियों में कोटा प्रणाली के खिलाफ शुरू हुआ प्रदर्शन देखते ही देखते देशव्यापी विद्रोह में बदल गया. हिंसा, पुलिस कार्रवाई और झड़पों में 1000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई. आखिरकार 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना को इस्तीफा देकर भारत आना पड़ा.

इसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस की अगुवाई में अंतरिम सरकार बनी, जिसने संविधान सुधार और निष्पक्ष चुनाव का वादा किया. अब 12 फरवरी 2026 को बांग्लादेश में आम चुनाव हो रहे हैं... और ये सिर्फ सत्ता बदलने का चुनाव नहीं, बल्कि देश की दिशा तय करने वाला चुनाव माना जा रहा है.


मोहम्मद यूनुस



बांग्लादेश चुनाव 2026: मैदान में कौन-कौन?

  1. BNP (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी): खालिदा जिया के निधन के बाद उनके बेटे तारिक रहमान पार्टी की कमान संभाल रहे हैं. अवामी लीग के चुनाव से बाहर होने का सबसे बड़ा फायदा BNP को मिल सकता है. तारिक ने ‘राष्ट्रीय स्वाभिमान’ और आर्थिक सुधार का मुद्दा उठाया है. माना जा रहा है कि अगर स्पष्ट बहुमत किसी को मिला, तो BNP सबसे आगे रह सकती है.
  2. जमात-ए-इस्लामी: सालों तक बैन रहने के बाद अब फिर चुनाव मैदान में है. पार्टी ने अपनी छवि को थोड़ा नरम किया है और सामाजिक मुद्दों पर फोकस की बात कर रही है, लेकिन इसकी बढ़ती ताकत को भारत और क्षेत्रीय राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है.
  3. NCP (नेशनल सिटिजन पार्टी): छात्र आंदोलन से निकली नई पार्टी, जो ‘सिस्टम चेंज’ की बात कर रही है. युवाओं में इसका अच्छा प्रभाव है. हालांकि संसाधन और संगठन के स्तर पर यह अभी कमजोर मानी जा रही है. अगर त्रिशंकु संसद बनती है तो NCP और जमात ‘किंगमेकर’ बन सकते हैं.

शेख हसीना का साइलेंट फैक्टर

अवामी लीग चुनाव नहीं लड़ रही, लेकिन उसका पारंपरिक वोट बैंक मौजूद है. अगर ये वोटर बड़ी संख्या में मतदान से दूर रहते हैं या किसी खास पार्टी को रणनीतिक समर्थन देते हैं, तो नतीजे चौंका सकते हैं.



शेख हसीना


कैसे शुरू हुआ संकट?

  • जुलाई 2024 में छात्रों ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण (कोटा) के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया. शुरुआत में यह एक सीमित छात्र आंदोलन था, लेकिन कुछ ही हफ्तों में यह शेख हसीना सरकार के खिलाफ देशव्यापी विद्रोह में बदल गया.
  • ढाका समेत कई शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं. अगस्त 2024 में हालात इतने बिगड़े कि सुरक्षाबलों की गोलीबारी में सैकड़ों लोग मारे गए. कुल मिलाकर 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई.
  • यह 1971 के बाद की सबसे भीषण हिंसा थी. 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना ने इस्तीफा दे दिया और भारत चली गईं.
  • हसीना के जाने के बाद नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार बनी. इस सरकार ने वादा किया कि हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई होगी, चुनाव कराए जाएंगे और संविधान में बदलाव के लिए 'जुलाई चार्टर' लागू किया जाएगा. अब 12 फरवरी को चुनाव के साथ ही इस सुधार प्रस्ताव पर जनमत-संग्रह भी हो रहा है.
  • सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अवामी लीग (Awami League), जो पिछले डेढ़ दशक से सत्ता में थी, उसे चुनाव से बाहर कर दिया गया है. इस कारण पूरा राजनीतिक मैदान बदल गया है.

भारत, चीन और पाकिस्तान की नजर

भारत के लिए बांग्लादेश रणनीतिक रूप से बेहद अहम है, जिसमें 4000 किमी लंबी सीमा, पूर्वोत्तर राज्यों की कनेक्टिविटी और सुरक्षा सहयोग शामिल हैं. चीन पहले ही बुनियादी ढांचे में बड़ा निवेश कर चुका है. पाकिस्तान जमात या BNP की जीत में कूटनीतिक अवसर देख रहा है. हालांकि जानकारों का मानना है कि जो भी सरकार आएगी, उसे संतुलित और व्यावहारिक विदेश नीति अपनानी होगी.



भारत के लिए क्या मायने?

भारत और बांग्लादेश के रिश्ते हमेशा सरकार के हिसाब से बदलते रहे हैं. शेख हसीना के समय रिश्ते बहुत मजबूत थे. BNP के दौर में रिश्तों में तनाव रहा था. जमात का अतीत भारत विरोधी रहा है.



भारत के लिए मुख्य मुद्दे:

  • 4,000 किमी लंबी सीमा
  • 'चिकन नेक' यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा
  • पूर्वोत्तर भारत के लिए कनेक्टिविटी
  • तीस्ता नदी जल बंटवारा
  • चीन का बढ़ता प्रभाव

भारत अब खुलकर किसी एक पार्टी के पक्ष में नहीं दिखना चाहता, बल्कि संतुलित संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहा है.

चीन और पाकिस्तान क्या देख रहे हैं?

चीन

  • बांग्लादेश में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट
  • बेल्ट एंड रोड पहल
  • बंदरगाह और ऊर्जा निवेश
  • चीन चाहता है कि जो भी सरकार आए, उसकी परियोजनाएं सुरक्षित रहें.

पाकिस्तान

  • जमात के मजबूत होने पर पाकिस्तान को प्रतीकात्मक फायदा
  • OIC जैसे मंचों पर सहयोग बढ़ सकता है, लेकिन आर्थिक रूप से पाकिस्तान का प्रभाव सीमित रहेगा

असली चुनौती: अर्थव्यवस्था

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था कपड़ा निर्यात पर टिकी है. अगर राजनीतिक अस्थिरता रही, निवेशकों का भरोसा टूटा और अल्पसंख्यकों पर हमले जारी रहे तो इसका असर पूरे दक्षिण एशिया पर पड़ेगा.


क्या दांव पर है?

यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं है. यह तय करेगा कि क्या बांग्लादेश फिर से स्थिर लोकतंत्र की ओर लौटेगा? क्या राजनीतिक इस्लाम की भूमिका बढ़ेगी? क्या भारत-चीन के बीच संतुलन बना रहेगा? ढाका का फैसला सिर्फ ढाका तक सीमित नहीं रहेगा, इसका असर नई दिल्ली, बीजिंग और इस्लामाबाद तक जाएगा.

World Newsबांग्लादेशवर्ल्‍ड न्‍यूज
अगला लेख