PM के दफ्तर का नया पता ‘सेवा तीर्थ’ : साउथ ब्लॉक से शिफ्ट 'सुप्रीम पावर सेंटर', 10 Point में जानें न्यू PMO की पूरी कहानी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साउथ ब्लॉक से नए पते ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होकर अपने प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव किया. सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत बना यह कॉम्प्लेक्स आधुनिक, सुरक्षित और एकीकृत शासन का प्रतीक बताया जा रहा है.
नई दिल्ली के सत्ता गलियारों में कॉलोनियम इतिहास का अध्याय खत्म हुआ और दूसरा शुरू. आजादी के बाद से देश की कार्यपालिका का प्रतीक रहा साउथ ब्लॉक अब प्रधानमंत्री कार्यालय का स्थायी ठिकाना नहीं रहा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यालय को नए प्रशासनिक कॉम्प्लेक्स ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट कर दिया है. इसे सिर्फ पते का बदलाव नहीं, बल्कि शासन की कार्यशैली, सोच और संरचना में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है.
करीब 80 साल तक साउथ ब्लॉक देश की एग्जीक्यूटिव पावर का नर्व सेंटर रहा. वहीं से आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री से लेकर मौजूदा नेतृत्व तक फैसले लिए जाते रहे. अब सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत तैयार ‘सेवा तीर्थ’ को आधुनिक, एकीकृत और टेक्नोलॉजी-आधारित प्रशासन का नया केंद्र बताया जा रहा है. सरकार का दावा है कि यह कदम बिखरे मंत्रालयों को एक साथ लाकर बेहतर समन्वय, तेज निर्णय प्रक्रिया और भविष्य के अनुरूप इंफ्रास्ट्रक्चर सुनिश्चित करेगा.
‘सेवा तीर्थ’ नाम भी अपने आप में संदेश है. नागरिक केंद्रित शासन, सेवा-भाव और जवाबदेही की दिशा में प्रतीकात्मक बदलाव. ऐसे में सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि पीएमओ का पता बदला, बल्कि यह है कि क्या इससे शासन की रफ्तार और असर भी बदलेगा? यही इस ऐतिहासिक शिफ्ट की असली कहानी है.
पीएम मोदी का नया ऑफिस ‘सेवा तीर्थ’: क्या बदला, क्यों अहम?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक से अपने कार्यालय को शिफ्ट कर ‘सेवा तीर्थ’ में स्थानांतरित कर दिया है. करीब 80 साल से देश की कार्यपालिका का केंद्र रहे साउथ ब्लॉक से यह बदलाव सिर्फ पते का नहीं, बल्कि प्रशासनिक सोच और ढांचे के पुनर्गठन का संकेत माना जा रहा है. यह बदलाव सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का हिस्सा है.
10 प्वाइंट में जानें ‘सेवा तीर्थ’ की खासियत
1. नाम में संदेश: ‘सेवा’ को केंद्र में रखा गया
‘सेवा तीर्थ’ का अर्थ है सेवा की पवित्र जगह. यह नागरिक-केंद्रित शासन और जवाबदेही पर जोर देने की प्रतीकात्मक पहल मानी जा रही है.
2. साउथ ब्लॉक का 80 साल पुराना दौर खत्म
देश की आजादी यानी 1947 से प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक से संचालित होता रहा. आजादी के बाद से लेकर अब तक हर नेहरू, इंदिरा, राजीव गांधी, चरण सिंह, नरसिम्हा राव, अटल बिहारी वाजपेयी, मन मोहन सिंह से लेकर मोदी प्रधानमंत्री यहीं से काम करते थे. लेकिन आज से मोदी सेवा तीर्थ में काम करेंगे. इसी के साथ देश के पीएम को दफ्तर भी अब यही हो गया है.
Image Credit : ANI
3. एकीकृत प्रशासनिक हब
सेवा तीर्थ यानी नया कॉम्प्लेक्स कई प्रमुख इकाइयों को एक साथ लाया है, जिससे कामकाज में बेहतर तालमेल और निर्णय प्रक्रिया तेजी आने की उम्मीद है.
4. सेवा तीर्थ के तीन मुख्य भवन कौन?
पीएम मोदी का दफ्तर यानी सेवा तीर्थ में तीन मुख्य भवन शामिल हैं. इनमें 1: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) सेवा तीर्थ-2 कैबिनेट सेक्रेटेरिएट और सेवा तीर्थ-3 नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट और NSA कार्यालय व अन्य दफ्तर शामिल हैं.
Image Credit : ANI
5. ‘इंडिया हाउस’ कॉन्फ्रेंस सुविधा
देश में आने वाले विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और हाई-लेवल बैठकों के लिए अत्याधुनिक कॉन्फ्रेंस सेंटर सेवा तीर्थ में तैयार किया गया है, जो पहले उपलब्ध नहीं था.
6. ओपन-प्लान मॉडर्न डिजाइन
पीएमओ के पुराने बंद केबिन और लंबी गलियारों की जगह अब ओपन-वर्कस्पेस, हाई-टेक कम्युनिकेशन और सुरक्षित डिजिटल नेटवर्क पर जोर दिया गया है.
7. हाई सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर
न्यू पीएमओ में एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन, स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल, एडवांस्ड सर्विलांस सिस्टम और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम शामिल किए गए हैं. ऐसा सिक्रेसी और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया है.
Image Credit : ANI
8. ग्रीन और सस्टेनेबल बिल्डिंग
सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स को 4-स्टार GRIHA मानकों के अनुसार तैयार किया गया है. इसमें रिन्यूएबल एनर्जी, वाटर मैनेजमेंट और वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम शामिल हैं.
9. सेंट्रल विस्टा का हिस्सा
सेंट्रल विस्टा परियोजना में नया संसद भवन, कर्तव्य भवन (कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट) और कर्तव्य पथ का पुनर्विकास शामिल है.
10. कॉलोनियल विरासत से आगे बढ़ने का संकेत
इस फैसले से अब पीएमओ के साथ कॉलोनियल विरासत की छाप पीछे टूट गया. साउथ ब्लॉक, जिसे एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर ने डिजाइन किया था, ब्रिटिश काल की प्रशासनिक संरचना का हिस्सा था. नया पीएमओ आधुनिक भारत की प्रशासनिक पहचान को दर्शाने की कोशिश माना जा रहा है.
क्यों अहम है यह बदलाव?
पीएमओ का सेवा तीर्थ में शिफ्ट सिर्फ भवन का परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रशासनिक केंद्रीकरण, टेक्नोलॉजी अपग्रेड और भविष्य उन्मुख शासन मॉडल की ओर कदम बताया जा रहा है. सरकार का दावा है कि बिखरे मंत्रालयों को एक जगह लाने से ऑपरेशनल खर्च घटेगा और निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी.
अब क्या बदल जाएगा?
पीएम मोदी के इस फैसले से सरकार के काम काज में तेजी आएगी. सभी मंत्रालयों के बीच तालमेल को बढ़ावा मिलेगा. डिजिटल गवर्नेंस पर अधिक जोर देना संभव हो पाएगा. सुरक्षा ढांचे का उन्नयन संभव हो पाएगा. विदेशी कूटनीतिक गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधा माना जा रहा है.
शासन का नया मॉडल
‘सेवा तीर्थ’ को सिर्फ नया पता नहीं, बल्कि शासन के नए मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है. साउथ ब्लॉक से नए कॉम्प्लेक्स तक का यह सफर भारत की प्रशासनिक संरचना में एक प्रतीकात्मक और व्यावहारिक बदलाव का संकेत है. अब नजर इस पर रहेगी कि यह नया ढांचा कामकाज की रफ्तार और पारदर्शिता में कितना वास्तविक बदलाव ला पाता है.
PMO के एक बयान में कहा है कि, “दशकों से, कई खास सरकारी ऑफिस और मंत्रालय सेंट्रल विस्टा एरिया में कई जगहों पर फैले हुए बिखरे हुए और पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर से काम करते थे. इस फैलाव की वजह से ऑपरेशनल कमियां, तालमेल की चुनौतियां, बढ़ते मेंटेनेंस खर्च और काम करने का माहौल खराब हो गया. नए बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स मॉडर्न, भविष्य के लिए तैयार सुविधाओं के अंदर एडमिनिस्ट्रेटिव कामों को एक साथ लाकर इन समस्याओं का हल कर पाना संभव होगा. ”





