पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद राहत पैकेज जमीनी हकीकत से कम, बजट से नाराज जम्मू-कश्मीर के लोग
जम्मू-कश्मीर में पहलगाम आतंकी हमला और ऑपरेशन सिंदूर के बाद राहत पैकेज जनता की अपेक्षाओं से कम रहा. बजट में 2026-27 के लिए J&K को लगभग 2,000 करोड़ रुपये अधिक आवंटित किए गए, लेकिन व्यापारी, होटलिएर और ट्रांसपोर्टर इसे पर्याप्त नहीं मान रहे. स्थानीय उद्योग और MSME सेक्टर के लिए लक्षित आर्थिक सहायता की कमी को लेकर लोगों में असंतोष है.
केंद्रीय बजट 2026-27 में जम्मू-कश्मीर के लिए अतिरिक्त फंड का एलान तो हुआ, लेकिन यह एलान घाटी के कारोबारियों और उद्योग जगत की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका. इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, पहलगाम आतंकी हमले के बाद पर्यटन सेक्टर को हुए भारी नुकसान और उसके असर से जूझ रहे व्यापारियों का कहना है कि बजट में दी गई राहत जमीनी हकीकत से काफी कम है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट भाषण के दौरान जम्मू-कश्मीर के लिए मौजूदा वित्त वर्ष के मुकाबले करीब 2,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन प्रस्तावित किया, लेकिन स्थानीय कारोबारी संगठनों का मानना है कि यह बढ़ोतरी पर्यटकों की अचानक वापसी, सीमा पार तनाव और प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई के लिए नाकाफी है.
बजट में जम्मू-कश्मीर के लिए क्या एलान हुआ?
केंद्रीय बजट 2026-27 में जम्मू-कश्मीर को कुल 43,290.29 करोड़ रुपये के ट्रांसफर का प्रस्ताव किया गया है. यह चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान 41,340.22 करोड़ रुपये से 1,959.07 करोड़ रुपये ज्यादा है. इस आवंटन में यूटी डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड के लिए 279 करोड़ रुपये की ग्रांट, झेलम-तवी फ्लड रिकवरी प्रोजेक्ट के लिए 259.25 करोड़ रुपये की इक्विटी और पूंजीगत खर्च को सपोर्ट करने के लिए 101.77 करोड़ रुपये शामिल हैं.
कारोबारियों की नाराजगी: नुकसान के मुकाबले राहत कम
जम्मू चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष अरुण गुप्ता ने बजट पर असंतोष जताते हुए कहा कि यह बढ़ोतरी आम जनता को हुए नुकसान के मुकाबले बेहद कम है. उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद पर्यटकों की भारी संख्या में घाटी छोड़ने और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव ने व्यापार, होटल और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को गंभीर चोट पहुंचाई.
अरुण गुप्ता ने कहा कि 'हालांकि केंद्रीय बजट में देशभर के सभी क्षेत्रों को शामिल किया गया है, लेकिन जम्मू-कश्मीर के लिए किया गया आवंटन आम जनता को हुए नुकसान के अनुरूप नहीं है. इसमें व्यापारी, होटल कारोबारी, परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोग और अन्य वर्ग शामिल हैं.”
प्राकृतिक आपदाओं ने बढ़ाई मुश्किलें
कारोबारी संगठनों का कहना है कि सुरक्षा हालात के अलावा लगातार बारिश, बादल फटने और बाढ़ जैसी घटनाओं ने भी जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को गहरा नुकसान पहुंचाया है. ऐसे में बजट से अपेक्षा थी कि घाटी के लिए कोई विशेष और व्यापक राहत पैकेज घोषित किया जाएगा.
राष्ट्रीय स्तर पर संतुलित, लेकिन J&K के लिए निराशाजनक
जम्मू-कश्मीर में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के चेयरमैन राहुल साहई ने बजट को देश के लिए प्रगतिशील और टिकाऊ बताया, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर इसे उम्मीदों से कम करार दिया. उन्होंने कहा कि यह बजट सतत बुनियादी ढांचे के विकास पर मजबूत फोकस दिखाता है और राष्ट्रीय दृष्टिकोण से संतुलित प्रतीत होता है, लेकिन क्षेत्रीय नजरिए से देखें तो यह हमारी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है, खासकर उद्योगों के मामले में, क्योंकि जम्मू-कश्मीर एक संघर्ष प्रभावित क्षेत्र है.”
MSME सेक्टर के लिए खास पैकेज की कमी
राहुल साहई ने यह भी कहा कि बजट में जम्मू-कश्मीर के लिए किसी टार्गेटेड और स्पेशल इकोनॉमिक फ्रेमवर्क की कमी साफ नजर आती है. उनके मुताबिक, हमारी सबसे बड़ी अपेक्षाएँ जम्मू-कश्मीर के लिए थीं कि उसे थोड़ी अधिक वित्तीय सहायता मिले, खासकर MSME सेक्टर को मजबूत करने के लिए.”
राजनीतिक प्रतिक्रिया: बजट को बताया ‘कैपिटल-फ्रेंडली’
जम्मू-कश्मीर डेमोक्रेटिक कॉन्फ्रेंस के महासचिव कबला सिंह ने बजट की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह आम जनता की बजाय बड़े पूंजीपतियों और वित्तीय बाजारों के हितों को प्राथमिकता देता है. उन्होंने आरोप लगाया कि वित्तीय ‘अनुशासन’ के नाम पर सरकार ने मानवीय जरूरतों की जगह बैलेंस शीट को तरजीह दी है.





