पाकिस्तानी सेना को धुआं- धुआं करने वाली हवा बलोच और आसिफा मेंगल कौन? अब तक कितना पहुंचा मौत का आंकड़ा- Video
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों पर हुए बड़े हमलों के बाद हवा बलोच और आसिफा मेंगल के नाम चर्चा में हैं. आसिफा मेंगल मजीद ब्रिगेड की तीसरी महिला फिदायीन थी, जिसने नुश्की में ISI ठिकाने को निशाना बनाया. वहीं हवा बलोच ग्वादर फ्रंट पर सक्रिय रही. इन हमलों में पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान होने की खबर है.
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हालात एक बार फिर बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं. बलूच विद्रोही संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने दावा किया है कि उसका चल रहा अभियान ‘ऑपरेशन हीरोफ फेज़-II’ 40 घंटे से ज्यादा समय से कई जिलों में जारी है. संगठन ने दावा किया है कि इस दौरान पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है और कई शहरी व ग्रामीण इलाकों में उसकी पकड़ मजबूत हो गई है.
BLA के प्रवक्ता जीयंद बलोच की ओर से जारी दो अलग-अलग बयानों में कहा गया है कि संगठन के लड़ाकों ने खारन, मस्तुंग, तुम्प और पसनी जैसे इलाकों में ऑपरेशन पूरे कर लिए हैं, जबकि कुछ अन्य क्षेत्रों में अभी भी मुठभेड़ जारी है. संगठन ने यह भी दावा किया है कि क्वेटा और नुश्की के कुछ हिस्सों में उसकी मौजूदगी है और वहां से पाकिस्तानी सेना को “पीछे धकेल दिया गया” है.
इन हमलों में दो महिलाओं के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, पहली आसिफा मेंगल और दूसरी हवा बलोच.
आसिफा मेंगल कौन?
23 वर्षीय आसिफा मेंगल मजीद ब्रिगेड की तीसरी महिला फिदायीन बताई जा रही हैं. संगठन के दावों के मुताबिक, 31 जनवरी 2026 को उन्होंने बलूचिस्तान के नुश्की में स्थित ISI के एक उच्च-सुरक्षा सैन्य परिसर को निशाना बनाया. वर्ष 2002 में जन्मी आसिफा ने कथित तौर पर अक्टूबर 2023 में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) जॉइन की थी. हमले में विस्फोटकों से भरी गाड़ी (VBIED) का इस्तेमाल किया गया. संगठन का कहना है कि आसिफा ने जनवरी 2024 में फिदायीन बनने का फैसला लिया था, जिसके बाद उन्हें इस मिशन के लिए विशेष और लंबा प्रशिक्षण दिया गया.
हवा बलोच कौन?
वहीं, हवा बलूच, जिन्हें संगठन में ‘द्रोशम’ के नाम से जाना जाता था, को ग्वादर फ्रंट पर ‘ऑपरेशन हेरोफ-2’ की प्रमुख रणनीतिकार और लड़ाकू बताया गया है. संगठन के अनुसार, उनकी मौत से करीब 12 घंटे पहले रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो संदेश सामने आया ोहै, जिसमें उन्होंने बलूच प्रतिरोध के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई थी. हवा बलूच ने कथित तौर पर ग्वादर में सुरक्षा बलों के खिलाफ फ्रंट लाइन पर नेतृत्व किया. उनका वीडियो संदेश सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है, जिसे बलूच सशस्त्र संगठनों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका के तौर पर पेश किया जा रहा है.
‘200 से ज्यादा पाक सुरक्षाकर्मियों को मार गिराने का दावा
BLA ने दावा किया है कि उसके इस ऑपरेशन में पाकिस्तान आर्मी, पुलिस और फ्रंटियर कॉर्प्स के 200 से ज्यादा जवान मारे गए हैं, जबकि कम से कम 17 लोगों को कब्जे में लिया गया है. बीएलए का यह भी कहना है कि आंकड़े इससे भी कहीं ज्यादा हो सकते हैं. संगठन ने इन आंकड़ों को “प्रारंभिक और सतर्क अनुमान” बताया है और दावा किया है कि असल नुकसान इससे कहीं ज्यादा हो सकता है. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. दूसरी ओर, बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने कहा है कि हमलों में 17 सुरक्षाकर्मी और 31 नागरिकों की मौत हुई है.
'सेना की मदद करने वाले अधिकारी भी हमारे दुश्मन'
एक अलग घटनाक्रम में BLA ने दावा किया कि उसने नुश्की के डिप्टी कमिश्नर मोहम्मद हुसैन हज़ारा और असिस्टेंट कमिश्नर मारिया शमू को कुछ समय के लिए हिरासत में लेने के बाद छोड़ दिया. संगठन का कहना है कि वह स्थानीय सिविल प्रशासन और पुलिस को तब तक सीधा दुश्मन नहीं मानता, जब तक वे उसके लड़ाकों का विरोध न करें. हालांकि BLA ने चेतावनी दी है कि जो स्थानीय अधिकारी या पुलिसकर्मी “कब्ज़ा करने वाली सेना की मदद करेंगे”, उन्हें दुश्मन माना जाएगा. पाकिस्तानी सेना ने दावा किया है कि उसने जवाबी कार्रवाई में शनिवार को 92 और शुक्रवार को 41 अलगाववादियों को मार गिराया. वहीं, BLA ने यह भी माना है कि उसे भी नुकसान उठाना पड़ा है.
महिला आत्मघाती हमलावरों ने बरपाया कहर
BLA के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान उसके 18 लड़ाके मारे गए, जिनमें मजीद ब्रिगेड के 11 फिदायीन, फतेह स्क्वॉड के 4 और STOS यूनिट के 3 सदस्य शामिल हैं. संगठन ने यह भी माना कि हमलों में महिला लड़ाकों ने भी हिस्सा लिया. BLA के बयान के मुताबिक, मारे गए फिदायीनों में आसिफा मेंगल भी शामिल थीं, जिन्होंने नुश्की में ISI मुख्यालय को निशाना बनाया. संगठन ने कहा कि आसिफा मेंगल 2 अक्टूबर 2023 को मजीद ब्रिगेड में शामिल हुई थीं और जनवरी 2024 में उन्होंने फिदायीन बनने का फैसला किया था.” पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी पुष्टि की है कि कम से कम दो हमलों में महिला हमलावर शामिल थीं.
क्यों भड़कता रहता है संघर्ष?
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे कम आबादी वाला प्रांत है. यहां दशकों से अलगाववादी आंदोलन चल रहा है. विद्रोही संगठन राजनीतिक हाशिए पर धकेले जाने और प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण को लेकर केंद्र सरकार से टकराव की बात करते रहे हैं. BLA इस आंदोलन का सबसे प्रमुख चेहरा है और पाकिस्तान सहित कई देशों ने इसे आतंकी संगठन घोषित किया हुआ है. हालांकि, सैन्य अभियानों के बावजूद बलूच इलाकों में विद्रोहियों को स्थानीय समर्थन मिलने की बात भी सामने आती रही है.
हालात अब भी साफ नहीं, सरकार की चुप्पी
रविवार शाम तक पाकिस्तानी सरकार या सेना की ओर से BLA के दावों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी. ज़मीनी हालात को लेकर विरोधाभासी बयान जारी हैं, जिससे स्थिति अभी भी अस्पष्ट बनी हुई है.
विश्लेषकों का मानना है कि बलूच विद्रोहियों के साथ झड़पों में सेना को हुए भारी नुकसान की वजह से सरकार और सैन्य नेतृत्व फिलहाल सतर्क चुप्पी साधे हुए हैं.





