Gold–Silver Crash: बजट 2026 का भी नहीं हुआ असर, रिकॉर्ड हाई के बाद चांदी 33% टूटी-सोना भी औंधे मुंह गिरा; अब आगे क्या होगा?
बजट 2026 के पेश होने के बावजूद सोना और चांदी में लगातार दूसरे सत्र में तेज गिरावट दर्ज की गई. चांदी दो दिन में 33% से ज्यादा टूट चुकी है. इसमें 1.34 लाख रुपये प्रति किलो की गिरावट देखने को मिली. वहीं, सोना भी रिकॉर्ड हाई से करीब 20% नीचे आ गई.
रिकॉर्ड हाई के बाद सोना-चांदी के दामों में भारी गिरावट
Gold Silver Price Today: केंद्रीय बजट 2026 के पेश होने के बावजूद सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट का सिलसिला लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में भी जारी रहा. रिकॉर्ड ऊंचाई से फिसलते हुए बुलियन मार्केट में ऐसी बिकवाली देखने को मिली है, जिसने निवेशकों के बीच यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कीमती धातुओं की बुल रन खत्म हो चुकी है या फिर यह सिर्फ एक तेज करेक्शन है.
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई. मार्च डिलीवरी वाली सिल्वर फ्यूचर्स कीमत ₹26,273 प्रति किलो टूटकर लोअर सर्किट पर पहुंच गई और ₹2,65,652 प्रति किलो पर बंद हुई. इससे पहले वाले सत्र में भी चांदी ₹1,07,968 या करीब 27% गिर चुकी थी. केवल दो सत्रों में चांदी कुल ₹1.34 लाख या 33.6% तक लुढ़क चुकी है. साप्ताहिक आधार पर भी चांदी करीब 21% टूट चुकी है.
सोने की चमक पड़ी फीकी
सोना भी इस भारी उतार-चढ़ाव से अछूता नहीं रहा. MCX पर अप्रैल डिलीवरी वाला गोल्ड फ्यूचर शुरुआती कारोबार में करीब 9% गिरकर ₹1,38,634 प्रति 10 ग्राम तक आ गया और लोअर सर्किट लगा. हालांकि, बाद में आंशिक रिकवरी के साथ यह ₹1,48,104 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, लेकिन दिनभर में अब भी 3% की गिरावट दर्ज की गई. इससे पहले शुक्रवार को सोना ₹31,617 या 17% से ज्यादा टूट चुका था.
सोना रिकॉर्ड हाई से 20% और चांदी 37% टूटी
JM Financial Services के कमोडिटी एक्सपर्ट प्रणव मेर के मुताबिक, “तेज रफ्तार में बढ़त हमेशा क्रैश की वजह बनती है और बुलियन मार्केट में यही देखने को मिला,” उनके अनुसार घरेलू बाजार में सोना अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 20% और चांदी लगभग 37% टूट चुकी है.
अंतरराष्ट्रीय बाजारों का भी बुरा हाल
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी हालात कुछ ऐसे ही रहे. शुक्रवार को COMEX पर गोल्ड फ्यूचर्स 11% से ज्यादा गिरकर $4,763 प्रति औंस पर बंद हुआ, जबकि चांदी 31% से ज्यादा लुढ़ककर $78.53 प्रति औंस तक आ गई.
क्या बोले एक्सपर्ट्स?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती, फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में जल्द कटौती के संकेत न मिलना, और मार्जिन बढ़ाए जाने जैसे फैक्टरों ने मिलकर बुलियन बाजार पर दबाव बनाया है. साथ ही, रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद मुनाफावसूली ने गिरावट को और तेज कर दिया. आने वाले सत्रों को लेकर बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ और करेक्शन संभव है, लेकिन उसके बाद कीमतें एक दायरे में स्थिर हो सकती हैं.





