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राजनीति के दौर में फिल्में बनाना मुश्किल! BIFFES में बोले Anurag Kashyap, रूस-ईरान से हमें सीखना चाहिए

फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप ने 17वें बेंगलुरु इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (BIFFES) में कहा कि आज के राजनीतिक और सामाजिक माहौल में कुछ खास तरह की फिल्में बनाना लगभग नामुमकिन हो गया है. ‘फियरलेस फिल्ममेकिंग’ सेशन में उन्होंने बताया कि ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ और ‘ब्लैक फ्राइडे’ जैसी फिल्में आज सेंसर और विवादों की वजह से रिलीज नहीं हो पातीं.

राजनीति के दौर में फिल्में बनाना मुश्किल! BIFFES में बोले Anurag Kashyap, रूस-ईरान से हमें सीखना चाहिए
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( Image Source:  ANI )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय

Updated on: 2 Feb 2026 10:10 AM IST

फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) ने हाल ही में खुलकर कहा है कि आज के समय में कुछ खास तरह की फिल्में बनाना बहुत मुश्किल, बल्कि नामुमकिन हो गया है. उन्होंने बताया कि मौजूदा राजनीतिक माहौल और विवादों की वजह से ऐसी फिल्में बनाना आसान नहीं रहा. यह बात उन्होंने बेंगलुरु में हुए 17वें बेंगलुरु इंटरनेशनल फिल्म महोत्सव (BIFFES) में कही. वहां शनिवार को एक खास सत्र में उन्होंने हिस्सा लिया. इस सेशन का नाम था फीयरलेस फिल्ममेकिंग.

इस सेशन को फिल्म रिव्यूवर बरदवाज रंगन ने ऑपरेट किया. अनुराग कश्यप ने वहां सिनेमा, राजनीति और नई तकनीक के बारे में अपनी राय रखी. अनुराग ने अपनी पुरानी फिल्मों का जिक्र करते हुए कहा, 'आजकल 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' या 'ब्लैक फ्राइडे' जैसी फिल्में बनाना बिल्कुल असंभव है.' उन्होंने आगे कहा कि कुछ सब्जेक्ट अब इतने सेंसटिव हो गए हैं कि वे आसानी से विवाद पैदा कर देते हैं. अगर ऐसी फिल्में बन भी जाएं, तो सेंसर बोर्ड में बहुत कट लग सकती हैं या फिर वे रिलीज ही नहीं हो पाएं.

बम धमाकों पर बेस्ड फिल्म

'ब्लैक फ्राइडे' अनुराग की पहली बड़ी फिल्म थी, जो 1993 के मुंबई बम धमाकों पर आधारित थी. इसमें केके मेनन, आदित्य श्रीवास्तव और पवन मल्होत्रा जैसे कलाकार थे. वहीं 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' दो भागों में बनी एक क्राइम ड्रामा फिल्म है, जिसे आज भी भारत की सबसे बेहतरीन फिल्मों में गिना जाता है. इसमें मनोज बाजपेयी, ऋचा चड्ढा, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, तिग्मांशु धूलिया, हुमा कुरैशी, पंकज त्रिपाठी जैसे कई शानदार एक्टर थे.

भारतीय निर्देशकों को प्रेरणा लेना चाहिए

अनुराग ने कहा कि ईरान और रूस जैसे देशों के निर्देशक वहां बहुत सख्त प्रतिबंधों के बावजूद भी अपनी फिल्में बनाते रहते हैं. उन्होंने भारतीय निर्देशकों को उनसे प्रेरणा लेने की सलाह दी. उनका कहना था कि हमें भी हिम्मत दिखानी चाहिए और अभिव्यक्ति की आजादी के लिए लड़ना चाहिए. जब उनसे पूछा गया कि आजकल मुख्यधारा की फिल्मों में राजनीतिक कहानियां क्यों कम दिखती हैं, तो अनुराग ने एक बहुत गहरा जवाब दिया. उन्होंने कहा, 'जर्मनी में हिटलर के खिलाफ फिल्में तभी बनीं, जब हिटलर की मौत हो चुकी थी. हर चीज का अपना सही समय होता है.' मतलब, कुछ बातें बोलने या दिखाने के लिए सही वक्त का इंतजार करना पड़ता है.

अटकी हुई है 'केनेडी'

अनुराग की नई फिल्मों के बारे में भी बात हुई. उन्होंने हाल ही में 'निशांची' नाम की दो भागों वाली फिल्म बनाई. इसका पहला भाग पिछले साल सिनेमाघरों में रिलीज हुआ था, लेकिन दूसरा भाग सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आया. उनकी एक और फिल्म 'केनेडी' काफी समय से अटकी हुई थी. इसमें राहुल भट्ट और सनी लियोन लीड रोल्स में हैं. अब इसकी भारत में रिलीज की घोषणा हो गई है और यह Zee5 पर आएगी. हालांकि, अभी सटीक रिलीज डेट नहीं बताई गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक फरवरी 2026 में आ सकती है.

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