तेजस्वी को चूड़ा-दही भोज का न्योता देंगे तेज प्रताप! कोर्ट में आए आमने सामने, लालू के दोनों लाल के बीच क्या हुई बात?
दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में Tejashwi Yadav और Tej Pratap Yadav का आमना-सामना चर्चा में रहा, लेकिन दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई. तेज प्रताप ने दो-टूक कहा—“कोई बात नहीं हुई.” इससे पहले भी सार्वजनिक जगहों पर दोनों की दूरी दिख चुकी है. उधर, मकर संक्रांति के दही-चूड़ा भोज को लेकर तेज प्रताप ने Lalu Prasad Yadav को न्योता दिया है. Misa Bharti के आवास पर लालू यादव की सेहत और आरजेडी की अंदरूनी राजनीति को लेकर कयास तेज हैं.
दिल्ली के राउज एवेन्यू स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में शुक्रवार को बिहार की राजनीति का एक संवेदनशील पल देखने को मिला. पूर्व उपमुख्यमंत्री Tejashwi Yadav और उनके बड़े भाई Tej Pratap Yadav एक ही परिसर में मौजूद थे. दोनों की नजरें जरूर टकराईं, लेकिन बातचीत नहीं हुई. यह चुप्पी अपने आप में बहुत कुछ कहती नजर आई. तेज प्रताप के चेहरे के भाव बताते थे कि रिश्तों में दूरी अब भी बरकरार है.
यह पहला मौका नहीं है जब दोनों भाइयों के बीच दूरी सार्वजनिक रूप से दिखी हो. इससे पहले बिहार के एक मॉल में भी तेजस्वी और तेज प्रताप का आमना-सामना हुआ था. उस समय भी तेज प्रताप ने छोटे भाई को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया था. लगातार दो घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि पारिवारिक खटास सिर्फ अफवाह नहीं, बल्कि हकीकत बन चुकी है. राजनीतिक गलियारों में इसे आरजेडी के भीतर चल रहे तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है.
तेज प्रताप का दही-चूड़ा दांव
कोर्ट से पहले तेज प्रताप यादव अपनी बहन Misa Bharti के सरकारी आवास पर पहुंचे थे. वहां उन्होंने अपने पिता Lalu Prasad Yadav को मकर संक्रांति के दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण दिया. यह भोज पटना में आयोजित किया जा रहा है. आरजेडी की राजनीति में दही-चूड़ा भोज सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का भी प्रतीक रहा है.
लालू की छवि को दोहराने की कोशिश?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेज प्रताप अपने पिता लालू यादव की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश में अक्सर उनके अंदाज को अपनाते हैं. दही-चूड़ा भोज का आयोजन भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. तेज प्रताप को भरोसा है कि लालू यादव इस आयोजन में शामिल होंगे. उन्होंने कहा कि लालू यादव सिर्फ एक बड़े नेता ही नहीं, बल्कि एक पिता भी हैं, और उनके न आने की कोई वजह नहीं है.
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तेजस्वी से कोई बात नहीं हुई
जब तेज प्रताप से पूछा गया कि क्या उनकी तेजस्वी यादव से कोई बातचीत हुई, तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “नहीं, कोई बात नहीं हुई.” इस एक लाइन ने तमाम कयासों पर विराम लगा दिया. यह बयान बताता है कि दोनों के बीच संवाद की कोई पहल फिलहाल नहीं है. कोर्ट परिसर जैसी जगह पर भी खामोशी बने रहना रिश्तों की गहराई को दिखाता है.
तेजस्वी को न्योता? जवाब गोल
दही-चूड़ा भोज को लेकर जब तेज प्रताप से पूछा गया कि क्या तेजस्वी यादव को न्योता दिया गया है, तो उन्होंने सीधा नाम लेने से बचते हुए कहा कि “सबको निमंत्रण भेजा जाएगा.” इस जवाब को राजनीतिक भाषा में काफी अहम माना जा रहा है. यह न पूरी तरह इनकार है और न ही खुला स्वीकार. यानी रिश्तों में दूरी के बावजूद औपचारिकता निभाने की कोशिश.
लालू यादव की सेहत बनी अनिश्चितता
मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद लालू यादव फिलहाल मीसा भारती के आवास पर रहकर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं. ऐसे में मकर संक्रांति तक उनके पटना लौटने की संभावना कम बताई जा रही है. हालांकि आरजेडी समर्थकों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या वे दही-चूड़ा भोज में शामिल होकर कोई राजनीतिक संकेत देंगे. लालू यादव की मौजूदगी या गैर-मौजूदगी, दोनों ही मायने रखती हैं.
आरजेडी के भीतर संदेश साफ
तेजस्वी यादव के एक-दो दिन में पटना लौटने की संभावना जताई जा रही है. ऐसे में आने वाले दिन आरजेडी की अंदरूनी राजनीति के लिए अहम होंगे. कोर्ट में हुई खामोश मुलाकात, दही-चूड़ा भोज और लालू यादव की भूमिका तीनों मिलकर पार्टी के भविष्य की तस्वीर बना रहे हैं. फिलहाल इतना साफ है कि यादव परिवार की राजनीति में रिश्ते और सत्ता, दोनों के बीच संघर्ष खुलकर सामने आ चुका है.





