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अब क्या करेंगे लालू यादव? लैंड फॉर जॉब केस में कोर्ट ने तय किए आरोप, अब ट्रायल होगा शुरू- 10 Pointers

दिल्ली की राउस एवेन्यू कोर्ट ने ‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाले में Lalu Prasad Yadav, राबड़ी देवी और मीसा भारती समेत 40 से अधिक आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं. कोर्ट ने कहा कि ट्रायल चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं और यह मामला अलग-अलग लेनदेन नहीं, बल्कि संगठित भ्रष्टाचार का संकेत देता है. Central Bureau of Investigation के मुताबिक, रेलवे में ग्रुप-डी नौकरियों के बदले जमीन ली गई. अदालत ने डिस्चार्ज याचिकाएं खारिज करते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप फ्रेम किए. अब अगला चरण सबूतों के साथ ट्रायल का होगा.

अब क्या करेंगे लालू यादव? लैंड फॉर जॉब केस में कोर्ट ने तय किए आरोप, अब ट्रायल होगा शुरू- 10 Pointers
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नवनीत कुमार
Edited By: नवनीत कुमार

Published on: 9 Jan 2026 11:18 AM

दिल्ली की राउस एवेन्यू कोर्ट के फैसले ने ‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाले को लेकर सियासत और कानून दोनों मोर्चों पर हलचल तेज कर दी है. Lalu Prasad Yadav, उनके परिवार और सहयोगियों के खिलाफ आरोप तय होने के बाद अब यह मामला निर्णायक ट्रायल की ओर बढ़ गया है. अदालत ने साफ किया कि शुरुआती स्तर पर ही ऐसे पर्याप्त सबूत हैं, जिनके आधार पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए.

सीबीआई के आरोपों के मुताबिक, लालू यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले जमीन ली गई और उसे परिवार व करीबी लोगों के नाम कराया गया. कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद डिस्चार्ज की मांग खारिज कर दी. इस फैसले को Rashtriya Janata Dal के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि अदालत ने इसे महज आरोप नहीं, बल्कि “संगठित भ्रष्टाचार” की ओर इशारा करने वाला मामला बताया है.

कोर्ट ने क्या-क्या कहा?

  1. ट्रायल के लिए पर्याप्त आधार मौजूद: अदालत ने कहा कि चार्जशीट और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से यह स्पष्ट होता है कि आरोपों पर मुकदमा चलाने का मजबूत आधार है. इसलिए इस स्तर पर आरोपियों को राहत नहीं दी जा सकती.
  2. ‘आपराधिक उद्यम’ जैसा काम करने की टिप्पणी: कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध सबूत यह संकेत देते हैं कि सरकारी पदों का इस्तेमाल एक “क्रिमिनल एंटरप्राइज” की तरह किया गया, जहां नौकरी के बदले निजी लाभ लिया गया.
  3. पद के दुरुपयोग की स्पष्ट तस्वीर: अदालत ने माना कि रेल मंत्री के विवेकाधिकार का दुरुपयोग किया गया. सरकारी नौकरियों को योग्यता के बजाय निजी फायदे के लिए बांटा गया.
  4. परिवार और करीबी सहयोगियों की साझा भूमिका: कोर्ट के अनुसार, यह मामला किसी एक व्यक्ति का नहीं है. लालू यादव के करीबी और परिवार के सदस्य सह–साजिशकर्ता की तरह जुड़े हुए दिखाई देते हैं.
  5. अलग-अलग सौदे नहीं, संगठित साजिश: अदालत ने साफ कहा कि इसे अलग-अलग जमीन सौदों का मामला मानना गलत होगा. सबूत एक संगठित और सुनियोजित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हैं.
  6. डिस्चार्ज याचिका खारिज: लालू यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती की डिस्चार्ज याचिकाएं कोर्ट ने खारिज कर दीं. अदालत ने कहा कि इस स्तर पर उन्हें बरी करने का कोई कारण नहीं बनता.
  7. प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत आरोप: 41 आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(d) और 13(2) के तहत आरोप तय किए गए हैं, जो गंभीर अपराध की श्रेणी में आते हैं.
  8. सभी की भूमिकाएं आपस में जुड़ी हुईं: कोर्ट ने कहा कि आरोपियों की भूमिकाएं अलग-अलग नहीं, बल्कि आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं और सभी ने साझा उद्देश्य के तहत काम किया.
  9. 52 आरोपियों को राहत, 41 पर शिकंजा: चार्जशीट में नामजद कुल 103 लोगों में से 52 को डिस्चार्ज किया गया, जबकि 41 के खिलाफ मुकदमा चलेगा. इससे कोर्ट ने छंटनी करते हुए जिम्मेदारी तय की.
  10. अब शुरू होगा सबूतों का ट्रायल: आरोप तय होने के साथ ही अगला चरण ट्रायल का होगा, जहां सीबीआई अपने सबूत पेश करेगी और बचाव पक्ष को जवाब देने का मौका मिलेगा. कोर्ट ने साफ किया कि सच्चाई अब गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर तय होगी.
लालू प्रसाद यादव
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