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BJP की जगह TMC के बागी सांसदों ने क्यों चुना Nationalist Citizens Party का साथ? जानिए इनसाइड स्टोरी

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 22 बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी (NCP) में विलय और आगे NDA को समर्थन देने की बात कही है. यह घटनाक्रम ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

TMC Rebel MPs Merger News
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लोकसभा स्पीकर से मुलाकात करते हुए टीएमसी के बागी सांसद
( Image Source:  ANI )

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर कथित तौर पर बढ़ती नाराजगी के बीच कुछ सांसदों के अलग गुट बनाने और नई राजनीतिक दिशा अपनाने की खबरों ने हलचल बढ़ा दी है. 14 मई को 20 बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी (NCP) का दामन थाम लिया है. वे अब NDA को समर्थन देंगे. हालांकि, कुल बागी सांसदों की संख्या 22 बताई जा रही है.

बागी TMC सांसदों ने आज दिल्ली में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से उनके आवास पर मुलाकात की. उनसे मिलने के बाद, बागी TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा, "AITC से चुने गए हम 20 सांसदों ने स्पीकर से मुलाकात की और अलग बैठने का अनुरोध करते हुए एक पत्र सौंपा. ये 20 सांसद हमारी कुल संख्या का दो-तिहाई से ज़्यादा हिस्सा हैं. हम नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी में विलय कर रहे हैं, आगे चलकर, हम देश के लिए काम करेंगे और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में NDA के साथ मिलकर काम करेंगे."


बागी TMC सांसद अरूप चक्रवर्ती ने कहा, "हमने स्पीकर से मुलाकात की. हमने सारी जानकारी सौंप दी है और एक अलग ब्लॉक बनाने की मांग की है. हमें यह मिल जाएगा... हमारी उनसे बहुत अच्छी और सफल बातचीत हुई. सभी 20 सदस्य वहां मौजूद थे... हमारे सांसद संसद में बैठक करेंगे, राज्य सरकार हमारी मदद करेगी और हम उनकी मदद करेंगे."



अरूप चक्रवर्ती ने कहा, "पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के नेतृत्व में, हमारी डबल-इंजन सरकार देश के हित में काम करना चाहती है... अगर BJP हमारी मदद मांगती है, तो हम उनकी मदद करेंगे, और अगर हमें उनकी मदद चाहिए होगी, तो हम उनसे मांगेंगे... सब मिलकर काम करेंगे..." उन्होंने आगे कहा, "सायोनी घोष हमारी नेता हैं. वह आज हमारे साथ थीं."


कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

तृणमूल कांग्रेस लंबे समय से पश्चिम बंगाल में मजबूत राजनीतिक ताकत रही है. ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी ने राज्य में BJP को लगातार चुनौती दी, लेकिन हाल के विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी के भीतर नेताओं के बीच असंतोष की खबरें सामने आने लगीं. बागी रुख अपनाने की शुरुआत काकोली घोष दस्तीदार ने की.



22 सांसदों के दावे का क्या मतलब है?

रिपोर्ट्स के अनुसार, एक अलग गुट बनाने की तैयारी चल रही है, जिसमें करीब 22 सांसद शामिल होने का दावा किया जा रहा है. यह गुट कथित तौर पर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी के साथ जुड़ने और NDA को समर्थन देने की रणनीति बना रहा है. अगर यह संख्या सही साबित होती है तो संसद में TMC की स्थिति पर इसका असर पड़ सकता है.



NCP में विलय क्यों?

नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी (NCP) त्रिपुरा की एक छोटी राजनीतिक पार्टी है, जिसका मुख्य वोटर बेस बंगाली समुदाय माना जाता है. बीजेपी में सीधे शामिल होने के बजाय इस क्षेत्रीय पार्टी में विलय करने का फैसला एक कानूनी व तकनीकी रणनीति है, ताकि दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत सांसदों की सदस्यता पर कोई आंच न आए. वर्तमान में यह त्रिपुरा केंद्रित पार्टी है, लेकिन इस नए विलय के बाद इसका प्रभाव पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा के बंगाली बहुल क्षेत्रों में बढ़ाने की योजना है.


असली टीएमसी का फैसला अदालत करेगी: सुदीप बंद्योपाध्याय

TMC के एक और बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा, "हम 'नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी' में शामिल हो गए हैं. यह एक राजनीतिक पार्टी है. यह एक मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टी है. हमने इसमें विलय कर लिया है... असली TMC कौन सी है, यह अदालत तय करेगी."


क्या TMC टूट जाएगी?

यह सबसे बड़ा सवाल है. किसी भी पार्टी में सांसदों की बड़ी संख्या में टूट होने के लिए कानूनी और संवैधानिक नियम लागू होते हैं. दल-बदल कानून के तहत अगर पर्याप्त संख्या में सांसद अलग होते हैं तो उन्हें अलग गुट के रूप में मान्यता मिल सकती है, लेकिन अगर संख्या और प्रक्रिया नियमों के मुताबिक नहीं हुई तो मामला विवाद में जा सकता है.



ममता बनर्जी के लिए क्यों बड़ी चुनौती?

TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी पिछले कई चुनावों से बंगाल में BJP के खिलाफ मुख्य चेहरा रही हैं. पार्टी में बड़ी टूट की स्थिति बनती है तो इसका असर लोकसभा में पार्टी की ताकत पर, राज्य की राजनीति पर और विपक्षी गठबंधन की रणनीति पर पड़ सकता है.

BJP और NDA के लिए क्या फायदा?

TMC के सांसदों के NDA के करीब आने से केंद्र की राजनीति में NDA को फायदा मिल सकता है. इससे विपक्षी खेमे में कमजोरी का संदेश जा सकता है. वहीं BJP लंबे समय से बंगाल में TMC को चुनौती देने की कोशिश कर रही है. इसलिए ऐसा घटनाक्रम उसके लिए राजनीतिक अवसर बन सकता है.



TMC में बगावत ने बंगाल की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है. अगर सांसदों का कोई बड़ा गुट वास्तव में अलग होता है तो यह सिर्फ TMC नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है. फिलहाल मामला दावों और राजनीतिक हलचल के दौर में है, लेकिन आने वाले दिनों में यह घटनाक्रम बड़ा सियासी मोड़ ले सकता है,

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