बांग्लादेश में प्रस्तावित 82 फीट ऊंची भगवान राम की प्रतिमा का निर्माण फिलहाल रोक दिया गया है, जिसके बाद धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर बहस शुरू हो गई है. यह प्रतिमा गाइबांधा जिले के श्री श्री राधा गोविंद और काली मंदिर परिसर में बनाई जानी थी, जिसे एशिया की सबसे ऊंची भगवान राम प्रतिमाओं में शामिल होने की उम्मीद थी. मंदिर समिति के अनुसार, कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्माण कार्य अस्थायी रूप से रोका गया है. हालांकि, कुछ स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स और सामाजिक संगठनों का दावा है कि कुछ इस्लामिक संगठनों के दबाव के कारण यह फैसला लिया गया. इस मामले ने बांग्लादेश में धार्मिक सह-अस्तित्व, हिंदू समुदाय की स्थिति और अल्पसंख्यक अधिकारों पर नई चर्चा छेड़ दी है. बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन और पत्रकार सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने भी धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई है. समर्थकों का कहना है कि यह परियोजना सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान से जुड़ी थी, जबकि विरोध करने वाले पक्ष कानून व्यवस्था और सामाजिक संवेदनशीलता की बात कर रहे हैं. अब सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ सुरक्षा कारणों से लिया गया फैसला है या इसके पीछे बांग्लादेश की बदलती सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों का असर है.