Begin typing your search...

Bengal Election 2026: SIR, मोदी-शाह ने ममता को फिर जिता दिया, दिल्ली से दौड़ा BJP का घोड़ा बंगाल में फंसेगा!

बंगाल की CM ममता बनर्जी की पार्टी TMC के नेता ने दावा किया है कि राज्य में चौथी बार भी उनकी सरकार बनना तय है. उन्होंने पीएम मोदी और अमित शाह के जीत के दावों को खारिज करते हुए कहा कि नतीजों के बाद दोनों को ममता बनर्जी के शपथ ग्रहण में आने की तैयारी करनी चाहिए.

tmc leader prabhat chandra tiwari interview
X

टीएमसी नेता प्रभात चंद्र तिवारी ने किया बड़ा दावा

संजीव चौहान
By: संजीव चौहान8 Mins Read

Updated on: 29 April 2026 6:56 PM IST

Bengal Assembly Election 2026: दिल्ली में आम आदमी पार्टी को ठिकाने लगाने से खुश भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व अब पंजाब से पहले हर हाल में ममता बनर्जी के हाथों से उनका पश्चिम बंगाल झपटने की जिद पर अड़ा है. मोदी और शाह का क्या यह सपना सच होने जा रहा है, जैसा कि वे राज्य में (पश्चिम बंगाल) बंपर वोटिंग को अपने पक्ष में हुआ बताकर दावा ठोंक रहे हैं. क्या टीएमसी प्रत्याशी को सीधे-सीधे सरेआम सार्वजनिक रुप से यूपी कैडर के आईपीएस (DIG) अजयपाल शर्मा द्वारा हड़काने की घटना पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा की जीत के रास्ते का रोड़ा बनेगी?

इन्हीं तमाम सवालों के जवाब के लिए नई दिल्ली में मौजूद स्टेट मिरर हिंदी के एडिटर क्राइम इनवेस्टीगेशन ने एक्सक्लूसिव बात की इस वक्त कोलकाता में मौजूद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) पार्टी के नेता प्रभात चंद्र तिवारी से... प्रभात ने जिस मजबूत दावे से जो कुछ बेबाकी से मय तर्कों के साथ बयां किया, उसे सुनकर तो भारतीय जनता पार्टी के उस केंद्रीय नेतृत्व के पांवों तले की जमीन खिसक जाएगी, जो अब तक, इस बार पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने का ही गुब्बारा आसमान में उड़ा रही है.

क्यों BJP की राह कठिन है?

TMC नेता प्रभात चंद्र तिवारी के मुताबिक, ‘इस बार बंपर वोटिंग से लगातार चौथी बार एतिहासिक जीत हासिल करने से बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को कोई नहीं रोक सकता है. क्योंकि ममता बनर्जी बंगाल की हैं और बंगाल उनका है. दिल्ली में बैठे मोदी-शाह, SIR और भारतीय जनता पार्टी सब के सब पश्चिम बंगाल के लिए बाहरी हैं. अगर मोदी-शाह दिल्ली से बंगाल आकर साम-दाम-दंड-भेद की नीति अपना कर जबरिया ही राज्य में अपनी सरकार का मुख्यमंत्री बनाने का दावा ठोंक सकते हैं... तो फिर खुद ही सोचिए न कि ममता बनर्जी को उनका अपना बंगाल कैसे खुद से अलग कर देगा.”

मोदी-शाह को क्यों सोचना होगा?

केंद्रीय सत्ता जब मोदी-शाह और भारतीय जनता पार्टी के हाथ में है तब फिर वह पश्चिम बंगाल के लिए बाहरी कैसे हो सकते हैं? क्या पश्चिम बंगाल भारत से बाहर का हिस्सा है, जो मोदी-शाह और भाजपा के लिए वह दूर की कौड़ी या गैर होगा? इस सवाल के जवाब में तृणमूल कांग्रेस नेता ने कहा, “जिस खूंटे से जानवर बंधा होता है, उस खूंटे से उसे भी प्यार हो जाता है. जब जानवर भी अपने मालिक और अपने खूंटे को पहचान सकता है तो फिर बताइए कि पश्चिम बंगाल अपनी ममता बनर्जी को क्यों और कैसे भूल जाएगा. यह तो मोदी और शाह सोचें कि वह पश्चिम बंगाल में किस मुंह से आएंगे सत्ता का सुख भोगने? मतलब मोदी और शाह की राजनीति इतनी घिनौनी हो चुकी है कि वे परदेशी होकर भी पश्चिम बंगाल में सत्ता सुख भोगने का सपना पाल सकते हैं.

ममता बनर्जी बेफिक्र क्यों हैं?

प्रभात चंद्र तिवारी ने कहा कि ममता बनर्जी बंगाल की होकर भी पश्चिम बंगाल पर अपनी हकदारी का दावा अगर पेश करें तो भारतीय जनता पार्टी को वह अनुचित, झूठ और फरेब लगता है. बीजेपी के यही ओछी और मतलबपरस्ती की अंधी, गूंगी, बहरी, लूली और लंगड़ी सोच ही तो उसे पश्चिम बंगाल में सत्ता सुख भोगने से दूर रख रही है. पश्चिम बंगाल पर शासन-सत्ता संभालने या पाने के लिए ममता बनर्जी को न पहले चिंता थी. न आज चिंता है. न आने वाले कल में चिंता होगी. सोचें वह मोदी, शाह और बीजेपी जिसका दूर-दूर तक रोटी-बोटी तक का कोई वास्ता पश्चिम बंगाल और बंगालियों से नहीं रहा है.”

"मोदी-शाह की ED-CBI वॉशिंग मशीनें"

नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री और अमित शाह केंद्रीय गृहमंत्री हैं. उनके पास सत्ता, सरकारी मशीनरी की ताकत ममता बनर्जी से कहीं ज्यादा है. ऐसे में क्या ममता बनर्जी मोदी के सामने अड़कर जीत हासिल कर जाएंगीं? इस सवाल के जवाब में टीएमसी नेता ने कहा कि मोदी-शाह के पास ईडी-सीबीआई जैसी सरकारी जांच एजेंसियां हैं, जिनमें धुलकर भारतीय जनता पार्टी का हर विरोधी नेता ‘सफेद झक पाक दामन बेदाग’ हो जा रहा है. इसका ताजा-तरीन उदाहरण है दिल्ली में आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा के साथ गए उन 7 में से एक राज्यसभा सांसद, जिनके ऊपर जैसे ही ईडी की रेड पड़ी, वे रातों-रात भागकर बीजेपी की ईडी नाम की सरकारी वाशिंग मशीन में जाकर डूब-नहा लिए और अब बेदाग होकर बीजेपी में “शांत-मन साफ शरीर” से मुंह छिपाए आनंद में बैठे हैं. क्या ममता बनर्जी आज नहीं तो कल सही. एक न एक दिन खुद को बेदाग साबित करने के लिए मोदी शाह की इन सरकारी वाशिंग मशीनों में खुद को नहला-धुलाकर पाक-साफ करने की नहीं सोचेंगी?

मोदी शाह क्यों तैयार रहें?

स्टेट मिरर हिंदी के सवाल के जवाब में ममता बनर्जी के राइटहैंड और TMC नेता प्रभात चंद्र तिवारी ने कहा, “यूपी कैडर के बड़बोले आईपीएस अजय पाल शर्मा को मोदी-योगी और चुनाव आयोग ने भेजा तो है न हमारे यहां अपनी सरकारी वाशिंग मशीन बनाकर. टीएमसी प्रत्याशी जहांगीर खान के दरवाजे पर पहुंचे थे बेचारे रील बनवाने. अगले ही दिन पश्चिम बंगाल की जनता ने उन्हें दौड़ाकर उनकी रील बना दी. अब बताओ ममता दीदी के बंगाल में कौन धुलकर साफ हो रहा है तृणमूल कांग्रेस या फिर चुनाव आयोग... मोदी और शाह के पाले-पोसे आईपीएस अजय पाल शर्मा जैसे बेलगाम सरकारी अफसर. नेता और राजनीतिक पार्टियां विशेषकर बीजेपी अंधी गूंगी बहरी हो सकती है. पश्चिम बंगाल की जनता गूंगी अंधी बहरी नहीं है. मोदी और अमित शाह बस यही भूल गए हैं. इसी का खामियाजा उन्हें 4 मई को चुनाव मतगणना वाले दिन भुगतने को तैयार रहना होगा.”

"मोदी-शाह दीदी के शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचने की तैयारी करें"

बकौल तृणमूल कांग्रेस नेता प्रभात तिवारी, “जिस बंपर वोटिंग को लेकर मोदी-शाह राग अलाप रहे हैं कि राज्य में इस बार बीजेपी की सत्ता आ रही है. यह सब भ्रमित करने वाली बेसिर पैर की कोरी बातें हैं. 4 मई को सब सामने आ जाएगा कौन कितने पानी में था. मैं तो कहता हूं कि मोदी और शाह दीदी (ममता बनर्जी) के चौथी बार मुख्यमंत्री बनने वाले शपथ ग्रहण समारोह में आने की तैयारी शुरू करें, क्योंकि मोदी और शाह का SIR की पीठ पर लदा थका हुआ चुनावी घोड़ा राज्य के चुनावों में दम तोड़ चुका है.”

ट्रंप और एपस्टीन फाइल का जिन्न

मोदी और शाह के पास तमाम सरकारी ताकत है. देश का चुनाव आयोग उनके पास है. फिर कैसे बीजेपी इस बार पश्चिम बंगाल में सत्ता का सुख भोगने से वंचित रह सकती है? पूछने पर ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के नेता ने कहा, “मोदी जी को उनके मित्र अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास छिपी रखी एपस्टीन फाइल पश्चिम बंगाल में नहीं घुसने देगी. जहां तक सवाल अमित शाह का है तो उनके बारे में पूरे देश को मालूम है कि कैसे सीबीआई किसी जमाने में इन्हीं अमित शाह के पीछे हाथ धोकर पड़ी हुई थी. ऐसे लोगों का पश्चिम बंगाल और उसके बाशिंदों से भला क्या ताल्लुक हो सकता है. पश्चिम बंगाल में इनकी इंट्री रोकने को ममता दीदी को कुछ नही करना है. राज्य की जनता ही इन्हें इनकी करनी और कथनी का फर्क बताकर इन्हें अपने पास नहीं फटकने देगी. थोड़ा सब्र करिए बस चुनाव के परिणाम की घोषणा हो जाने दीजिए.”

Politicsस्टेट मिरर स्पेशलविधानसभा चुनाव 2026
अगला लेख