सत्ता का ऐसा नशा कि आम लोगों की कीमत घ*टा! इंदौर में 'कातिल' पानी से 15 की मौत, राहुल गांधी बोले- कुंभकर्णी नींद में है प्रशासन

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल पीने से 15 लोगों की मौत होने पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने BJP सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि इंदौर में पानी नहीं, जहर बंटा है और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा. वहीं, मोहन यादव सरकार ने कार्रवाई करते हुए नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. इसके साथ ही, राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में स्टेटस रिपोर्ट भी दाखिल कर दी है, जिस पर 6 जनवरी को विस्तृत सुनवाई होगी.;

( Image Source:  Sora_ AI/ANI )
Edited By :  अच्‍युत कुमार द्विवेदी
Updated On : 2 Jan 2026 11:38 PM IST

Indore Tragedy: देश का सबसे साफ शहर कहलाने वाला इंदौर साल 2026 की शुरुआत में उस समय शर्मसार हो गया, जब शहर के भागीरथपुरा इलाके में नलों से आ रहे बदबूदार, कड़वे और गंदे पानी को पीने के बाद सैकड़ों लोग बीमार पड़ गए. बताया जाता है कि इसमें से 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 200 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हैं. हालांकि, स्थानीय पार्षद ने केवल 8 लोगों के जान गंवाने की बात कही है. इस पूरे मामले को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला किया है. उन्होंने सरकार से सवाल पूछा कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद एक्शन क्यों नहीं लिया गया.

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“पानी नहीं, ज़हर बांटा गया”

राहुल गांधी ने कहा, “इंदौर में पानी नहीं, ज़हर बांटा गया और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोता रहा. घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं और ऊपर से BJP नेताओं के अहंकारी बयान... जिनके घरों में चूल्हा बुझ गया, उन्हें सांत्वना चाहिए थी, सरकार ने घमंड परोस दिया.” उन्होंने सवाल उठाया कि लोगों की बार-बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई? सीवर का पानी पीने की सप्लाई में कैसे मिला? समय रहते पानी की सप्लाई बंद क्यों नहीं की गई? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कड़ी कार्रवाई कब होगी? उन्होंने कहा कि ये सवाल 'फोकट' नहीं, बल्कि जवाबदेही की मांग हैं.

नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “साफ पानी कोई एहसान नहीं, यह जीवन का अधिकार है... और इस अधिकार की हत्या के लिए BJP का डबल इंजन, उसका लापरवाह प्रशासन और संवेदनहीन नेतृत्व पूरी तरह जिम्मेदार है.”

“मध्यप्रदेश बना कुप्रशासन का एपिसेंटर”

राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश की स्थिति को कुप्रशासन का एपिसेंटर बताते हुए कहा कि कहीं खांसी की सिरप से मौतें, कहीं सरकारी अस्पतालों में बच्चों को मारते चूहे, और अब सीवर मिला पानी पीकर मौतें... जब-जब गरीब मरते हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खामोश रहते हैं.

जीतू पटवारी ने भी सरकार पर साधा निशाना

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जितेंद्र (जीतू) पटवारी ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा अधिकारियों के माथे पर अपने भ्रष्टाचार को छुपाना चाहती है. ये अधिकारियों का टारगेट कर रहे तो ये अपने पाप को छुपा रहे हैं. उन्होंने कहा कि कैलाश विजयवर्गीय का इस्तीफा होना चाहिए और महापौर पर FIR होना चाहिए. इसके साथ ही, जो अधिकारी इसमें शामिल हैं, उन पर भी FIR होना चाहिए..

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, दिसंबर 2025 के मध्य से ही स्थानीय लोगों ने नगर निगम को शिकायतें दी थीं कि नल के पानी में सीवर जैसी बदबू है और रंग भी सामान्य नहीं है. इसके बावजूद पानी की सप्लाई बंद नहीं की गई. नतीजा यह हुआ कि लोग मजबूरी में वही पानी पीते रहे और कुछ ही दिनों में उल्टी, दस्त, तेज बुखार और डिहाइड्रेशन के मामले तेजी से बढ़ गए. जांच में शुरुआती तौर पर यह बात सामने आई है कि सीवर का पानी पेयजल लाइन में मिल गया, जिससे बैक्टीरियल संक्रमण फैला और हालात काबू से बाहर हो गए.

सरकार की कार्रवाई: नोटिस, ट्रांसफर और HC में रिपोर्ट

बढ़ते दबाव के बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले की समीक्षा की. उन्होंने नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को कारण बताओ नोटिस, अपर आयुक्त का तत्काल तबादला, और प्रभारी अधीक्षण यंत्री से जल वितरण का प्रभार वापस लेने के निर्देश दिए. सीएम ने कहा कि इस घटना के बाद पूरे मध्यप्रदेश में पेयजल व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी और समयबद्ध सुधारात्मक योजना लागू होगी. वहीं, राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में स्टेटस रिपोर्ट भी दाखिल कर दी है. कोर्ट इस मामले की 6 तारीख को विस्तृत सुनवाई करेगा.

BJP नेता का बयान बना विवाद की वजह

इस बीच बीजेपी पार्षद कमल वाघेला के बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया. उन्होंने कहा, “हम सब वही पानी पी रहे हैं, हमें कोई दिक्कत नहीं… रिकॉर्ड में 8 लोगों की मौत हुई है. ” इस बयान को विपक्ष ने संवेदनहीन और गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है.

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