नल का पानी या ज़हर! विब्रियो कोलेरी, शिगेला और ई-कोलाई कैसे बनते हैं जानलेवा? एक्सपर्ट ने बताई पूरी बात
मध्यप्रदेश के इंदौर से सामने आई एक रिपोर्ट ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. जांच में पीने के पानी में विब्रियो कोलेरी, शिगेला और ई.कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो सीधे तौर पर इंसानी सेहत पर गंभीर असर डालते हैं. ये बैक्टीरिया दूषित पानी के जरिए शरीर में पहुंचकर सबसे पहले पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं.
मध्यप्रदेश के इंदौर शहर से हाल ही में एक चिंताजनक खबर सामने आई है. जांच में पीने के पानी में तीन खतरनाक बैक्टीरिया विब्रियो कोलेरी, शिगेला और ई कोली की मौजूदगी पाई गई है. ये बैक्टीरिया आमतौर पर इंसानों के मल-मूत्र में पाए जाते हैं और दूषित पानी के जरिए तेजी से फैलते हैं.
स्टेट मिरर अब WhatsApp पर भी, सब्सक्राइब करने के लिए क्लिक करें
ऐसे में यह मामला केवल पानी की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर लोगों की सेहत से जुड़ा हुआ है. अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए, तो यह गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है. इस मामले पर स्टेट मिरर हिंदी ने एक्सपर्ट अंजली पोरवाल से बात की है, जो यूपी जल निगम में ग़ाज़ियाबाद की डिस्ट्रिक्ट लैब इंचार्ज हैं.
कौन-कौन से हैं ये बैक्टीरिया
इंदौर के पानी में पाए गए तीनों बैक्टीरिया वॉटर बॉर्न डिजीज से जुड़े होते हैं.
- विब्रियो कोलेरी: यही बैक्टीरिया है जो हैजा (कोलेरा) जैसी गंभीर बीमारी फैलाता है.
- शिगेला: यह बैक्टीरिया आंतों को नुकसान पहुंचाता है और गंभीर डायरिया की वजह बनता है.
- ई कोली: यह बैक्टीरिया पेट और आंतों में संक्रमण पैदा करता है और कई बार लिवर व किडनी पर भी असर डाल सकता है.
शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं ये बैक्टीरिया
अंजली पोरवाल ने बताया कि ये तीनों बैक्टीरिया सबसे पहले इंसान के डाइजेशन सिस्टम पर हमला करते हैं. दूषित पानी पीने के बाद बैक्टीरिया पेट और आंतों में पहुंच जाते हैं, जिससे डाइजेशन सिस्टम बिगड़ने लगता है. इसके कारण उलटी, दस्त और पेट दर्द जैसी समस्याएं शुरू होती हैं. अगर संक्रमण बढ़ जाए, तो लिवर में सूजन और इंफेक्शन हो सकता है. लंबे समय तक ऐसा पानी पीने से किडनी पर भी असर पड़ता है और गंभीर स्थिति में अंग फेल होने का खतरा रहता है.
कौन-कौन से लक्षण देते हैं दिखाई
विब्रियो कोलेरी, शिगेला और ई कोली से संक्रमित पानी पीने पर शरीर में कई तरह के लक्षण दिख सकते हैं, जैस-
- बार-बार उलटी होना
- तेज दस्त या डायरिया
- पेट में मरोड़ और दर्द
- कमजोरी और चक्कर आना
- शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन)
इन लक्षणों को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है.
कितने घातक होते हैं ये बैक्टीरिया?
एक्सपर्ट के अनुसार, अच्छी बात यह है कि इन बीमारियों का इलाज संभव है, लेकिन शर्त यही है कि समय रहते डॉक्टर से संपर्क किया जाए. अगर व्यक्ति लंबे समय तक दूषित पानी पीता रहे और इलाज में देरी हो जाए, तो लिवर और किडनी फेल होने का खतरा बढ़ जाता है. गंभीर मामलों में जान जाने की आशंका भी रहती है.
बचाव के लिए क्या करें
अगर आपको पानी के स्वाद, रंग या गंध में जरा-सा भी फर्क लगे, तो उसे पीने से बचें. पानी का लैब टेस्ट जरूर करवाएं, घर में आरओ या अन्य शुद्धिकरण सिस्टम लगवाएं. पानी को उबालकर पीने की आदत डालें. उलटी-दस्त होने पर घरेलू नुस्खों के भरोसे न रहें, तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
साफ पानी के क्या होते हैं पैरामीटर्स?
कई सालों से पानी की गुणवत्ता जांच करने वाली अंजली पोरवाल में बताया कि पीने के पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए करीब 35 पैरामीटर्स होते हैं, जिनमें से कम से कम 20 बेहद जरूरी माने जाते हैं. इनमें केमिकल पैरामीटर्स जैसे टीडीएस, सल्फेट, नाइट्रेट, आयरन, टोटल हार्डनेस, क्लोराइड, कैल्शियम और मैग्नीशियम शामिल हैं. इसके साथ ही बैक्टीरियल जांच भी जरूरी होती है, जिसमें टोटल कोलीफॉर्म, फीकल कोलीफॉर्म और ई.कोलाई की मौजूदगी देखी जाती है.
इंदौर के पानी में मिले विब्रियो कोलेरी, शिगेला और ईको लाई बैक्टीरिया एक गंभीर चेतावनी हैं. साफ पानी सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि जीवन की बुनियादी जरूरत है. ऐसे में सतर्कता, समय पर जांच और सही इलाज ही इन बीमारियों से बचाव का सबसे मजबूत तरीका है.





