Begin typing your search...

Indore Contaminated Water: दूध में मिलाया था थोड़ा पानी और उजड़ गई दुनिया, 10 साल बाद घर में गूंजी थी किलकारी

Indore Contaminated Water: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में एक परिवार को 10 साल के बाद बेटा मिला मिला था. जिसकी 5 महीने की उम्र में ही जहरीले पानी वाला दूध यहां एक ऐसा परिवार मातम मना रहा है, जिसने दस साल की प्रतीक्षा के बाद मिली खुशी को महज साढ़े 5 महीने में खो दिया.

Indore Contaminated Water: दूध में मिलाया था थोड़ा पानी और उजड़ गई दुनिया, 10 साल बाद घर में गूंजी थी किलकारी
X
( Image Source:  X/JaiswalSarvjeet )
विशाल पुंडीर
Edited By: विशाल पुंडीर

Updated on: 2 Jan 2026 11:47 AM IST

Indore Contaminated Water: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके की एक तंग गली में पसरा सन्नाटा सिर्फ एक घर का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की चुप्पी का प्रतीक बन गया है. यहां एक ऐसा परिवार मातम मना रहा है, जिसने दस साल की प्रतीक्षा के बाद मिली खुशी को महज साढ़े 5 महीने में खो दिया. घर के बाहर खड़ी दुनिया को शायद अंदाजा भी नहीं कि भीतर कितना गहरा दर्द जमा है.

स्‍टेट मिरर अब WhatsApp पर भी, सब्‍सक्राइब करने के लिए क्लिक करें

“भगवान ने हमें दस साल बाद सुख दिया और फिर भगवान ने ही उसे छीन लिया” यह वाक्य बार-बार दोहराती एक बुजुर्ग महिला की आवाज में अब सिर्फ थकान और टूटन बची है. उनके सामने एक छोटा सा पलंग है, जिस पर अब कोई नहीं सोएगा. यह कहानी सिर्फ एक बच्चे की मौत की नहीं, बल्कि भरोसे, लापरवाही और व्यवस्था की विफलता की कहानी है.

साढ़े 5 महीने में बुझ गया एक घर का उजाला

भागीरथपुरा में रहने वाले सुनील साहू और उनके परिवार के लिए 8 जुलाई का दिन किसी त्योहार से कम नहीं था. दस साल पहले बेटी किंजल के जन्म के बाद सालों की दुआओं और इंतजार के बाद बेटे अव्यान ने जन्म लिया. घर में रौनक लौटी, उम्मीदें जगीं और लगा कि अब अधूरापन पूरा हो गया है. लेकिन यह खुशी ज्यादा दिन टिक नहीं पाई. साढ़े 5 महीने का अव्यान अब इस दुनिया में नहीं है.

मां के पास दूध नहीं, भरोसा था

अव्यान की मां के शरीर में जैविक कारणों से दूध नहीं बन पाता था. यह कोई बीमारी नहीं थी, बल्कि एक प्राकृतिक सच्चाई थी. डॉक्टरों की सलाह पर बच्चे को पैकेटबंद दूध में पानी मिलाकर पिलाया जा रहा था. वही पानी, जिस पर पूरे परिवार को पूरा भरोसा था. वही नल का पानी, जिसे सुरक्षित माना गया. किसी ने नहीं बताया कि यही पानी ज़हर बन चुका है.

अचानक बिगड़ी तबीयत, नहीं मिला वक्त

परिवार के मुताबिक, दो दिन पहले अव्यान को बुखार और दस्त शुरू हुए. उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया, दवाइयां दी गईं, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई. रविवार रात तक हालात गंभीर हो चुके थे. सोमवार सुबह अस्पताल ले जाते समय अव्यान ने दम तोड़ दिया. परिवार का मानना है कि बीमारी की जड़ दूषित पानी था.

सुनील साहू जो एक निजी कूरियर कंपनी में काम करते हैं, कहते हैं कि उन्होंने हर संभव सावधानी बरती. उनका कहना है कि “मुझे लगता है कि हमने दूध में जो पानी मिलाया, उससे उसे नुकसान हुआ. मेरी पत्नी को दूध नहीं आता था, इसलिए हमने डॉक्टरों की सलाह पर पैकेटबंद दूध में पानी मिला दिया. हमने नर्मदा का नल का पानी इस्तेमाल किया. हमने कभी सोचा भी नहीं था कि वह इतना प्रदूषित होगा. उसे दो दिन तक दस्त रहे, हमने उसे दवा दी. फिर अचानक वह बेहोश हो गया. बाद में ही यहां के लोगों ने हमें सच्चाई बताई.”

उनका कहना है कि पानी को फिल्टर किया गया, उसमें फिटकरी डाली गई, लेकिन कोई आधिकारिक चेतावनी कभी जारी नहीं हुई. पूरा मोहल्ला उसी पानी का इस्तेमाल कर रहा था.

MP news
अगला लेख