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स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर का पानी हुआ जहर! घर का टोटी कैसे बना मौत का नल? अब तक 14 की मौत- पढ़ें Top Update

इंदौर शहर को दुनिया और देश में स्वच्छ शहर माना जाता है, लेकिन उसी शहर में गंदे पानी से तबाही मची है और वहां की सरकार सोई हुई है. वहां के एक मंत्री का यह हाल है कि वो गलत बयानी पर उतर आए हैं. जबकि लोगों को त्राहिमाम की स्थिति है. अब तक 14 लोगों की मौत और कई बीमार बताए जा रहे हैं. जानिए, इंदौर शहर का पानी कैसे हुआ जहरीला, क्या है इसकी मुख्य वजह?

स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर का पानी हुआ जहर! घर का टोटी कैसे बना मौत का नल? अब तक 14 की मौत- पढ़ें Top Update
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देश के सबसे स्वच्छ शहर के तमगे वाले इंदौर में हालात जहरीले पानी की वजह से डराने वाले हो गए हैं. घर-घर पहुंचने वाला नल का पानी ही जानलेवा बन गया है. जहरीले पानी की वजह से अब तक 14 लोगों की मौत की पुष्टि सामने आई है. जबकि दर्जनों लोग बीमार बताए जा रहे हैं. मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है. कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर गंभीर आरोप लगाए. वहीं, कांग्रेस ने घंटा बजाकर ‘सोई सरकार’ को जगाने की कोशिश की. कांग्रेस की यह प्रतिक्रिया उस समय आई, प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस समस्या को लेकर सवाल पूछे जाने पर अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया. मंत्री के इस बयान से लोगों के जख्म पर नमक छिड़कने जैसा है.

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दरअसल, देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से अब तक 14 लोगों की मौत होने की जानकारी है. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक 14वें मृतक का नाम अरविंद (43) पिता हीरालाल है. वह कुलकर्णी भट्टा का रहने वाला था. इससे पहले 21 से 31 दिसंबर तक 13 लोगों की मौत हो चुकी थी.

यह मामला सामने आने के बाद 1 जनवरी 2026 की सुबह मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भागीरथपुरा इलाके में पहुंचे. इस दौरान 7 मृतकों के परिवारों को दो-दो लाख रुपए के चेक दिए. परिजन ने मंत्री की मौजूदगी में नाराजगी जताते हुए कहा कि हमें आपका चेक नहीं चाहिए. इसी दौरान एक सवाल के जवाब में उन्होंने अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया. वहीं, लोगों की नाराजगी को दूर करने के बजाय विजयवर्गीय मौके से चलते बने.

2456 लोग अस्पताल में भर्ती

दूसरी तरफ जानलेवा पानी की मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अब तक भागीरथपुरा के 7,992 घरों का सर्वे किया है. इनमें 2,456 लोग इन्फेक्टेड मिले. 200 से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, करीब 40 को डिस्चार्ज किया जा चुका है. 162 लोगों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है.

HC का आदेश - 2 जनवरी को स्टेटस रिपोर्ट पेश करे सरकार

जहरीले पानी की समस्या को लेकर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने सरकार से 2 जनवरी तक स्टेटस रिपोर्ट मांगी है. साथ ही गंदा पानी पीने से बीमार सभी लोगों का सरकार से फ्री इलाज कराने के आदेश भी दिए हैं.

विजयवर्गीय के सामने क्यों नाराज हुई महिलाएं

इस बीच मंत्री कैलाश विजयवर्गीय गुरुवार को स्कूटर पर सवार होकर भागीरथपुरा पहुंचे. इस दौरान महिलाओं ने नाराजगी जाहिर की. इसका वीडियो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में किया है. वीडियो में एक महिला कहती दिख रही है कि पिछले दो साल से गंदा पानी आ रहा है. भाजपा पार्षद को बार-बार बताया गया, लेकिन आज तक समस्या का समाधान नहीं हुआ.

जीतू पटवारी ने कैलाश को बताया 'अहंकारी'

वहीं, कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने एक्स पर लिखा X पर लिखा- पूरा मोहल्ला बीमार है, लेकिन सत्ता के अहंकार में चूर मंत्री जी ने गाड़ी आगे बढ़ा ली और पीड़ित बहनों की बात तक नहीं सुनी.

मामला यहीं तक सीमित नहीं है. कांग्रेस के एक अन्य नेता ने इंदौर में घंटा बजाकर सोई बीजेपी सरकार को जगाने की कोशिश की. कांग्रेस नेता ने कहा कि हम मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को घंटा बजाकर याद कर रहे हैं. उन्हें इस बात का अहसास कराना चाहते हैं की जनता को जहरीला पानी क्यों पिलाया, इसका समाधान कीजिए, नहीं तो जनता माफ नहीं करेगी.

जहरीले पानी से क्या हुआ?

इंदौर के लोग जहरीला पानी पीने से दर्जनों लोगों ने उल्टी-दस्त, पेट दर्द और बुखार की शिकायत की शिकायत की है. कई लोग गंभीर रूप से बीमार भी हैं. कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है. सैकड़ों लोगों का इलाज अस्पताल में जारी है. स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर सर्वे में जुटीं हैं.

पानी कैसे हुआ जहरीला?

अभी तक की जांच रिपोर्ट के अनुसार पाइपलाइन में लीकेज और सीवेज मिक्सिंग की वजह से ये हालात पैदा हुए हैं. भारी बारिश और मेंटेनेंस के दौरान दूषित पानी सप्लाई लाइन में घुस गया. पानी आपूर्ति के दौरान जल आपूर्ति विभाग के कर्मचारियों ने क्लोरीनेशन/फिल्ट्रेशन पर ध्यान नहीं दिया. यानी पानी की सप्लाई से पहले टेस्टिंग में लापरवाही की बातें सामने आई है.

सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए?

प्रभावित इलाकों में पानी सप्लाई अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है. टैंकरों से साफ पानी की व्यवस्था कराई गई है. पानी के सैंपल लैब जांच के लिए भेजे गए हैं. स्वास्थ्य विभाग की रैपिड रिस्पांस टीमें तैनात मौके पर तैनात हैं. दोषियों पर कार्रवाई के संकेत का मंत्री ने भरोसा दिया है. इस बीच कांग्रेस नेता जीतू पटवारी का आरोप लगाया है कि जिम्मेदारों की लापरवाही से लोगों की जानें गईं.

बता दें कि इंदौर में पानी से फैली बीमारी ने शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जब तक पाइपलाइन-सिस्टम की खामियां दूर नहीं होतीं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक ‘स्वच्छ शहर’ की छवि पर दाग बना रहेगा.

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