असली रिश्तों से दूरी, फिक्शनल किरदारों से प्यार.. Bio-Homo के बाद अब Fictosexual हो रहे लोग, जानें क्या है ये नया ट्रेंड

असली रिश्तों से दूर होते कई लोग अब ऐसे किरदारों से इमोशनल और रोमांटिक कनेक्शन महसूस कर रहे हैं, जो हकीकत में मौजूद ही नहीं हैं. Bio और Homo जैसी पहचानों के बाद अब Fictosexual नाम का एक सेक्सुएलिटी ट्रेंड सामने आया है.;

( Image Source:  AI SORA )
Edited By :  हेमा पंत
Updated On : 5 Jan 2026 5:34 PM IST

बहुत से लोग चाहते हैं कि उन्हें असल ज़िंदगी में भी कोई ऐसा ही साथी मिले, जो उनसे प्यार करे. लेकिन अब एक ऐसे लोग भी हैं, जो इंसानों में नहीं, बल्कि कल्पना की दुनिया में ही अपना प्यार ढूंढ रहे हैं. इसी सोच से जुड़ा एक नया ट्रेंड सामने आया है, जिसे कहा जा फैक्टोसेक्सुअलिटी कहा जाता है. 

यह ट्रेंड लोगों को हैरान भी कर रहा है और सोचने पर मजबूर भी कि आखिर कोई कैसे ऐसी चीजों से प्यार कर सकता है, जो असल में है ही नहीं. चलिए ऐसे में जानते हैं कि आखिर क्या है फिक्टोसेक्सुएलिटी और यह इतना पॉपुलर क्यों हो रहा है.

क्या है Fictosexuality?

फिक्टोसेक्सुएलिटी वह कंडीशन है, जिसमें किसी व्यक्ति को इमोशनल, रोमांटिक या फिजिकल अट्रैक्शन काल्पनिक किरदारों से होता है. ये किरदार किताबों, फिल्मों, वेब सीरीज़, एनीमे, वीडियो गेम्स या किसी भी फिक्शनल दुनिया से जुड़े हो सकते हैं. थेरेपिस्ट और जेंडर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऐसे लोगों के लिए यह आकर्षण मज़ाक या कल्पना भर नहीं होता, बल्कि पूरी तरह सच्चा और गहराई से महसूस किया गया रिश्ता होता है.

सब कुछ रहता है कंट्रोल

फिक्टोसेक्सुएलिटी लोगों के लिए यह रिश्ता उनके कंट्रोल में होता है. जैसे रिश्ता कब शुरू हो, कितनी नज़दीकी हो, कितना आगे बढ़े और कब तक चले-सब कुछ उनके हाथ में होता है. यहां न धोखा होता है, न छोड़कर जाने का डर. यही वजह है कि कई लोग इस रिश्ते में खुद को ज़्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं.

क्या Fictosexual होना मतलब असेक्सुअल होना है?

फिक्टोसेक्सुएलिटी को अक्सर असेक्सुअल स्पेक्ट्रम से जोड़ा जाता है, लेकिन हर फिक्टोसेक्सुएलिटी व्यक्ति खुद को असेक्सुअल या अरोमैंटिक मानता हो, ऐसा नहीं है. कोई फिक्टोसेक्सुअल होते हुए भी खुद को स्ट्रेट, गे, पैनसेक्सुअल और ओमनीसेक्सुअल मान सकता है. यहां सबसे अहम बात यह है कि व्यक्ति किस पहचान से खुद को जोड़कर देखता है.

अचानक क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड?

आज की दुनिया में सिर्फ फिल्में और किताबें ही नहीं, बल्कि AI और वर्चुअल पार्टनर भी इस ट्रेंड को बढ़ा रहे हैं. 2025 में ऐसे कई मामले सामने आए, जहां लोगों ने AI चैटबॉट से प्यार किया, शादी की, यहां तक कि असल रिश्तों को भी तोड़ दिया. कुछ लोगों के लिए ये वर्चुअल या काल्पनिक पार्टनर वह भरोसा देते हैं, जो उन्हें इंसानों से नहीं मिला.

क्या कहती है रिसर्च?

फ्रांस की यूनिवर्सिटी ऑफ पेरिस नांतेर की शोधकर्ता एग्नेस जियार्ड के मुताबिक, काल्पनिक किरदारों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे कभी किसी को रिजेक्ट नहीं करते है.  इसके अलावा, कई लोग ऐसे रिश्तों को समाज के बनाए हुए नियमों  जैसे शादी, जेंडर रोल्स और रिश्तों की परंपरागत परिभाषा को चुनौती देने के तरीके के रूप में भी देखते हैं.

प्यार की बदलती परिभाषा

फिक्टोसेक्सुएलिटी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि प्यार और आकर्षण की सीमा आखिर कहां तक है. यह ट्रेंड बताता है कि इंसानी भावनाएं सिर्फ हकीकत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कल्पना, कहानी और तकनीक के साथ भी गहरे रिश्ते बना सकती हैं. आज के दौर में, जब अकेलापन बढ़ रहा है, फिक्टोसेक्सुएलिटी कई लोगों के लिए एक ऐसा सहारा बन गई है, जहां दिल टूटने का डर नहीं, सिर्फ अपनापन है.

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