न वीडियो, न लाइव संबोधन… सिर्फ बयान! आखिर कहां हैं मोजतबा खामेनेई? CIA और Mossad की भी पैनी नजर
Mojtaba Khamenei कहां है? ये सवाल लगातार बना हुआ है. ईरान की जनता के सामने लीडर नहीं आ रहे हैं और केवल लिखित संदेश से ही काम चलाया जा रहा है. क्या है ईरान का छल है या फिर सुरक्षा कारणों की वजह से उन्हें छिपाया गया है?
Where is Mojtaba Khamenei: ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह मोजतबा खामेनेई अपने पिता की हत्या के बाद सत्ता संभालने के बाद से अब तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं. ऐसे में लगातार सवाल बन रहा है कि वह ज़िंदा भी है या नहीं. उन्होंने युद्ध की शुरुआत में अपने पिता की हत्या के बाद पद संभाला और 9 मार्च को उन्हें आधिकारिक तौर पर देश का सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया था.
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को लेकर रहस्य उस समय और गहरा गया जब फारसी नववर्ष नवरोज़ के मौके पर उनकी सामान्य सार्वजनिक उपस्थिति नहीं देखी गई. परंपरा के अनुसार इस मौके पर देश के सर्वोच्च नेता का संदेश या सार्वजनिक संबोधन अपेक्षित होता है, लेकिन इस बार मोजतबा की ओर से केवल एक लिखित बयान जारी किया गया, जिसे उनके टेलीग्राम चैनल पर तस्वीरों के साथ साझा किया गया.
मोजतबा पर क्या उठ रहे हैं सवाल?
उनकी ओर से किसी भी लाइव उपस्थिति या रिकॉर्डेड वीडियो का न होना उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर अटकलों को और तेज कर गया. इस बीच, अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियां जैसे CIA और Mossad भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने मोजतबा से मुलाकात की कोशिशें की हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह जीवित हैं. हालांकि इस बात का कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि वह सक्रिय रूप से देश के मामलों का संचालन कर रहे हैं. एक इजराइली अधिकारी ने Axios से कहा, “हमारे पास कोई सबूत नहीं है कि आदेश वास्तव में वही दे रहे हैं.”
हालांकि इस अनिश्चितता के बावजूद ऐसा कोई संकेत नहीं है कि वह अपने कर्तव्यों को निभाने में पूरी तरह असमर्थ हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक रूप से उनकी अनुपस्थिति का कारण सुरक्षा चिंताएं हो सकती हैं.
ईद पर जारी मैसेज में क्या?
इसी बीच, मोजतबा खामेनेई ने शुक्रवार को ईद-उल-फितर और नवरोज़ के मौके पर एक लिखित संदेश जारी किया, जिसे सरकारी टीवी पर पढ़ा गया. इस संदेश में उन्होंने अमेरिका और इजराइल के हमलों को देश को अस्थिर करने की असफल कोशिश करार दिया, जबकि युद्ध अब तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है.
उन्होंने ‘रेजीम चेंज’ की अवधारणा को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका और इजराइल की रणनीति शुरुआत से ही गलत थी. उनके अनुसार, यह सोच कि शीर्ष नेतृत्व को खत्म कर देने से व्यवस्था गिर जाएगी, एक भ्रम था. उन्होंने कहा कि इन हमलों के बावजूद जनता की एकजुटता और मजबूत हुई है.
कैसे इजराइल और यूएस की मंशा पर फिरा पानी?
उन्होंने अपने बयान में कहा, "यह युद्ध इस भ्रम के साथ शुरू किया गया कि अगर व्यवस्था के प्रमुख और कुछ प्रभावशाली सैन्य अधिकारियों को मार दिया जाएगा, तो लोगों में डर और निराशा पैदा होगी, जिससे ईरान पर कब्जा करने और उसे तोड़ने का सपना पूरा किया जा सकेगा.”
खामेनेई ने इस पूरे संघर्ष को चरणों में बांटते हुए कहा कि बीते एक साल में देश ने तीन सैन्य और सुरक्षा युद्धों का सामना किया है. पहले चरण के बारे में उन्होंने कहा, “पहला युद्ध जून में हुआ, जब जियोनिस्ट दुश्मन ने अमेरिका की विशेष मदद से और बातचीत के बीच हमारे लगभग 1000 नागरिकों को मार दिया.”
उन्होंने आगे कहा कि दुश्मन को उम्मीद थी कि देश के भीतर अशांति फैलेगी और लोग खुद ही इस्लामी व्यवस्था को गिरा देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उन्होंने कहा, “जून के युद्ध में दुश्मन को लगा था कि जनता ही व्यवस्था को उखाड़ फेंकेगी, लेकिन लोगों की सतर्कता और इस्लाम के लड़ाकों की बहादुरी के कारण ऐसा नहीं हुआ. इसके उलट, दुश्मन में निराशा के संकेत दिखाई दिए और अंततः उसे मध्यस्थता और संघर्षविराम का सहारा लेना पड़ा.”




