कौन हैं Nandita Gorlosa? असम चुनाव से पहले BJP का बिगाड़ा खेल! जानें कांग्रेस को कितना फायदा
असम की राजनीति में 22 मार्च को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब नंदिता गोरलोसा ने भारतीय जनता पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया.
Nandita Gorlosa
असम की राजनीति में 22 मार्च को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब नंदिता गोरलोसा ने भारतीय जनता पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया. हाफलोंग में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उनका कांग्रेस में औपचारिक स्वागत किया गया, जहां पार्टी के उम्मीदवार और एपीसीसी महासचिव निर्मल लंगथासा भी मौजूद रहे.
यह राजनीतिक बदलाव ऐसे समय में हुआ है, जब आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर असम में सियासी माहौल गर्म है. भाजपा द्वारा टिकट न दिए जाने के बाद गोरलोसा का यह कदम न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि हाफलोंग सीट पर चुनावी समीकरणों को भी पूरी तरह बदल सकता है.
क्यों छोड़ा BJP का साथ?
दरअसल भाजपा ने इस बार हाफलोंग सीट से नंदिता को उम्मीदवार नहीं बनाया. उनकी जगह पार्टी ने नए चेहरे के तौर पर रूपाली लंगथासा पर भरोसा जताया. इसके बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि गोरलोसा कोई बड़ा राजनीतिक फैसला ले सकती हैं, जो आखिरकार सच साबित हुआ. कांग्रेस में शामिल होने के बाद यह भी चर्चा है कि वह हाफलोंग सीट से पार्टी की उम्मीदवार बन सकती हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है.
कौन हैं नंदिता गोरलोसा?
नंदिता गोरलोसा का जन्म 13 मई 1977 को हुआ था. वह असम की जानी-मानी महिला नेताओं में शुमार हैं और हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली सरकार में खेल और युवा कल्याण मंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं. राजनीति में उनकी पहचान एक सक्रिय और प्रभावशाली नेता के रूप में रही है, खासकर हाफलोंग क्षेत्र में उनका मजबूत जनाधार माना जाता है.
BJP के फैसले पर क्यों उठे सवाल?
असम मंत्रिमंडल में मंत्री रहते हुए भी गोरलोसा को टिकट न दिए जाने पर राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा हुई. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री हिमंता ने स्पष्ट किया कि इस बार कई मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं दिया गया है. उन्होंने कहा कि पार्टी ने चुनाव में नए चेहरों को मौका देने की रणनीति अपनाई है, जिससे संगठन को मजबूती मिले.
क्या कांग्रेस को मिलेगा फायदा?
कांग्रेस ने गोरलोसा के पार्टी में शामिल होने को हाफलोंग में अपने लिए एक बड़ी मजबूती बताया है. पार्टी का मानना है कि उनके आने से चुनावी संभावनाएं और मजबूत होंगी. गोरलोसा का यह कदम हाफलोंग सीट पर मुकाबले को और दिलचस्प बना सकता है और चुनाव परिणामों पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है.




