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12000 रुपये सस्ता हुआ सोना, ईरान-इजरायल जंग का दिखा असर; जानें आगे कैसा रहेगा हाल

मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच सोने की कीमतों में आई गिरावट ने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों दोनों को चौंका दिया है. कुछ ही दिनों में इसमें तेज गिरावट दर्ज की गई.

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Gold price

( Image Source:  AI: Sora )

मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच सोने की कीमतों में आई गिरावट ने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों दोनों को चौंका दिया है. आमतौर पर युद्ध जैसी परिस्थितियों में सोना सुरक्षित निवेश के रूप में उभरता है और इसकी कीमतों में उछाल देखा जाता है, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है. ईरान-इजरायल की जंग की शुरुआत से पहले जहां सोना रिकॉर्ड ऊंचाई पर था, वहीं कुछ ही दिनों में इसमें तेज गिरावट दर्ज की गई.

भारत में 27 फरवरी 2026 को सोने की कीमत 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम थी, लेकिन 21 मार्च तक, यानी युद्ध के 22वें दिन, यह करीब 8% गिरकर 1.47 लाख रुपये तक आ गई. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमत लगभग 14% टूटकर 4,488 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई, यानी भारत में ईरान-इजरायल जंग के बीच अब तक सोना 12 हजार रुपये सस्ता हो चुका है.

युद्ध के समय सोना क्यों नहीं चमका?

इतिहास गवाह है कि युद्ध या वैश्विक संकट के दौरान सोने की मांग बढ़ती है. Gulf War और Iraq War के दौरान सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी गई थी. यहां तक कि Russia-Ukraine War की शुरुआत में भी सोना उछला था, हालांकि बाद में इसमें गिरावट आई. लेकिन मौजूदा परिदृश्य में निवेशकों का रुख कुछ अलग दिखाई दे रहा है, जिससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है.

क्या और सस्ता होगा सोना?

कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2026 के अंत तक सोना 6,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है. अगर ऐसा होता है और भारतीय रुपया कमजोर रहता है, तो भारत में सोने की कीमत 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को छू सकती है. हालांकि यह पूरी तरह से Iran War 2026 की दिशा, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी डॉलर की मजबूती पर निर्भर करेगा.

चांदी का क्या हाल?

सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. साल 2025 की शुरुआत में जहां चांदी 86,000 रुपये प्रति किलो थी, वहीं 2026 में यह बढ़कर 3.39 लाख रुपये तक पहुंच गई, लेकिन हालिया गिरावट के बाद अब यह करीब 2.32 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई है. इसके बावजूद, इंडस्ट्रियल डिमांड मजबूत बनी हुई है और सप्लाई सीमित है, जिससे लंबी अवधि में चांदी में तेजी की उम्मीद जताई जा रही है.

भले ही अभी बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है, लेकिन लंबी अवधि के नजरिए से सोना और चांदी दोनों ही निवेश के अच्छे विकल्प बने हुए हैं. वैश्विक अनिश्चितता, सीमित सप्लाई और बढ़ती मांग इनकी कीमतों को भविष्य में सहारा दे सकती है.

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