'दुनिया के लिए खतरा...' होर्मुज को लेकर क्यों दी अमेरिका ने ये चेतावनी, क्या अब आने वाला है बड़ा संकट?
होर्मुज को लेकर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने चेतावनी दे डाली है. यहां ईरान द्वारा टोल लगाने का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.
US Iran Tensions
मिडिल ईस्ट जंग के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ईरान ने बंद कर रखा है, जिसका असर ये है कि पूरी दुनिया में अब महंगाई देखने को मिल रही है. कई देश ईंधन की आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं और आयात-निर्यात में बहुत मुश्किल हो रही है. पेट्रोल-डीजल से लेकर एलपीजी और खाने-पीने की चीजे तक महंगी होती हुई दिख रही है. भारत में भी इसका असर देखने को मिल रहा है. जहां लगातार महंगाई बढ़ती जा रही है. वहीं अब होर्मुज को लेकर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने चेतावनी दे डाली है.
दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को वैश्विक तेल आपूर्ति की रीढ़ माना जाता है, जहां से प्रतिदिन लाखों बैरल कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है. ऐसे में यहां ईरान द्वारा टोल लगाने का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. जिसको लेकर अमेरिका ने चेतावनी दी है.
क्यों दी मार्को रुबियो ने चेतावनी?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर किसी भी प्रकार का टोल या शुल्क लगाए जाने की संभावना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है. मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान रुबियो ने साफ शब्दों में कहा कि इस समुद्री मार्ग पर टोल प्रणाली लागू करना अस्वीकार्य और पूरी तरह अवैध होगा. उन्होंने कहा "होर्मुज जलडमरूमध्य में टोल प्रणाली अस्वीकार्य है यह दुनिया के लिए खतरा है और पूरी तरह से अवैध है."
रुबियो का यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों पर ईरान के प्रभाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं. माना जा रहा है कि यदि जहाजों की आवाजाही पर बैन, अतिरिक्त शुल्क या किसी प्रकार की नाकाबंदी लागू होती है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है.
दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है. वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है. यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ता है और खाड़ी देशों से तेल निर्यात का प्रमुख माध्यम है.
रिपोर्ट के मुताबिक यदि इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में अचानक भारी उछाल आ सकता है. इसका सीधा असर पेट्रोल, डीजल और ऊर्जा आधारित उद्योगों पर पड़ेगा, जिससे वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका भी तेज हो जाएगी.
किन देशों पर पडे़गा ज्यादा असर?
होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने या आवाजाही सीमित करने का असर सबसे अधिक उन देशों पर पड़ सकता है जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं. इसमें भारत, चीन और कई यूरोपीय देश प्रमुख रूप से शामिल हैं. भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति विशेष चिंता का विषय हो सकती है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है. ऐसे में यदि तेल आपूर्ति प्रभावित होती है या परिवहन लागत बढ़ती है, तो घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं.
बीते कुछ दिनों में इसका असर देखने को मिल चुका है. लगभग 4 रुपये के आसपास भारत में पेट्रोल के दाम बढ़ चुके हैं. इसके अलावा एलपीजी, दूध और सीएनजी में भी बढ़ोतरी हुई. अगर जल्द से जल्द स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खुलता है तो महंगाई अपने चरम पर होगी.




