Iran War पर Trump-Netanyahu में बढ़ी तकरार! फोन कॉल में बढ़ा तनाव, आखिर क्या है पीछे की पूरी कहानी?
ईरान युद्ध को लेकर डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं. ट्रंप के हमले टालने के फैसले से इजराइल नाराज है. जानिए फोन कॉल में क्या बातचीत हुई और क्यों बढ़ा तनाव.
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के बीच सब कुछ सही नहीं चल रहा है. मंगलवार को ईरान युद्ध को लेकर दोनों के बीच तनावपूर्ण बातचीत हुई. CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच इस बात को लेकर मतभेद साफ नजर आए कि ईरान के खिलाफ आगे क्या कदम उठाया जाए.
एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि हाल के दिनों में दोनों नेताओं के बीच यह पहली बातचीत नहीं थी. रविवार को हुई बातचीत में ट्रंप ने नेतन्याहू को बताया था कि वह सप्ताह की शुरुआत में ईरान पर नए टारगेटेड हमले करने की योजना पर आगे बढ़ सकते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, इस सैन्य अभियान को नया नाम “ऑपरेशन स्लेजहैमर” दिया जाना था.
ट्रंप और नेतन्याहू के बीच खटपट का क्या है कारण?
रिपोर्ट के मुताबिक, जारी बातचीत से इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू नाराज हैं. वह लंबे समय से तेहरान के खिलाफ ज्यादा आक्रामक रुख अपनाने की वकालत करते रहे हैं. ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों और इजराइली सूत्रों के अनुसार, नेतन्याहू का मानना है कि हमलों में देरी का फायदा केवल ईरान को मिलेगा.
अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि मंगलवार की बातचीत में नेतन्याहू ने ट्रंप से साफ कहा कि प्रस्तावित हमलों को टालना गलती होगी और अमेरिका को अपनी योजना के मुताबिक आगे बढ़ना चाहिए. करीब एक घंटे चली बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू करने पर जोर दिया. मामले से जुड़े एक इजराइली सूत्र ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच मतभेद स्पष्ट थे. ट्रंप समझौते की संभावना तलाशना चाहते हैं, जबकि नेतन्याहू कुछ और उम्मीद कर रहे थे.
CNN से बात करने वाले एक अन्य इजराइली सूत्र ने कहा कि मंगलवार की फोन कॉल के बाद नेतन्याहू के करीबी अधिकारियों के बीच भी चिंता बढ़ गई है. सूत्र के मुताबिक, इजराइली सरकार के शीर्ष स्तर पर दोबारा सैन्य कार्रवाई की मजबूत इच्छा है और इस बात को लेकर नाराजगी बढ़ रही है कि ट्रंप अभी भी ईरान को कूटनीतिक बातचीत के लिए समय दे रहे हैं.
अमेरिका ने क्यों रोका हमला?
हालांकि, पहली बातचीत के करीब 24 घंटे बाद ट्रंप ने घोषणा की कि उन्होंने मंगलवार को प्रस्तावित हमलों को फिलहाल रोक दिया है. ट्रंप ने कहा कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों के अनुरोध के बाद यह फैसला लिया गया.
क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप?
अमेरिकी अधिकारी और मामले की जानकारी रखने वाले एक अन्य व्यक्ति के मुताबिक, इसके बाद से खाड़ी देशों ने व्हाइट हाउस और पाकिस्तान के मध्यस्थों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा है, ताकि आगे कूटनीतिक बातचीत के लिए एक ढांचा तैयार किया जा सके. बुधवार सुबह ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “हम ईरान मामले के अंतिम चरण में हैं. देखते हैं क्या होता है.” उन्होंने आगे कहा, “या तो समझौता होगा या फिर हमें कुछ ऐसे कदम उठाने पड़ेंगे जो काफी कठोर होंगे. लेकिन उम्मीद है कि ऐसा नहीं करना पड़ेगा.”
क्या पहले भी नाराज हो चुके हैं नेतन्याहू?
रिपोर्ट में कहा गया है कि नेतन्याहू की नाराजगी नई नहीं है. सूत्रों के मुताबिक, वह पहले भी इस बात से असंतुष्ट रहे हैं कि ट्रंप कई बार सख्त बयान देते हैं लेकिन बाद में सैन्य कार्रवाई रोक देते हैं. अमेरिकी अधिकारियों ने भी पहले स्वीकार किया है कि ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका और इजराइल के लक्ष्य पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं. जब ट्रंप से पूछा गया कि उन्होंने पिछली रात नेतन्याहू से क्या कहा था, तो उन्होंने संकेत दिया कि अंतिम फैसला उन्हीं का होगा.
ट्रंप ने कहा, “वह वही करेंगे जो मैं चाहूंगा.” हालांकि नेतन्याहू सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू करने का दबाव बना रहे हैं, लेकिन फिलहाल ट्रंप कूटनीतिक समझौते की कोशिशों को जारी रखे हुए हैं. उन्होंने बुधवार को कहा कि ईरान के साथ स्थिति “बहुत नाजुक मोड़” पर है और अगर कुछ और दिन बातचीत से लोगों की जान बच सकती है, तो कूटनीति को मौका देना सही होगा.
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बुधवार को कहा कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच पाकिस्तान के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जारी है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि दोनों पक्षों के बीच मतभेद कितने कम हुए हैं. एक क्षेत्रीय सूत्र के अनुसार, ईरान ने अपनी मुख्य मांगों से पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं और उसके परमाणु कार्यक्रम व फ्रीज की गई संपत्तियों जैसे मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं.




