मेलोडी से मोदी डिप्लोमेसी तक! इटली में PM मोदी के एक टॉफ़ी गिफ्ट ने कैसे बढ़ा दी भारत की मिठास की ग्लोबल डिमांड?
पीएम मोदी द्वारा जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफ़ी गिफ्ट करने के बाद भारत की टॉफ़ी इंडस्ट्री चर्चा में है. जानिए कैसे 74 देशों तक पहुंची भारतीय मिठास.
इटली दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को दी गई एक छोटी सी 'मेलोडी' टॉफ़ी अब भारत की सॉफ्ट पावर और ट्रेड डिप्लोमेसी का बड़ा प्रतीक बन गई है. रोम में हुई इस हल्की-फुल्की लेकिन बेहद चर्चित घटना ने सोशल मीडिया पर ऐसा माहौल बनाया कि भारत में कई जगहों पर मेलोडी टॉफ़ी की डिमांड अचानक बढ़ गई और स्टॉक तक खत्म होने लगे.
इसी बीच केंद्र सरकार के आंकड़ों ने भी दिखा दिया कि भारत की टॉफ़ी इंडस्ट्री अब सिर्फ बच्चों की जेब तक सीमित नहीं रही, बल्कि दुनिया के 74 देशों तक अपनी मिठास फैला चुकी है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भारत की 'Toffee टेल' को लेकर पोस्ट किया और इसे “मेलोडी टू द इयर्स” बताया.
आखिर भारत की टॉफ़ी इंडस्ट्री ने कितना बड़ा उछाल मारा
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के आंकड़ों के मुताबिक HSN 17049030 कैटेगरी, जिसमें टॉफ़ी और समान कन्फेक्शनरी उत्पाद शामिल हैं, उसका निर्यात FY14 में 49.7 करोड़ रुपये था जो FY26 तक बढ़कर 132 करोड़ रुपये पहुंच गया. यानी सिर्फ 12 वर्षों में रुपये के हिसाब से करीब 166% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं डॉलर के हिसाब से यह निर्यात 8.17 मिलियन डॉलर से बढ़कर 13.41 मिलियन डॉलर पहुंच गया, जो लगभग 64% की ग्रोथ है. अगर वॉल्यूम की बात करें तो टॉफ़ी एक्सपोर्ट 6,652 मीट्रिक टन से बढ़कर 7,357 मीट्रिक टन हो गया. यह करीब 10.6% की बढ़त है.
क्या सिर्फ मात्रा बढ़ी या टॉफ़ी की वैल्यू भी बढ़ी
सबसे दिलचस्प बात यह रही कि भारत की टॉफ़ी अब सिर्फ सस्ती बल्क सप्लाई नहीं रही. आंकड़ों के अनुसार प्रति मीट्रिक टन वैल्यू लगभग 2.4 गुना तक बढ़ गई है. इसका मतलब साफ है कि भारत अब हाई वैल्यू और प्रीमियम मार्केट्स में भी अपनी जगह बना रहा है. भारतीय मिठाइयों और कन्फेक्शनरी उत्पादों की इंटरनेशनल ब्रांडिंग लगातार मजबूत हो रही है.
आखिर टॉफ़ी की शुरुआत कहां से हुई थी
टॉफ़ी का इतिहास भी काफी दिलचस्प है. माना जाता है कि इसका जन्म 19वीं सदी की शुरुआत में इंग्लैंड में हुआ था. “Toffee” शब्द करीब 1825 के आसपास डिक्शनरी में शामिल हुआ. इसके शुरुआती रूप को वेल्स और इंग्लैंड के एवर्टन इलाके से जोड़ा जाता है, जहां सस्ती चीनी और मक्खन की उपलब्धता ने इसे लोकप्रिय बनाया. बाद में विक्टोरियन दौर में Everton Toffee काफी मशहूर हुई और फिर धीरे-धीरे यह पूरी दुनिया में फैल गई. अमेरिका में 'English टॉफ़ी' का अलग रूप सामने आया, जिसमें चॉकलेट कोटिंग भी शामिल की गई. इसके बाद अलग-अलग देशों ने अपने स्वाद के हिसाब से टॉफ़ी को नया रूप दिया.
मोदी-मेलोनी मुलाकात में टॉफ़ी क्यों बनी चर्चा का विषय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जॉर्जिया मेलोनी को दी गई मेलोडी टॉफ़ी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई. इसे भारत की सांस्कृतिक और भावनात्मक डिप्लोमेसी के तौर पर देखा गया. भारतीय यूजर्स ने इसे 'Melodi Diplomacy' तक कहना शुरू कर दिया. मजेदार बात यह रही कि इस वायरल मोमेंट के बाद कई दुकानों पर मेलोडी टॉफ़ी की डिमांड अचानक बढ़ गई. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत की टॉफ़ी कहानी अब सचमुच “melody to the ears” बन चुकी है.
भारत और इटली ने व्यापार को लेकर क्या बड़ा लक्ष्य तय किया है
20 मई को जारी भारत-इटली संयुक्त घोषणा में दोनों देशों ने आर्थिक और औद्योगिक सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई. घोषणा में कहा गया कि भारत और इटली ने 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 बिलियन यूरो तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. फिलहाल यह व्यापार करीब 14 बिलियन यूरो के आसपास है. दोनों देशों ने टेक्सटाइल, क्लीन टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा, पर्यटन, फार्मास्यूटिकल्स, डिजिटल टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स में निवेश बढ़ाने पर भी जोर दिया.
क्या भारत की मिठास अब ग्लोबल ब्रांड बनने जा रही है
जिस तरह भारतीय स्नैक्स, मसाले और मिठाइयां दुनिया भर में लोकप्रिय हो रही हैं, उससे यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले वर्षों में भारतीय कन्फेक्शनरी मार्केट भी बड़ा ग्लोबल ब्रांड बन सकता है. मेलोडी जैसी एक साधारण टॉफ़ी ने यह दिखा दिया कि कभी-कभी डिप्लोमेसी सिर्फ बड़े समझौतों से नहीं, बल्कि छोटे स्वाद और भावनात्मक जुड़ाव से भी दुनिया जीत लेती है.




