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शुभेंदु अधिकारी पीए हत्याकांड में गलत इंसान को पकड़ लाई पुलिस, एक जैसे नाम से बिगड़ा खेल, क्या है मामला?

चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में 'राज सिंह' नाम की समानता ने पुलिस को गलत आरोपी तक पहुंचा दिया. अब CBI ने असली शूटर राजकुमार सिंह को गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क की जांच तेज कर दी है.

शुभेंदु अधिकारी पीए हत्याकांड में गलत इंसान को पकड़ लाई पुलिस, एक जैसे नाम से बिगड़ा खेल, क्या है मामला?
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( Image Source:  X: @Shubhamshuklamp )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय5 Mins Read

Updated on: 21 May 2026 10:50 AM IST

शुभेंदु अधिकारी के करीबी और उनके निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या का मामला दिन-प्रतिदिन और ज्यादा रहस्यमयी होता जा रहा है. इस हाईप्रोफाइल मर्डर केस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नई-नई उलझनें सामने आ रही हैं. अब इस केस में एक ऐसा ट्विस्ट आया है जो जांच एजेंसियों को भी हैरान कर रहा है. दो लोगों के लगभग एक जैसे नामों ने पूरी जांच को कुछ समय के लिए गलत दिशा में मोड़ दिया. इस कहानी के दो मुख्य किरदार है राज सिंह और राजकुमार सिंह. नामों की इस समानता के कारण पुलिस पहले गलत व्यक्ति को गिरफ्तार कर बैठी, लेकिन अब सच्चाई सामने आ चुकी है.

दरअसल 11 मई को कोलकाता पुलिस ने अयोध्या पुलिस की मदद से राज सिंह नाम के एक व्यक्ति को हिरासत में लिया था. उससे पहले बक्सर से दो अन्य आरोपियों विक्की मौर्य और मयंक मिश्रा को पकड़ा जा चुका था. इन दोनों से पूछताछ में राज सिंह का नाम सामने आया. पुलिस को लगा कि यहीं वहीं प्रोफेशनल शूटर है जिसने हत्या में बड़ी भूमिका निभाई. इसलिए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया. लेकिन पूछताछ के दौरान कई बातें मैच नहीं कर रही थी. तकनीकी सबूत, लोकेशन के इनपुट और अन्य जानकारी गलत व्यक्ति से जुड़ नहीं रही थी. धीरे-धीरे शक बढ़ता गया. आखिरकार पता चला कि असली शूटर कोई और है.

असली शूटर की गिरफ्तारी

कुछ दिन पहले CBI ने चौथी बड़ी गिरफ्तारी में सफलता हासिल की. उत्तर प्रदेश के बलिया के रसड़ा इलाके के रहने वाले राजकुमार सिंह को मुजफ्फरनगर के छपार टोल प्लाजा के पास से पकड़ा गया. जांच एजेंसियों का अब साफ दावा है कि यही असली शूटर है. इलाके में कई लोग उसे राज सिंह के नाम पुकारते थे. इसी वजह से शुरूआती जांच पुलिस को भ्रम हो गया और गलत राज सिंह पकड़ा गया. बाद में उसे रिहा कर दिया गया. जांचकर्ताओं के अनुसार, पूरे शूटआउट में राजकुमार सिंह की भूमिका सबसे अहम थी. वह फ्रंटलाइन पर था और फायरिंग करने वाले मुख्य व्यक्ति माना जा रहा है.

पहले से गिरफ्तार तीन आरोपी

इसके अलावा विक्की मौर्य, मयंक राज मिश्रा और एक अन्य आरोपी पहले ही गिरफ्तार है. यह तीनों अभी 23 मई तक CBI की कस्टडी में हैं. अब राजकुमार सिंह की गिरफ्तारी के साथ कुल चार आरोपी हो गए हैं. हालांकि एजेंसियों को लगता है कि पूरा नेटवर्क इससे कहीं बड़ा है.

मुख्य साजिशकर्ता की तलाश

जांच में सबसे ज्यादा चर्चा विनय राय उर्फ पमपम राय के नाम की हो रही है. CBI और पुलिस के अनुसार वह इस पूरी साजिश में शामिल था. विनय राय बिहार और झारखंड में ट्रक ट्रांसपोर्ट का कारोबार करता है. उसके खिलाफ गाजीपुर और दिल्ली में हत्या, हत्या की कोशिश समेत गैंगस्टर एक्ट, आर्म्स एक्ट जैसे कई गंभीर मामले पहले से दर्ज हैं. CBI अब गाजीपुर के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी कर रही है. उसके देवरिया गांव स्थित घर पर ताला लगा मिला है. इसके अलावा गाजीपुर के मतसा गांव के संतोष राय का नाम भी सामने आया है, जो फिलहाल फरार है.

टोल प्लाजा और UPI पेमेंट ने खोला राज

बता दें कि इस मामले में सबसे बड़ा सुराग UPI पेमेंट से मिला. आरोपी मयंक राज मिश्रा को पूरा सफर का खर्च और टोल का पेमेंट करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. बंगाल जाते समय जितने भी टोल प्लाजा आए सब पेमेंट उसी के मोबाइल से किए गए. हावड़ा के बाली टोल गेट से शुरू करके पूरे रुट के ट्रांजेक्शन ट्रैक करने पर पुलिस को शूटरों तक पहुंचने का रास्ता मिल गया. मयंक को इस काम के लिए अलग से पैसे दिए गए थे. वह पूरे ऑपरेशन का 'फाइनेंस हैंडलर' था.

वारदात के बाद कैसे भागे?

शूटआउट के बाद आरोपियों ने चालाकी दिखाई. वे दोहड़िया इलाके से अलग-अलग दिशाओं में निकल गए ताकि पुलिस भ्रम में रहे. लेकिन रात करीब 11 बजे सभी सियालदह स्टेशन पर दोबारा मिले और वहीं से यूपी-बिहार जाने वाली ट्रेन पकड़ ली.

एक महीने से चल रही थी प्लानिंग

मामले की जांच कर रही जेंसियों का कहना है कि चंद्रनाथ रथ की हत्या कोई अचानक का फैसला नहीं था. उन्हें मारने की करीब एक महीने से साजिश रची जा रही थी. शूटरों को चंद्रनाथ रथ की तस्वीरें, उसकी घर की लोकेशन, रोजाना का रूट और सुरक्षा की जानकारी दी जा रही थी. बताया जाता है कि बंगाल चुनाव के समय शूटर एक बार उनके बहुत करीब भी पहुंच गए थे, लेकिन भीड़ और सुरक्षा के कारण प्लान रद्द कर दिया गया. शूटरों ने झारखंड की एक निसान माइक्रा कार का इस्तेमाल किया. यह कार पहले लिफ्ट की गई थी. CCTV फुटेज में यह कार बिराटी मोड़ और बारासात के 11 नंबर रेलवे फाटक के पास दिखी. हत्या वाले दिन शाम 4:05 से 6:55 तक कार वहीं खड़ी रही.

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