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क्या है Meta का नया 'Family Center' फीचर, कैसे पैरेंट्स रख सकेंगे बच्चों के Instagram-FB पर नजर? फर्जी उम्र बताना पड़ेगा भारी

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर Meta ने बड़े बदलावों का ऐलान किया है. अब पैरेंट्स बच्चों के Instagram-Facebook पर नजर रख सकेंगे.

Meta supervision tools
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Meta supervision tools

( Image Source:  X/ @StockMKTNewz )

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर बढ़ते वैश्विक दबाव के बीच टेक्नोलॉजी कंपनी मेटा ने बड़े बदलावों का ऐलान किया है. फेसबुक, इंस्टाग्राम, मैसेंजर और होराइजन जैसे प्लेटफॉर्म पर अब माता-पिता अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर पहले से ज्यादा नजर रख सकेंगे. कंपनी ने नए सेफ्टी फीचर्स और AI आधारित आयु जांच सिस्टम लॉन्च करने की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य नाबालिग यूजर्स की पहचान करना और उन्हें सुरक्षित डिजिटल माहौल देना है.

मेटा का यह कदम ऐसे समय में आया है जब दुनियाभर में सोशल मीडिया कंपनियों पर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है. खासतौर पर ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर सख्त नियम बनाए जा रहे हैं. ऐसे में मेटा ने फैमिली सेंटर”और नई आयु सत्यापन तकनीक के जरिए अपने प्लेटफॉर्म को ज्यादा सुरक्षित बनाने की कोशिश शुरू कर दी है.

कैसे होगी उम्र की पहचान?

मेटा अब AI की मदद से यूजर्स की उम्र का अनुमान लगाएगा. कंपनी के अनुसार, नई तकनीक किसी व्यक्ति की ऊंचाई, हड्डियों की संरचना और अन्य दृश्य संकेतों”का विश्लेषण करेगी. इसके साथ ही सोशल मीडिया पोस्ट, बातचीत, फोटो, वीडियो, बायो, कैप्शन और कमेंट्स को स्कैन करके भी उम्र का अंदाजा लगाया जाएगा.

जन्मदिन की पार्टी, स्कूल ग्रेड और अन्य जानकारी के आधार पर सिस्टम यह पहचानने की कोशिश करेगा कि कोई यूजर 13 साल से कम उम्र का तो नहीं है. अगर किसी अकाउंट के नाबालिग होने का संदेह हुआ तो मेटा ऐसे खातों को इनएक्टिव भी कर सकता है.

कैसे नाबालिग अकाउंट की रिपोर्टिंग होगी आसान?

मेटा ने कम उम्र के यूजर्स की रिपोर्टिंग प्रक्रिया को भी आसान बनाने का दावा किया है. अब यूजर्स किसी संदिग्ध नाबालिग अकाउंट की रिपोर्ट कर सकेंगे, जिसके बाद एआई और मानव समीक्षक मिलकर उसकी जांच करेंगे. कंपनी का कहना है कि इससे रिपोर्ट्स पर अधिक तेजी और विश्वसनीयता के साथ कार्रवाई संभव होगी. हालांकि मेटा ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर किसी यूजर को गलती से नाबालिग माना जाता है, तो उसे आयु सत्यापन के जरिए अपना अकाउंट बनाए रखने का मौका मिलेगा.

क्या आसानी से तोड़ सकते हैं नियम?

रिपोर्ट्स के मुताबिक विशेषज्ञों का मानना है कि आयु सत्यापन तकनीक की कुछ सीमाएं भी हैं. कई बच्चे अपनी प्रोफाइल और कंटेंट को इस तरह पेश कर सकते हैं कि वे बड़े दिखाई दें. ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि क्या नए नियंत्रण पूरी तरह प्रभावी साबित होंगे. ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पहले से ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर बैन है. इसके बावजूद कई नाबालिग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं.

फैमिली सेंटर से क्या मिलेंगे फीचर्स?

मेटा ने फैमिली सेंटर नाम से नया फीचर लॉन्च किया है, जहां फेसबुक, इंस्टाग्राम, होराइजन और मैसेंजर के पैरेंटल कंट्रोल टूल्स एक ही जगह उपलब्ध होंगे. इस फीचर के जरिए माता-पिता को नोटिफिकेशन मिलेगा जब उनके बच्चे फोटोग्राफी, खेल, सौंदर्य या अन्य नए विषयों में रुचि दिखाएंगे. मेटा का कहना है कि इससे माता-पिता अपने बच्चों के साथ सार्थक बातचीत कर सकेंगे और उनकी ऑनलाइन गतिविधियों को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे.

हालांकि, इस सिस्टम की सबसे बड़ी सीमा यह है कि माता-पिता को अपने बच्चों को निगरानी का निमंत्रण भेजना होगा और बच्चों को उसे स्वीकार करना होगा. यानी बच्चे चाहें तो अपने अकाउंट की जानकारी साझा करने से इनकार भी कर सकते हैं. इससे बच्चों की निजता बनी रहती है, जिसे संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार सम्मेलन के अनुच्छेद 16 के तहत मान्यता दी गई है.

माता-पिता की भूमिका क्यों जरूरी?

ये नए फीचर्स तभी प्रभावी होंगे जब माता-पिता और बच्चे दोनों इनका उपयोग करना चाहेंगे. माता-पिता को न केवल निगरानी एक्सेस मांगनी होगी, बल्कि बच्चों से बातचीत करके यह भी समझना होगा कि वे किस तरह की सामग्री देख रहे हैं. 2024 में मेटा के तत्कालीन वैश्विक मामलों के प्रमुख निक क्लेग ने कहा था कि 'भले ही हम ये नियंत्रण बना लें, माता-पिता इनका उपयोग नहीं करते हैं.'

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