कानून, राष्ट्रपति के अधिकार और लिमिटेड पावर- जानें वह 10 वजह जिनके कारण कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को किया रद्द
यूएस की सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के जरिए लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया है. हम आपको 10 ऐसी वजह बताने वाले हैं, जिनकी वजह से टैरिफ को रद्द किया गया.
USA Tariff Issue: अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए कई टैरिफ (आयात शुल्क) को रद्द कर दिया. 6–3 के बहुमत से दिए गए फैसले में अदालत ने कहा कि जिस इमरजेंसी कानून का सहारा लेकर ट्रंप ने ये टैरिफ लगाए थे, वह राष्ट्रपति को ऐसा अधिकार नहीं देता है. यह फैसला ट्रंप के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि अपने दूसरे कार्यकाल में उन्होंने टैरिफ को आर्थिक और विदेश नीति के हथियार के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया था.
बहुमत में चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स के साथ जस्टिस सोनिया सोतोमयोर, एलेना केगन, नील गोरसच, एमी कोनी बैरेट और केतनजी ब्राउन जैक्सन शामिल थे. वहीं जस्टिस क्लेरेंस थॉमस, सैमुअल अलिटो और ब्रेट कैवनॉ ने असहमति जताई थी.
क्या है IEEPA जिस पर हुआ विवाद?
मामले के केंद्र में 1977 का इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) था. यह कानून राष्ट्रपति को नेशनल सिक्योरिटी, विदेश नीति या अर्थव्यवस्था से जुड़े असामान्य और गंभीर खतरे की स्थिति में आयात को रेगुलेट करने की इजाजत देता है.
ट्रंप ने इसी कानून का हवाला देकर लगभग हर देश पर बड़ी मात्रा में टैरिफ लगा दिए थे. उन्होंने बड़े और लगातार व्यापार घाटे का हवाला दिया था और चीन, कनाडा और मेक्सिको पर अमेरिका में अवैध फेंटानिल और दूसरी ड्रग्स की आपूर्ति रोकने में नाकामयाब रहने का इल्जाम लगाया था.
US की अदालत ने टैरिफ क्यों रद्द किए
1. कानून में टैरिफ का जिक्र नहीं
IEEPA राष्ट्रपति को आयात रेगुलेट करने की इजाजत देता है, लेकिन इसमें टैरिफ, ड्यूटी, टैक्स या लेवी जैसे शब्दों का कहीं जिक्र नहीं है. अदालत ने इसे अहम माना.
2. पहले किसी भी राष्ट्रपति ने ऐसा कदम नहीं उठाया
अदालत ने कहा कि ट्रंप से पहले किसी भी राष्ट्रपति ने IEEPA का इस्तेमाल टैरिफ लगाने के लिए नहीं किया था. इससे यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस ने ऐसा अधिकार देने का इरादा नहीं रखा था.
3. टैरिफ दूसरे इमरजेंसी प्लान्स से अलग
अदालत ने कहा कि कोटा या एम्बार्गो जैसे उपायों से अलग, टैरिफ सीधे घरेलू आयातकों पर लागू होते हैं और सरकार के लिए राजस्व जुटाते हैं. इसलिए वे इस कानून के दायरे में नहीं आते.
4. राष्ट्रपति को अनलिमिटेड ताकत मिलती है
अदालत ने कहा कि अगर प्रशासन की दलील मानी जाए तो राष्ट्रपति किसी भी देश के किसी भी प्रोडक्ट पर कितना भी और कितने वक्त तक भी शुल्क लगा सकता है, जो कांग्रेस ने साफ तौर पर ऑथराइज़ नहीं किया है.
5. कांग्रेस से इजाजत जरूरी
बहुमत में शामिल तीन जजों (रॉबर्ट्स, गोरसच और बैरेट) ने कहा कि बड़े आर्थिक या राजनीतिक अधिकारों के लिए कांग्रेस की साफ तौर पर इजाजत जरूरी है.
6. IEEPA से नहीं मिलती टैरिफ लगाने की ताकत
अलग-अलग तर्कों के बावजूद सभी छह जज इस बात पर सहमत थे कि IEEPA में टैरिफ लगाने की शक्ति शामिल नहीं है.
7. CJI ने कही ये बात
चीफ जस्टिस रॉबर्ट्स ने लिखा,"आज हमारा काम यह तय करना है कि IEEPA में राष्ट्रपति को दी गई 'आयात को रेगुलेट करने' की शक्ति क्या टैरिफ लगाने की शक्ति को भी शामिल करती है. इसका जवाब है- नहीं.”
8. IEEPA देता है इस बात की इजाजत
अदालत ने कहा कि IEEPA इमरजेंसी कंडीशन में कोटा या एम्बार्गो जैसे कदमों की इजाजत देता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि टैरिफ भी इसमें शामिल हैं.
9. टैरिफ का मार्किट पर असर
जिन टैरिफ को रद्द किया गया, उनसे फर्नीचर, कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आयातित सामानों की कीमतें बढ़ी थीं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि कीमतें तुरंत कम नहीं होंगी, क्योंकि ट्रंप नए टैरिफ की तैयारी में हैं और कंपनियां अनिश्चितता के बीच कीमतें ऊंची रख सकती हैं.
10. टैरिफ रेवेन्यू का रास्ता खुला
इस फैसले से 100 अरब डॉलर से अधिक के टैरिफ रेवेन्यू की वापसी का रास्ता खुल सकता है. यह प्रोसेस निचली अदालतों, यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड, कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन और ट्रेजरी डिपार्टमेंट की निगरानी में हो सकती है.
कोर्ट के फैसले पर क्या बोले ट्रंप?
फैसले के कुछ ही घंटों के भीतर ट्रंप ने घोषणा की कि वह 24 फरवरी से सभी आयात पर 10% का नया वैश्विक टैरिफ लगाएंगे. इसके लिए उन्होंने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 का सहारा लिया, जिसका पहले किसी राष्ट्रपति ने इस्तेमाल नहीं किया था. उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे देशों की व्यापार नीतियों की जांच के लिए धारा 301 के तहत और टैरिफ लगाए जाएंगे.
ट्रंप ने यह भी कहा कि इस फैसले का भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कोई असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि भारत टैरिफ देता रहेगा, जबकि अमेरिका नहीं देगा. ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि अब समझौता निष्पक्ष है और अमेरिका भारत को टैरिफ नहीं देगा, जबकि भारत अमेरिका को देगा.




