ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में भारत की एंट्री! कौन हैं भारत को रिप्रेजेंट वाली नमग्या सी खम्पा और क्या है उनका रोल?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत ने ऑब्जर्वर के रूप में हिस्सा लिया. भारत की ओर से 2000 बैच की IFS अधिकारी नमग्या सी खम्पा ने वाशिंगटन में देश का प्रतिनिधित्व किया. जानिए, IFS अधिकारी नमग्या सी खम्पा की प्रोफाइल और भूमिका.
विश्व कूटनीति के बदलते समीकरणों के बीच अमेरिका की एक नई शांति पहल में भारत की मौजूदगी ने अंतरराष्ट्रीय हलकों में हलचल पैदा कर दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल ‘Board of Peace’ की पहली बैठक में भारत ने ऑब्जर्वर के तौर पर हिस्सा लिया. इस बैठक में देश का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ IFS अधिकारी नमग्या सी खम्पा ने किया. यह सिर्फ एक औपचारिक भागीदारी नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की रणनीतिक उपस्थिति का संकेत माना जा रहा है.
दरअसल, गाजा संकट और मध्य पूर्व की जटिल राजनीति के बीच शुरू हुई इस पहल में लगभग 50 देशों की मौजूदगी रही. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर नमग्या सी खम्पा कौन हैं, जिन पर वाशिंगटन में भारत का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी है? क्या भारत इस नए वैश्विक मंच के जरिए अपनी कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत करने की तैयारी में है?
कौन हैं नमग्या सी खम्पा?
नमग्या सी खम्पा 2000 बैच की भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी हैं. वर्तमान में वह वाशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास में चार्ज डी’अफेयर्स (Cd’A) और डिप्टी चीफ ऑफ मिशन के रूप में कार्यरत हैं. राजदूत की अनुपस्थिति में वह मिशन की प्रमुख जिम्मेदारियां संभालती हैं और भारत-अमेरिका के बीच कूटनीतिक समन्वय की निगरानी करती हैं. उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि मजबूत रही है. उन्होंने इंटरनेशनल रिलेशंस में मास्टर्स और एम.फिल. किया है.
नमग्या खम्पा का कूटनीतिक अनुभव कितना मजबूत है?
नमग्या खम्पा का कूटनीतिक करियर विविध और वैश्विक अनुभव से भरपूर रहा है. केन्या में भारत की हाई कमिश्नर, सोमालिया में भारत की मान्यता प्राप्त राजदूत, नेपाल (काठमांडू) में डिप्टी चीफ ऑफ मिशन, चीन में दो बार भारतीय मिशन में नियुक्ति, न्यूयॉर्क स्थित यूएन में भारत के परमानेंट मिशन में सेवाएं, और यूएनडीपी और यूएनएफपीए के एग्जीक्यूटिव बोर्ड में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं.
PMO में डेप्युटेशन बेसिस भी काम कर चुकी हैं. विदेश मंत्रालय में डेवलपमेंट पार्टनरशिप डिवीजन की प्रमुख रह चुकी हैं. उनकी भूमिका भारत की विकास सहयोग नीति और पड़ोसी देशों के साथ अनुदान सहायता कार्यक्रमों में भी महत्वपूर्ण रही है.
भारत ने किस हैसियत से बैठक में हिस्सा लिया?
भारत ने 19 फरवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर बॉर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में ‘ऑब्जर्वर’ के तौर पर भाग लिया. यह बैठक वाशिंगटन डीसी में हुई, जिसमें करीब 50 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए. भारत ने अभी औपचारिक सदस्यता नहीं ली है, लेकिन बैठक में भागीदारी यह संकेत देती है कि नई दिल्ली इस पहल पर गंभीरता से विचार कर रहा है.
क्या है ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’?
‘बोर्ड ऑफ पीस’ की शुरुआत पिछले महीने विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दावोस मंच से की गई थी. इस पहल का प्रारंभिक उद्देश्य गाजा में इजराइल-हमास संघर्ष के बाद सीजफायर की निगरानी, पुनर्निर्माण प्रयासों में सहयोग और दीर्घकालिक स्थिरता को बढ़ावा देना था. हालांकि, बाद में ट्रंप ने संकेत दिया कि यह मंच भविष्य में वैश्विक विवादों को सुलझाने के लिए एक बड़े ढांचे के रूप में विकसित हो सकता है.
भारत की रणनीति क्या संकेत देती है?
भारत का ‘ऑब्जर्वर’ के रूप में शामिल होना यह दर्शाता है कि वह वैश्विक शांति पहलों में सक्रिय लेकिन संतुलित भूमिका निभाना चाहता है. नई दिल्ली की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी बहुपक्षीय मंच में भागीदारी भारत के रणनीतिक और कूटनीतिक हितों के अनुरूप हो. हालांकि, पूर्ण सदस्यता से पहले वह इसके ढांचे, उद्देश्य और दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन कर रहा है. ट्रंप की इस पहल में भारत की भागीदारी भविष्य में पश्चिम एशिया और वैश्विक कूटनीति में नई संभावनाओं के संकेत दे सकती है.




