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Strait Of Hormuz: विश्‍व व्‍यापार और तेल सप्लाई की लाइफलाइन - अमेरिका ईरान तनाव से बंद हुआ तो क्या होगा?

स्ट्रेट आफ होर्मुज सिर्फ एक समुद्री मार्ग नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की धुरी है. अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने पर इसकी अहमियत और बढ़ जाती है. यदि कभी यह गंभीर रूप से बाधित होता है, तो असर तेल कीमतों, महंगाई, शेयर बाजार और वैश्विक कूटनीति तक दिखेगा.

Importance of Strait of Hormuz
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दुनिया की अर्थव्यवस्था की नब्ज अगर कहीं धड़कती है, तो वह है स्ट्रेट आफ होर्मुज (Strait of Hormuz). यह सिर्फ समुद्र का एक संकरा रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा है. रोजाना लाखों बैरल कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी इसी जलडमरूमध्य से होकर एशिया, यूरोप और अमेरिका तक पहुंचती है. दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी मार्ग पर निर्भर है. ऐसे में अगर यहां जरा सी भी हलचल होती है, तो उसके झटके सीधे तेल की कीमतों, शेयर बाजारों और आम लोगों की जेब तक महसूस होते हैं.

इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव इस रणनीतिक मार्ग को फिर सुर्खियों में ले आया है. परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, टैंकर जब्ती और सैन्य मौजूदगी के बीच अगर हालात बिगड़े और होर्मुज में आवाजाही प्रभावित हुई, तो इसका असर सिर्फ खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा. तेल 100 से 150 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता है, महंगाई में उछाल आ सकता है और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता फैल सकती है. सवाल यह है, अगर होर्मुज सचमुच बंद हुआ, तो क्या दुनिया एक और ऊर्जा संकट के लिए तैयार है?

तनाव की जड़ क्या है?

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव की जड़ें कई दशक पुरानी हैं. 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद दोनों देशों के रिश्ते बिगड़ गए. जब तेहरान में अमेरिकी दूतावास बंधक संकट हुआ और राजनयिक संबंध टूट गए. इसके बाद से परमाणु कार्यक्रम सबसे बड़ा विवाद बना. अमेरिका का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल करना चाहता है. जबकि ईरान इसे शांतिपूर्ण ऊर्जा कार्यक्रम बताता है. 2015 में परमाणु समझौता (JCPOA) हुआ, लेकिन 2018 में अमेरिका के समझौते से बाहर निकलने और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने से तनाव फिर बढ़ गया.

इसके अलावा, पश्चिम एशिया में प्रभाव की प्रतिस्पर्धा, इजराइल और खाड़ी देशों के साथ अमेरिका की नजदीकी, इराक-सीरिया-यमन जैसे क्षेत्रों में ईरान समर्थित गुटों की भूमिका, और खाड़ी में टैंकर/ड्रोन घटनाएं भी टकराव को हवा देती रही हैं. कुल मिलाकर यह विवाद परमाणु मुद्दे, क्षेत्रीय वर्चस्व, सुरक्षा चिंताओं और आर्थिक प्रतिबंधों का मिश्रण है, जिसने दोनों देशों को लगातार आमने-सामने रखा है.

मौजूदा तनाव की वजह क्या?

अमेरिकी प्रतिबंधों और ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर बयानबाजी तेज है. खाड़ी में नौसैनिक मौजूदगी बढ़ना और ड्रोन/मिसाइल हमलों के आरोप. क्षेत्रीय सहयोगियों (इजराइल, सऊदी अरब आदि) की भूमिका से तनाव और जटिल.

क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों अहम?

स्ट्रेट आफ होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला संकरा समुद्री मार्ग है. इसकी चौड़ाई सबसे संकरी जगह पर लगभग 33 किलोमीटर है. जबकि शिपिंग लेन इससे भी कम चौड़ी है. यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे संवेदनशील ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है. यह समुद्री मार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है. फारस की खाड़ी से निकलने वाला कच्चा तेल और एलएनजी इसी रास्ते से वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है.

वैश्विक व्यापार में कितनी हिस्सेदारी?

दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले तेल व्यापार का लगभग 20% से अधिक हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे प्रमुख ऊर्जा निर्यातक देश अपने तेल या फिर गैस निर्यात के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं. वैश्विक एलएनजी सप्लाई, खासकर कतर से होने वाला निर्यात, काफी हद तक इसी मार्ग से गुजरता है. यानी, अगर यहां रुकावट आती है तो उसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा. एशिया, यूरोप और अमेरिका तक ऊर्जा कीमतों में उछाल दिख सकता है.

अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज

United States और Iran के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर लंबे समय से तनाव रहा है. साल 2019–2023 के बीच कई बार टैंकर जब्ती, ड्रोन हमले और नौसैनिक टकराव की घटनाएं सामने आईं. अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ाई, ताकि जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. ईरान ने कई बार संकेत दिया है कि अगर उस पर दबाव बढ़ा तो वह होर्मुज़ में आवाजाही प्रभावित कर सकता है.

अगर ईरान होर्मुज बंद कर दे तो क्या होगा?

तेल की कीमतों में भारी उछाल आएगा. वैश्विक सप्लाई का बड़ा हिस्सा रुक जाएगा. ब्रेंट क्रूड की कीमतें तेजी से 100 से 150 डॉलर प्रति बैरल या उससे ऊपर जा सकती हैं.

भारत और एशियाई देशों पर असर

भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. अगर आपूर्ति बाधित हुई, तो पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे, महंगाई दर में उछाल आ सकता है. चालू खाता घाटा बढ़ जाएगा. वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट आ सकता है. ऊर्जा संकट से निवेशकों में घबराहट बढ़ेगी, जिससे बाजारों में अस्थिरता आ सकती है.

कितनी है वैकल्पिक मार्गों की सीमित क्षमता?

कुछ देशों के पास पाइपलाइन या अन्य निर्यात मार्ग हैं (जैसे सऊदी का पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन), लेकिन वे पूरी कमी की भरपाई नहीं कर सकते.

सैन्य टकराव का खतरा?

अगर आवाजाही रोकी गई, तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं, जिससे क्षेत्रीय युद्ध की आशंका बढ़ जाएगी.

क्या वास्तव में बंद करना आसान है?

पूरी तरह से मार्ग बंद करना आसान नहीं है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है. अमेरिकी और सहयोगी नौसेनाएं लगातार गश्त करती हैं. लंबी अवधि तक बंद रखने पर ईरान को भी आर्थिक नुकसान होगा, क्योंकि उसका खुद का तेल निर्यात भी प्रभावित होगा. इसलिए, विपूर्ण बंदी की संभावना कम, लेकिन छिटपुट व्यवधान, जहाजों की जब्ती या तनावपूर्ण हालात ज्यादा संभावित हैं.

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