पहले कार्रवाई और फिर सम्मान! आखिर कौन होते हैं बटुक, क्या है इनका मतलब- Detailed
उत्तर प्रदेश में बटुक और शिखा पर सियासत शुरू हो गई है. पहले कुंभ में पुलिस ने इन्हें पीटा पर कुछ समय बाद प्रयागराज के इन पीड़ित बटुकों को सूबे के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक सम्मानित करते हैं. आखिर ये माजरा क्या है...
What is Batuk Meaning Religious Significance: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आस्था, परंपरा और सियासत आमने-सामने दिखाई दे रही है. हाल के दिनों में बटुक और शिखा को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े राजनीतिक विमर्श का रूप ले चुका है. माघ मेले के दौरान कुछ बटुकों के साथ कथित तौर पर पुलिस द्वारा की गई मारपीट ने इस मुद्दे को गरमा दिया. दिलचस्प बात यह रही कि कुछ समय बाद प्रयागराज के इन्हीं पीड़ित बटुकों को प्रदेश के डिप्टी सीएम Brajesh Pathak द्वारा सम्मानित किया गया.
एक ही घटनाक्रम के दो अलग-अलग दृश्य- पहले कार्रवाई और फिर सम्मान, ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या यह केवल प्रशासनिक कार्रवाई थी या फिर धार्मिक पहचान पर संवेदनशीलता की कमी? और बाद में किया गया सम्मान क्या संवेदना का संकेत था या सियासी संदेश? उत्तर प्रदेश की राजनीति में बटुक और शिखा का यह मुद्दा अब आस्था से आगे बढ़कर एक व्यापक राजनीतिक बहस का केंद्र बनता दिख रहा है. तो आइये जानते हैं कि आखिर बटुक होते क्या हैं और इनका क्या है धार्मिक दृष्टि से महत्व-
बटुकों को सम्मानित करते डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक
1. बटुक का मतलब क्या है?
बटुक शब्द संस्कृत से लिया गया है. इसका सामान्य अर्थ है- छोटा बालक. विशेष रूप से यह शब्द उस बालक के लिए प्रयुक्त होता है, जिसने उपनयन संस्कार (जनेऊ) प्राप्त किया हो और जो शिक्षा के लिए गुरुकुल में प्रवेश कर चुका हो. गुरुकुल परंपरा के अंतर्गत विद्यार्थी सादा जीवन जीते हैं. वे संयम, अनुशासन और ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए वेद-शास्त्रों का अध्ययन करते हैं- ऐसे विद्यार्थियों को ही बटुक कहा जाता है.
2. धार्मिक दृष्टि से बटुक क्या?
धार्मिक दृष्टि से बटुक शब्द का एक विशेष महत्व है. यह भगवान भैरव के बाल स्वरूप से जुड़ा है. बटुक भैरव को भगवान शिव के उग्र रूप भैरव का बाल स्वरूप माना जाता है. जहां भैरव का स्वरूप शक्तिशाली और कभी-कभी उग्र माना जाता है, वहीं बटुक भैरव का रूप कोमल और भक्तों के लिए सहज माना जाता है. मान्यता है कि बटुक भैरव की पूजा करने से भय दूर होता है, नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है और जीवन में साहस एवं सुरक्षा का भाव उत्पन्न होता है.
बटुकों के साथ डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक
3. आज के समय में बटुक
आज के समय में बटुक शब्द सामान्य बोलचाल में कम उपयोग होता है, लेकिन धार्मिक ग्रंथों, पूजा-पाठ और मंदिरों में यह शब्द अब भी प्रचलित है. विशेष रूप से बटुक भैरव की पूजा कई स्थानों पर की जाती है.





