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'कश्मीरी मुहाजिर' से लेकर 'प्रिंसिपल' तक, पुलवामा आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हमजा बुरहान के बारे में क्या कह रही पाक मीडिया?

पुलवामा अटैक के साजिशकर्ता और अल-बद्र आतंकी संगठन से जुड़े हमजा बुरहान की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुज़फ्फराबाद में गोली मारकर हत्या कर दी गई. हमले के बाद एक संदिग्ध हमलावर को मौके से गिरफ्तार किया गया है. भारतीय मीडिया उसे पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड बता रहा है, जबकि पाकिस्तानी मीडिया उसे सिर्फ कॉलेज प्रिंसिपल और शिक्षक बताकर आतंकी कनेक्शन छिपाने की कोशिश कर रही है.

Hamza Burhan
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आतंकी हमजा बुरहान

( Image Source:  x.com/MaskedMan1947 )

Pakistan Media on Terrorist Hamza Burhan Shot Dead In PoK: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के मुजफ्फराबाद में आतंकी हमजा बुरहान की उसके कॉलेज के बाहर अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी. स्थानीय मीडिया (जैसे BBC उर्दू) और सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, गोजरा इलाके में कॉलेज के सामने हमज़ा बुरहान पर तब ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गईं, जब वह कॉलेज से बाहर आ रहा था. उसके सिर में तीन गोलियां लगीं और अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

पाकिस्तानी पुलिस (डीएसपी इश्तियाक गिलानी) के बयान के मुताबिक, घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से एक संदिग्ध हमलावर को पकड़ा गया है, जिसका नाम अब्दुल्ला कमाल बताया जा रहा है. वह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के वाह कैंट का रहने वाला है. वहीं, पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हमजा बुरहान मूल रूप से भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का रहने वाला था और पलायन करके वहां आया था. वह वहां अपनी आतंकी पहचान छिपाकर एक शिक्षक और प्रिंसिपल के रूप में जीवन बिता रहा था.

भारतीय मीडिया ने क्या कहा?

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और मीडिया के अनुसार, हमज़ा बुरहान (असली नाम अर्जुमंद गुलज़ार डार) 2019 के पुलवामा आतंकी हमले का मुख्य साज़िशकर्ता और आतंकी संगठन 'अल-बद्र' का शीर्ष कमांडर था. भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने उसे साल 2022 में आधिकारिक तौर पर आतंकवादी घोषित किया था. भारतीय मीडिया इस घटना को पाकिस्तान में छिपे भारत-विरोधी आतंकियों पर हो रहे लगातार रहस्यमयी हमलों (अज्ञात हमलावरों की कार्रवाई) की कड़ी से जोड़कर देख रहा है. कुछ शुरुआती इनपुट्स में इसे पैसों के विवाद से जुड़ी गैंगवार भी बताया जा रहा है.

हमजा बुरहान की मौत पर क्या कह रही पाक मीडिया?

हमज़ा बुरहान (अर्जुमंद गुलज़ार डार) की मुज़फ़्फ़राबाद (PoK) में हुई हत्या पर डॉन (Dawn), ARY न्यूज़ और अन्य पाकिस्तानी मीडिया आउटलेट्स ने उसे एक 'निजी कॉलेज के प्रिंसिपल' और 'स्थानीय शिक्षक' के रूप में रिपोर्ट किया है. पाकिस्तानी मीडिया ने इस घटना में किसी भी 'आतंकवादी कनेक्शन' या 'पुलवामा हमले' के दावों को पूरी तरह छुपाया है और इसे एक आपराधिक कृत्य व टारगेट किलिंग के रूप में पेश किया है.

1. डॉन (Dawn) की रिपोर्टिंग- निजी रंजिश और आपराधिक एंगल

डॉन ने अपनी रिपोर्ट में इस घटना को मुख्य रूप से एक प्रशासनिक और स्थानीय कानून-व्यवस्था का मामला बताया है. अखबार ने लिखा कि मुज़फ़्फ़राबाद के गोजरा इलाके में एक निजी स्कूल/कॉलेज के प्रिंसिपल पर अज्ञात मोटरसाइकिल सवारों ने हमला किया. डॉन ने मुज़फ़्फ़राबाद पुलिस (Counter Terrorism Department - CTD) के बयानों को प्रमुखता दी, जिसमें बताया गया कि स्थानीय लोगों की मुस्तैदी से एक संदिग्ध हमलावर अब्दुल्ला कमाल को मौके से ही हथियार के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है. अखबार ने हत्या के पीछे किसी बड़ी साजिश के बजाय आपसी विवाद या व्यक्तिगत रंजिश की जांच की बात लिखी है.

2. ARY News और एक्सप्रेस ट्रिब्यून का रुख-टारगेट किलिंग और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

ARY न्यूज़ ने इसे मुज़फ़्फ़राबाद में दिनदहाड़े हुई 'टारगेट किलिंग' (लक्षित हत्या) के रूप में प्रसारित किया. चैनल ने इस बात पर चिंता जताई कि कैसे एक बाहरी हमलावर (पाकिस्तानी पंजाब के वाह कैंट का निवासी) PoK के संवेदनशील इलाके में हथियार लेकर घुस आया. इन आउटलेट्स ने हमज़ा बुरहान को सिर्फ 'एक कश्मीरी मुहाजिर (शरणार्थी)' और 'शिक्षक' बताया, जो वहां के बच्चों को पढ़ा रहा था. भारतीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उसे 'अल-बद्र' का कमांडर या पुलवामा का साज़िशकर्ता कहे जाने का इन मीडिया चैनलों पर कोई ज़िक्र नहीं किया गया.

3. अन्य पाकिस्तानी और स्थानीय मीडिया आउटलेट्स (जैसे जियो न्यूज़, जियो टीवी)

  • स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमज़ा के सिर में तीन गोलियां लगी थीं, जिसके बाद उसे शेख़ ज़ायद अस्पताल (AIMS) में वेंटिलेटर पर रखा गया जहाँ उसकी मौत हो गई.
  • कुछ पाकिस्तानी पत्रकारों और स्थानीय न्यूज़ पोर्टल्स ने बताया कि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा कारणों की वजह से उसे मुज़फ़्फ़राबाद के बजाय इस्लामाबाद के फातिमा स्कूल के पास सुपुर्द-ए-खाक (दफनाया) किया गया है.
  • पाकिस्तानी मीडिया में इस बात को लेकर भी सुगबुगाहट है कि पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में कई कश्मीरी और धार्मिक एक्टिविस्ट्स (जिन्हें भारत आतंकी कहता है) इसी तरह 'अज्ञात हमलावरों' का शिकार बने हैं, जिसे वे देश की आंतरिक सुरक्षा में एक गंभीर चूक मान रहे हैं.

पाकिस्तानी मीडिया बनाम भारतीय मीडिया का अंतर

मुख्य बिंदु

पाकिस्तानी मीडिया (Dawn, ARY आदि)

भारतीय मीडिया

हमजा की पहचान

एक प्राइवेट कॉलेज का सीधा-साधा प्रिंसिपल/शिक्षक

अल-बद्र का खूंखार आतंकी कमांडर 'डॉक्टर'

पुलवामा कनेक्शन

कोई उल्लेख नहीं (पूरी तरह छुपाया गया)

2019 पुलवामा हमले का मुख्य साज़िशकर्ता

हत्या का कारण

आपसी रंजिश, पैसों का विवाद या स्थानीय गैंगवार

पाकिस्तान में छिपे भारत-विरोधियों का 'अज्ञात किलर' द्वारा खात्मा

मुज़फ़्फ़राबाद पुलिस की FIR में क्या कहा गया है?

  • मुज़फ़्फ़राबाद पुलिस की FIR के मुताबिक, हमला गोजरा इलाके में एक निजी कॉलेज (जहां हमज़ा बुरहान प्रिंसिपल के रूप में कार्यरत था) के ठीक बाहर सुबह के समय हुआ.
  • एफआईआर में दर्ज चश्मदीदों के बयानों के अनुसार, हमलावर घात लगाकर बैठे थे. जैसे ही हमज़ा बुरहान कॉलेज की इमारत से बाहर निकला, उस पर बहुत करीब से निशाना साधकर अंधाधुंध गोलियां चलाई गईं. उसके सिर में तीन गोलियां लगी थीं.
  • हमजा को अत्यंत गंभीर और नाजुक हालत में नजदीकी शेख जायद अस्पताल (AIMS) ले जाया गया, जहां उसे वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन अत्यधिक खून बह जाने और सिर की गंभीर चोटों के कारण उसने दम तोड़ दिया.
  • पुलिस ने इसे सुनियोजित हत्या मानते हुए आतंकवादी विरोधी अधिनियम (ATA) और स्थानीय दंड संहिता की हत्या से जुड़ी गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है.

हमलावर अब्दुल्ला कमाल की गिरफ़्तारी

गोलीबारी की आवाज़ सुनकर कॉलेज के स्टाफ और स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाई. हमलावर वारदात को अंजाम देकर मोटरसाइकिल से भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन स्थानीय लोगों ने उसे घेरकर दबोच लिया और पुलिस के हवाले कर दिया. मुज़फ़्फ़राबाद पुलिस ने गिरफ़्तार आरोपी के पास से हत्या में इस्तेमाल किया गया पिस्तौल/हथियार और जिंदा कारतूस भी मौके पर ही बरामद कर लिए हैं.

शुरुआती कबूलनामा और विरोधाभास

शुरुआती पुलिस पूछताछ में आरोपी ने इसे एक व्यक्तिगत विवाद और पैसों के लेन-देन (गैंगवार या आपसी रंजिश) का मामला बताने की कोशिश की है. हालांकि, पुलिस और इंटेलिजेंस एजेंसियां इस थ्योरी पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर रही हैं. जांचकर्ता इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रहे हैं कि पंजाब का रहने वाला एक शूटर इतनी दूर मुज़फ़्फ़राबाद के एक कॉलेज प्रिंसिपल को निशाना बनाने क्यों आया.

एजेंसियां इसे एक पेशेवर 'कॉन्ट्रैक्ट किलिंग' या 'टारगेट किलिंग' के एंगल से देख रही हैं, जिसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क या मास्टरमाइंड हो सकता है. पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियां (CTD) फिलहाल आरोपी अब्दुल्ला कमाल को रिमांड पर लेकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उसे इस हत्या के लिए फंडिंग और हथियार किसने मुहैया कराए थे.

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