चलो दिलदार चलो, चांद को लूटने चलो! सबसे बेशकीमती जमीन को हथियाने की होड़, किस चीज के लिए बेताब US और China जैसे देश? Explainer
चांद पर बेशकीमती जमीन को हथियाने की होड़ साफ तौर पर अमेरिका और चीन जैसे देशों में देखने को मिल रही है. अब NASA का Artemis II मिशन चार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की कक्षा तक ले जाने वाला है.
US China space race ai photo
चांद पर बेशकीमती जमीन को हथियाने की होड़ साफ तौर पर अमेरिका और चीन जैसे देशों में देखने को मिल रही है. अब NASA का Artemis II मिशन चार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की कक्षा तक लेकर जा रहा है. BBC की रिपोर्ट के मुताबिक यह मिशन न केवल चंद्रमा पर मानव वापसी का मार्ग प्रशस्त करेगा, बल्कि भविष्य में वहां स्थायी बेस स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है. फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से सुबह 4:05 बजे 'स्पेस लॉन्च सिस्टम' (SLS) की लॉन्चिंग हुई.
दूसरी तरफ चीन भी आनें वाले कुछ सालों में चांद पर इंसानों की योजना बना रहा है. हालांकि, कई लोगों के मन में सवाल भी उठता है कि जब इंसान पहले ही चंद्रमा पर पहुंच चुका है, तो फिर इतनी बड़ी तैयारी और खर्च की जरूरत क्यों? आखिर अमेरिका और चीन जैसे देशों का मकसद क्या है जिसके चलते वे इतना समय, इतना ज्यादा पैसा ऐसे मिशन पर लगा रहे हैं?
अपोलो मिशन के बाद फिर क्यों चंद्रमा?
Apollo Program के तहत अमेरिका ने इतिहास रचते हुए इंसानों को चंद्रमा की सतह पर उतारा था. कुल छह सफल लैंडिंग के बाद ऐसा लगा कि यह लक्ष्य पूरी तरह हासिल कर लिया गया है लेकिन अब चंद्रमा केवल उपलब्धि नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं का केंद्र बन गया है.
चांद पर क्या छिपा?
भले ही चंद्रमा सतह से सूखा और बंजर दिखाई देता हो, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार यह बहुमूल्य संसाधनों से भरा हुआ है. प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय की ग्रह वैज्ञानिक प्रोफेसर Sara Russell कहती हैं "चंद्रमा में वही तत्व मौजूद हैं जो पृथ्वी पर हैं. इसका एक उदाहरण rare earth elements हैं, जो पृथ्वी पर बहुत कम मात्रा में पाए जाते हैं और चंद्रमा के कुछ हिस्से ऐसे हो सकते हैं जहां ये इतनी मात्रा में केंद्रित हों कि इनका खनन किया जा सके." इन संसाधनों में लोहा, टाइटेनियम और हीलियम जैसी महत्वपूर्ण सामग्री शामिल हैं, जिनका उपयोग आधुनिक तकनीक और चिकित्सा उपकरणों में किया जाता है.
क्या है सबसे कीमती खोज?
चंद्रमा पर सबसे चौंकाने वाला संसाधन पानी है. प्रोफेसर रसेल के अनुसार "इसके कुछ खनिजों में पानी फंसा हुआ है, और इसके ध्रुवों पर भी पानी की पर्याप्त मात्रा मौजूद है." उन्होंने यह भी बताया कि चंद्रमा के कुछ गड्ढे ऐसे हैं, जहां हमेशा छाया रहती है और वहां बर्फ जमा हो सकती है. यह पानी भविष्य में मानव बस्तियों के लिए जीवनरेखा साबित हो सकता है.
अमेरिकी-चीन में क्यों छिड़ी रेस?
1960-70 के दशक में United States और Soviet Union के बीच अंतरिक्ष होड़ थी, लेकिन अब यह रेस चीन के साथ है. चीन तेजी से अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है और 2030 तक इंसानों को चंद्रमा पर भेजने की योजना बना रहा है. इस बार केवल चंद्रमा पर पहुंचना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि वहां के संसाधन-जमीन पर अपना कब्जा करना बन चुका है.
क्या कोई भी देश कर सकता है चांद पर दावा?
1967 की बाह्य अंतरिक्ष संधि के अनुसार कोई भी देश चंद्रमा पर स्वामित्व का दावा नहीं कर सकता. इस पर पहली ब्रिटिश अंतरिक्ष यात्री Helen Sharman कहती हैं "हालांकि संयुक्त राष्ट्र संधि के कारण आप जमीन के एक टुकड़े के मालिक नहीं हो सकते, लेकिन आप मूल रूप से उस जमीन पर बिना किसी के हस्तक्षेप के काम कर सकते हैं. तो अभी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपनी जमीन का एक टुकड़ा हासिल करने की कोशिश करें. आप उसके मालिक नहीं हो सकते, लेकिन आप उसका उपयोग कर सकते हैं और एक बार जब आप वहां पहुंच जाते हैं, तो आप जब तक चाहें उसका उपयोग कर सकते हैं."
क्या है Artemis जैसे मिशन का सच?
अब यहां एक बड़ा सवाल ये उठता है कि Artemis जैसे मिशन सच में किसी खोज के लिए किए जा रहे हैं या फिर ऐसे मिशन के चलते अमेरिका और चीन जैसे देश rare earth elements वाली जगह को हथियाना चाहते हैं. जिसके लिए दोनों देश अरबों डॉलर भी खर्च करने से पीछे नहीं हट रहे हैं.
क्या है NASA का मंगल मिशन?
NASA की नजर अब Mars पर है, जहां वह 2030 के दशक में इंसानों को भेजना चाहता है लेकिन इससे पहले चंद्रमा को एक परीक्षण स्थल के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा. विज्ञान संग्रहालय की अंतरिक्ष प्रमुख Libby Jackson कहती हैं कि "चंद्रमा पर जाना और वहां लंबे समय तक रहना, किसी अन्य ग्रह पर रहने और काम करने के तरीके सीखने के लिए एक परीक्षण स्थल के रूप में कहीं अधिक सुरक्षित, कहीं अधिक सस्ता और कहीं अधिक आसान है."




