Iran-Israel War: ‘रमजान में कत्ल-ए-आम’ पाकिस्तान के ताबूत में आखिरी कील, खाड़ी के गद्दार देशों को ईरान निपटा कर मानेगा!
रमजान के ‘पाक’ महीने में भी अमेरिका के आगे हमेशा भीख का कटोरा लेकर नाक रगड़ते रहने वाला गैर-इस्लामिक और मौकापरस्त मक्कार पाकिस्तान, अफगानिस्तान में कहर बरपा कर निरीह लोगों का कत्ल-ए-आम करने से बाज नहीं आ रहा है.
Iran-Israel War: इन दिनों पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व में छिड़ी ईरान-इजराइल जंग के चलते दुनिया के हालात बेहद उलझन भरे हो चुके हैं. दोनो देश अब तक हवाई हमलों से जूझ रहे थे. अब इजराइल ने जब ईरान के गैस और तेल ठिकानों पर हमला बोला, तो इस हरकत से बिलबिलाए ईरान ने भी इजरायली गैस-सयंत्रों पर हमले करके तबाही मचा डाली. इस जंग का रुख किधर मुड़ेगा या आने वाले वक्त में यह जंग किस मुकाम पर जाकर और कब खत्म होगी? ऐसे सवालों का जवाब दुनिया भर के विदेश, कूटनीति, रक्षा-सैन्य और जियोपॉलिटिक्स के विशेषज्ञों के पास हाल-फिलहाल तो नहीं है.
ईरान जहां अमेरिका के गुलाम-पिट्ठू मुस्लिम देशों (खाड़ी में स्थित मुस्लिम देश यूएई, दुबई इत्यादि) के ऊपर ताबड़तोड़ हमले करके उनकी जबरदस्त पिटाई कर रहा है. वहीं दूसरी ओर रमजान के ‘पाक’ महीने में भी अमेरिका के आगे हमेशा भीख का कटोरा लेकर नाक रगड़ते रहने वाला गैर-इस्लामिक और मौकापरस्त मक्कार पाकिस्तान, अफगानिस्तान में कहर बरपा कर निरीह लोगों का कत्ल-ए-आम करने से बाज नहीं आ रहा है.
पाक के ताबूत में आखिरी कील क्या?
गद्दार खाड़ी देशों और इजराइल अमेरिका के लिए तो अकेला ईरान ही काफी है. हां, जिस तरह से खुद को इस्लामिक कंट्री बनाने जताने की धुन में चीन और अमेरिका के टुकड़ों पर पलने वाला पाकिस्तान, अफगानिस्तान में जो कुछ खून-खराबा, वह भी रमजान के पाक महीने में कर रहा है. यह पाकिस्तान के ताबूत में अब अंतिम कील साबुत होने वाली है. अगर ऐसा नहीं है तो भी अब वक्त आ गया है कि दुनिया एकजुट होकर पाकिस्तान को इस धरती से खतम कर डाले. यह इंसानी दुनिया और इंसान के लिए ज़ख्म नहीं “नासूर” है. जो जितना पुराना होगा उतना सड़कर शुद्ध वातावरण को दूषित करेगा. और इसके ज़ख्म से निकले पाप ‘मवाद’ बनकर इंसानियत के ऊपर तेजाब की मानिंद गिरेंगे.
क्यों चर्चा में साजिद रशीदी?
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन (Maulana Sajid Rashidi All India Imam Association AIIA) के अध्यक्ष और मुस्लिम धर्मगुरु साजिद रशीदी से नई दिल्ली में मौजूद स्टेट मिरर हिंदी के एडिटर इनवेस्टीगेशन ईरान, इजराइल, अमेरिका, पाकिस्तान और अफगानिस्तान पर एक्सक्लूसिव बात कर रहे थे. हाल ही में मौलाना रशीदी वाराणसी में गंगा में आयोजित इफ्तार पार्टी के मामले में दिए बवाली बयान को लेकर चर्चाओं है. तमाम हिंदू संगठन और सनातन के अनुयायियों ने मौलाना साजिद रशीदी को उनके इस बयान को नाक की लड़ाई मान लिया है.
ईरान गलत कहां है?
स्टेट मिरर हिंदी के एक सवाल के जवाब में मौलाना साजिद रशीदी ने कहा, “गलती ईरान की दुनिया में कोई नहीं बता सकता है. ऐसा इसलिए नहीं है कि मैं मुस्लिम धर्मगुरु होने के चलते बोल रहा होऊं. ईमानदारी से दुनिया में किसी भी वजनदार देश से पूछ लीजिए कि, मक्कार अमेरिका के जाल में फंसे इजराइल ने ईरान को छेड़ा है. अब ईरान अगर अमेरिका और उसके पिट्ठू इजराइल और या फिर खाड़ी के गद्दार इस्लामिक देशों को मुंहतोड़ जवाब दे रहा है. तो इसमें ईरान गलत कहां है?
अमेरिका इजराइल हलकान कैसे?
बकौल मौलाना साजिद रशीदी, “अभी देखते जाइए अभी तो अमेरिका ने गलती की है. अब इजराइल अपनी खाल बचाने के लिए ईरान के साथ दौरान-ए-जंग एक से बढ़कर एक जो भी गलतियां करेगा, ईरान जवाब में इजराइल की उसी आपदा को अवसर में बदलकर, इजराइल और अमेरिका को तबाह करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगा. अभी तो जंग अमेरिका ने इजराइल को उकसाकर छिड़वाई भर है. तभी इजराइल और अमेरिका 21-22 दिन में ही ईरान के सामने हलकान हुए पड़े हैं.
गद्दारों से कैसे निपटेगा ईरान?
अभी तो ईरान, अमेरिका के पिट्ठू कहूं या गुलाम अथवा इस्लाम के गद्दार खाड़ी के उन मतलबपरस्त मुस्लिम देशों को भी औकात में लाएगा जो महज सुबह शाम के टुकड़ों की खातिर पाकिस्तान की तरह ही अमेरिका पर निर्भर हैं. इन गद्दारों ने मुस्लिम कौम और इस्लाम के साथ जो गद्दारी की है. उसका खामियाजा तो इसी जंग में ईरान इन्हें भुगतवा कर मानेगा. इतना मुझे ईरान और उसकी ताकत पर विश्वास है.
जवाब के बजाए सवालों की बौछार क्यों?
एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान स्टेट मिरर हिंदी ने जब दौरान-ए-रमजान पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में अस्पताल के ऊपर बम बरसा कर 400 से ज्यादा निरीह-बेकसूरों की जान ले लेने से संबंधित सवाल किया, तो मौलाना साजिद रशीदी तकरीबन गुस्से से मानो बिफर ही पड़े. उन्होंने जवाब देने के बजाए ताबड़तोड़ स्टेट मिरर हिंदी पर ही सवालों की बौछार कर डाली और बोले- किस धर्म में कत्ल-ए-आम लिखा?
इस्लाम और कुरान में तो कहीं नहीं लिखा है कि बेगुनाहों को कत्ल कर डाला जाए. वह भी रमजान के पाक महीने में. आपने दुनिया के किसी भी धर्म-ग्रंथ में क्या कहीं लिखा पढ़ा है कि किसी धर्म पवित्र त्योहार में अस्पताल में जिंदगी मौत से जूझ रहे मरीजों और उनकी जिंदगियां बचाने में दिन-रात जुटे डॉक्टर-नर्सों को आसमान से बम गिराकर उनका कत्ल-ए-आम कर डाला जाए.
अफगानिस्तान में अस्पताल के ऊपर पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा बरसाए गए बम की दुस्साहिसक घटना पर भारतीय इस्लामिक स्कॉलर धर्मगुरु मौलाना साजिद रशीदी ने यहां तक कह डाला कि. पाकिस्तान इस्लामिक या मुस्लिम देश न था ना है ना कभी होगा. इस देश को अभी अच्छा मौका है कि इस इंसानी दुनिया से ही मिटा दिया जाए. अगर इस ज़ख्म को जल्दी नहीं सुखाया गया तो यह इस इंसानी दुनिया और मुस्लिम कौम के संग संग इंसानियत के लिए भी ‘नासूर’ बन जाएगा. और तब इसके नासूरी-ज़ख्म से रिसने वाला पीव (मवाद) जहां जहां जिस जगह गिरेगा वह जगह उसकी गर्मी से तबाह हो जाएगी जल जाएगी.




