क्या अब जंग रोकना चाहते हैं डोनाल्ड ट्रंप? होर्मुज को लेकर बेबस अमेरिका, चीन-जापान की आई याद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच युद्धविराम की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक युद्ध के मैदान में अमेरिका की स्थिति मजबूत बनी हुई है
donald trump
Iran Israel Conflict: दुनिया की नजर इस वक्त मिडिल ईस्ट में जारी जंग पर है. ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी जंग का कोई अंत होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है. बल्कि इस जंग के चलते दुनियाभर के देशों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं. ईरान और इजरायल एक-दूसरे की रिफाइनरियों पर अटैक कर रहे हैं, जिससे बाकी देशों की टेंशन बढ़ गई है जो यहां से तेल और गैस लेते हैं. वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच युद्धविराम की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है.
उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक युद्ध के मैदान में अमेरिका की स्थिति मजबूत बनी हुई है, तब तक सैन्य अभियान रोकने का कोई सवाल ही नहीं उठता. ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और सैन्य हलकों में नई बहस छेड़ दी है. व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक तालमेल बेहद मजबूत है और दोनों देशों के लक्ष्य लगभग एक जैसे हैं. उनके इस बयान से यह भी स्पष्ट हुआ कि वाशिंगटन फिलहाल किसी भी प्रकार के समझौते के मूड में नहीं है.
सीजफायर पर क्या बोले ट्रंप?
ट्रंप ने कहा "हम बातचीत कर सकते हैं, लेकिन मैं युद्धविराम नहीं करना चाहता. जब आप दूसरे पक्ष को पूरी तरह से नष्ट कर रहे हों, तब युद्धविराम नहीं किया जाता. हम ऐसा करने की सोच भी नहीं रहे हैं." इस बयान से यह साफ हो गया कि अमेरिका अपनी सैन्य रणनीति में आक्रामक रुख बनाए रखना चाहता है, खासकर ईरान के संदर्भ में.
इजरायल पर क्या बोले ट्रंप?
जब उनसे पूछा गया कि क्या इजरायल युद्ध समाप्त करने के लिए तैयार होगा, तो ट्रंप ने कहा "मुझे लगता है ऐसा होगा. हमारा रिश्ता बहुत अच्छा है, हम दोनों की इच्छाएं लगभग एक जैसी हैं." ट्रंप ने स्पष्ट किया, "आप जानते हैं कि हम क्या चाहते हैं? हम दोनों जीत चाहते हैं, और वही हमें मिली है." इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों देश इस संघर्ष को अपने पक्ष में मान रहे हैं.
होर्मुज को लेकर क्या बोले ट्रंप?
महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ट्रंप ने कहा कि इसकी सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है. उन्होंने कहा कि चीन और जापान जैसे देशों को इसमें भूमिका निभानी चाहिए. ट्रंप ने इस जलमार्ग को फिर से खोलने को एक साधारण सैन्य कार्रवाई बताया और कहा कि इसके लिए बड़े पैमाने पर जहाजों और सैन्य बलों की जरूरत होगी. उन्होंने नाटो पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि उसने अभी तक मदद करने का साहस नहीं दिखाया है.
क्यों जरूरी है होर्मुज का खुलना?
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है, जहां से दुनिया के लगभग 20% तेल की आवाजाही होती है. मौजूदा संघर्ष के चलते इस मार्ग से तेल प्रवाह लगभग ठप हो गया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं. अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इस स्थिति को वैश्विक तेल बाजार के इतिहास में सबसे बड़ा व्यवधान बताया है. इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ने की आशंका है.
ट्रंप के बयान से क्या मिला संकेत?
हालांकि अमेरिका ने औपचारिक रूप से पीछे हटने की घोषणा नहीं की है, लेकिन ट्रंप के बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट से संकेत मिलता है कि वाशिंगटन अपनी सैन्य भूमिका को धीरे-धीरे कम करने की योजना बना सकता है. यह रणनीति ईरान पर दबाव बनाए रखने के साथ-साथ सहयोगी देशों को समुद्री सुरक्षा में अधिक जिम्मेदारी देने की ओर इशारा करती है खासतौर पर उन देशों पर, जो इस जलमार्ग पर अधिक निर्भर हैं.




