क्या है अमेरिका का Jones Act जिसे जंग के बीच ट्रंप ने 60 दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश के भीतर तेल, गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं के परिवहन को आसान बनाने के लिए एक सदी पुराने शिपिंग कानून को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है.
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What is America Jones Act: अमेरिका में बढ़ती ईंधन कीमतों और सप्लाई संकट के बीच एक बड़ा नीतिगत फैसला सामने आया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश के भीतर तेल, गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं के परिवहन को आसान बनाने के लिए एक सदी पुराने शिपिंग कानून को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है. इस कदम का मकसद बढ़ती लागत को नियंत्रित करना और ऊर्जा आपूर्ति को सुचारु बनाए रखना है.
इस फैसले के तहत अब विदेशी झंडे वाले जहाज अगले 60 दिनों तक अमेरिकी बंदरगाहों के बीच सामान ढो सकेंगे. व्हाइट हाउस का मानना है कि इससे तेल, प्राकृतिक गैस, उर्वरक और कोयले जैसी जरूरी वस्तुओं की सप्लाई बिना रुकावट जारी रह सकेगी और बाजार में दबाव कम होगा.
क्या है जोन्स एक्ट?
Jones Act, जिसे 1920 का मर्चेंट मरीन एक्ट भी कहा जाता है, अमेरिका के समुद्री व्यापार को मजबूत करने के लिए बनाया गया था. इस कानून के तहत अमेरिका के एक बंदरगाह से दूसरे बंदरगाह तक माल ले जाने वाले जहाज का निर्माण अमेरिका में होना चाहिए, उसका स्वामित्व अमेरिकी नागरिकों के पास होना चाहिए और चालक दल भी मुख्य रूप से अमेरिकी होना चाहिए. इसका सीधा मतलब है कि विदेशी जहाजों को घरेलू समुद्री व्यापार में शामिल होने की अनुमति नहीं होती जब तक कि विशेष छूट न दी जाए.
क्यों दी गई अस्थायी छूट?
सरकार ने यह छूट राष्ट्रीय हित के तहत दी है, ताकि मौजूदा संकट के बीच सप्लाई चेन को मजबूत किया जा सके. ऊर्जा उत्पादों के साथ-साथ यह छूट उर्वरकों पर भी लागू होगी, जिनकी इस समय खेती के मौसम में भारी मांग है. Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव और Iran-Israel संघर्ष के चलते वैश्विक शिपिंग बुरी तरह प्रभावित हुआ है. तेल टैंकरों की आवाजाही में बाधा आई है, जिससे मिडिल ईस्ट से होने वाला निर्यात प्रभावित हुआ है. इसका असर केवल ईंधन तक सीमित नहीं है दवाइयों, कंप्यूटर चिप्स और अन्य जरूरी सामान की सप्लाई भी प्रभावित हुई है.
क्या इस फैसले से सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
एक्सपर्ट का मानना है कि यह फैसला लॉजिस्टिक्स को आसान बनाएगा, लेकिन कीमतों में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है. GasBuddy के विश्लेषक पैट्रिक डी हान ने कहा "यह छूट लॉजिस्टिक्स को सरल बनाएगी, जिससे उत्पादों का प्रवाह थोड़ा सस्ता और आसान हो जाएगा." हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि “फिलहाल पेट्रोल पंपों पर कीमतों में कमी लाने में इसका कोई ‘स्पष्ट’ प्रभाव नहीं दिखेगा, यह केवल खुदरा कीमतों में हो रही वृद्धि को संतुलित करेगा. मेरा अनुमान है कि इससे प्रति गैलन 3 से 10 सेंट (प्रति लीटर 0.007 डॉलर से 0.02 डॉलर) की मूल्य वृद्धि संतुलित हो सकती है.”
फैसले पर क्यों उठे सवाल?
इस निर्णय की आलोचना भी हो रही है। अमेरिकी समुद्री उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि इससे घरेलू कंपनियों और श्रमिकों को नुकसान हो सकता है. उनका यह भी मानना है कि विदेशी जहाजों को अनुमति देने से लागत में बहुत ज्यादा कमी नहीं आएगी.




