क्या अमेरिका-इजरायल रिश्तों में आई दरार? गैस फील्ड हमले पर नेतन्याहू का बड़ा खुलासा, बोले-अकेले की कार्रवाई
इजरायल और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तालमेल के बीच एक नया मोड़ सामने आया है, जब बेंजामिन नेतन्याहू ने खुलासा किया कि ईरान के साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हमला इजरायल ने अकेले किया था.
US-Israel Relations
Iran-Israel War: इजरायल और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तालमेल के बीच एक नया मोड़ सामने आया है, जब बेंजामिन नेतन्याहू ने खुलासा किया कि ईरान के साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हमला इजरायल ने अकेले किया था. यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्रीय तनाव चरम पर है और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंताएं बढ़ती जा रही हैं.
वहीं दूसरी ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले से स्पष्ट रूप से दूरी बनाते हुए कहा कि उन्होंने न केवल इस कार्रवाई का विरोध किया था, बल्कि नेतन्याहू से इसे न करने का सीधा आग्रह भी किया था. इस घटनाक्रम ने दोनों सहयोगी देशों के बीच रणनीतिक मतभेदों को उजागर कर दिया है.
क्या बोले नेतन्याहू?
नेतन्याहू ने साफ कहा कि ईरान के महत्वपूर्ण साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर इजरायल ने स्वतंत्र रूप से कार्रवाई की. हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस हमले की जानकारी अमेरिका को पहले से दी गई थी या नहीं. उनका यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि इजरायल अपने सुरक्षा हितों को लेकर स्वतंत्र निर्णय लेने से पीछे नहीं हट रहा.
हमले पर क्या बोले थे ट्रंप?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में खुलासा किया कि उन्होंने नेतन्याहू से स्पष्ट शब्दों में कहा था “ऐसा मत करो,” उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने इस हमले को न तो मंजूरी दी और न ही इसमें कोई भूमिका निभाई. ट्रंप के अनुसार, वाशिंगटन को इस ऑपरेशन की पूर्व जानकारी भी नहीं थी.
ट्रंप ने यह स्वीकार किया कि अमेरिका और इजरायल के बीच मजबूत समन्वय है, लेकिन इसकी सीमाएं भी हैं. उन्होंने कहा, “हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं, लेकिन कभी-कभी वे कुछ ऐसा कर देते हैं जो मुझे पसंद नहीं आता और तब हम उसे रोक देते हैं.
नेतन्याहू के 5 बड़े दावे
1.अकेले कार्रवाई: इजरायल ने बिना किसी सहयोग के हमला किया.
2. ट्रंप का अनुरोध: अमेरिका ने आगे ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने को कहा।
3. अमेरिका को युद्ध में नहीं घसीटा: नेतन्याहू ने कहा कि ट्रंप अपने फैसले खुद लेते हैं.
4. ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर: उन्होंने दावा किया कि ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमताएं लगभग खत्म हो चुकी हैं.
5. युद्ध जल्द खत्म होने की उम्मीद: संघर्ष अपेक्षा से जल्दी समाप्त हो सकता है.
क्या US-इजरायल की रणनीति में अंतर?
जहां अमेरिका का फोकस ईरान की मिसाइल प्रणाली, परमाणु कार्यक्रम और नौसैनिक ताकत को सीमित करने पर है, वहीं इजरायल ने अपने हमलों का दायरा बढ़ाते हुए ऊर्जा ढांचे और शीर्ष नेतृत्व को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है. यही रणनीतिक अंतर दोनों देशों के बीच तनाव का कारण बन रहा है.
हालांकि दोनों देश सार्वजनिक रूप से एकजुटता दिखा रहे हैं, लेकिन यह घटनाक्रम संकेत देता है कि पर्दे के पीछे गंभीर मतभेद मौजूद हैं. नेतन्याहू ने यह भी कहा कि ट्रंप के अनुरोध पर भविष्य में ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने पर सहमति बनी है.




