IRGC बनाम सरकार: अराघची पर भड़के पेजेशकियान और गालिबाफ, निशाने पर क्यों आए ईरान के विदेश मंत्री? Inside Story
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi पर IRGC बनाम सरकार विवाद गहराया, Masoud Pezeshkian और Mohammad Bagher Ghalibaf की नाराज़गी से सियासी संकट.
अमेरिका से बातचीत के बीच ईरान की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा विवाद उभरकर सामने आया है. अमेरिका ईरान वॉर में सबसे ज्यादा एक्टिव दिखाई दे रहे वहां के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की भूमिका पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं. ईरान इंटरनेशनल ने एक रिपोर्ट्स के आधार पर बताया है कि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालीबाफ अराघची से नाराज हैं और उन्हें पद से हटाने तक पर विचार कर रहे हैं. आरोप है कि अराघची अमेरिका के साथ बातचीत में सरकारी नेतृत्व को दरकिनार कर, आईआरजीसी के निर्देशों पर काम कर रहे हैं. इस मामले में अभी आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है.
ऐसे समय में जब तेहरान और वाशिंगटन के बीच बातचीत पहले ही मुश्किल दौर से गुजर रही है, यह अंदरूनी टकराव न केवल ईरान की विदेश नीति बल्कि उसके सत्ता संतुलन पर भी बड़े सवाल खड़े करता है.
क्या है पूरा विवाद - क्यों घिरे हैं Abbas Araghchi?
ईरान के सत्ता गलियारों में इन दिनों बड़ा सियासी और कूटनीतिक विवाद सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर आरोप है कि वे सरकार की आधिकारिक लाइन से हटकर काम कर रहे हैं. खासतौर पर अमेरिका के साथ चल रही संवेदनशील बातचीत में उनकी भूमिका को लेकर वहां के प्रेजिडेंट और संसद के स्पीकर नाराज हैं. मामला इतना बढ़ गया है कि उन्हें पद से हटाने तक की चर्चा शुरू हो गई है.
नाराजगी की असल वजह क्या?
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक मसूद पेजेशकियान गालीबाफ का मानना है कि अराघची पिछले कुछ हफ्तों से राष्ट्रपति कार्यालय को दरकिनार कर रहे हैं. वे एक कैबिनेट मंत्री की तरह सरकार के प्रति जवाबदेह रहने के बजाय, सुरक्षा प्रतिष्ठान के निर्देशों को प्राथमिकता दे रहे हैं. इससे सत्ता के भीतर भरोसे का संकट गहराता दिख रहा है.
IRGC की भूमिका क्यों बनी विवाद का केंद्र?
इस पूरे विवाद में ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प (IRGC) की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अराघची, IRGC प्रमुख के निर्देशों के अनुसार काम कर रहे हैं और उन्होंने इन फैसलों की जानकारी राष्ट्रपति को नहीं दी. यही बात पेजेशकियन की नाराजगी का बड़ा कारण बनी. कुछ सूत्रों ने तो यह भी कहा कि वे IRGC कमांडर अहमद वाहिदी के प्रभाव में ज्यादा काम कर रहे हैं.
क्या बातचीत में रुकावट से बढ़ा तनाव?
ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत में आई रुकावट ने इस विवाद को और गहरा कर दिया है. यह वार्ता युद्धविराम को स्थायी समझौते में बदलने के उद्देश्य से चल रही थी, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक बातचीत में शामिल ईरानी प्रतिनिधिमंडल को पूरी तरह अधिकार नहीं था. अमेरिकी पक्ष ने भी इस पर नाराजगी जताई. बताया गया कि IRGC से जुड़े अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को कई अहम सवालों के जवाब देने से रोक दिया, जिससे वार्ता आगे नहीं बढ़ सकी.
क्या ईरानी नेतृत्व में गहरी दरार के संकेत हैं?
दरअसल, यह घटना ईरान के अंदर पहले से मौजूद मतभेदों को उजागर करता है. इससे पहले भी रिपोर्ट्स में पेजेशकियन और सुरक्षा प्रतिष्ठान के बीच मतभेदों की बात सामने आ चुकी हैं. इन मतभेदों की जड़ युद्ध प्रबंधन, अर्थव्यवस्था और जनता पर पड़ रहे प्रभाव से जुड़ी बताई गई है. अब विदेश मंत्री को लेकर विवाद ने यह संकेत दे दिया है कि सरकार और सुरक्षा ढांचे के बीच तालमेल पूरी तरह सहज नहीं है.
सच में हटाए जाएंगे अराघची?
अभी तक ईरान की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हो पाई है, लेकिन राजनीतिक संकेत गंभीर हैं. अगर यही स्थिति बनी रहती है, तो अराघची की स्थिति कमजोर हो सकती है. साथ ही, यह संकट ईरान की विदेश नीति और अमेरिका के साथ भविष्य की बातचीत पर भी असर डाल सकता है.
चर्चा यह भी है कि यह मामला सिर्फ एक मंत्री को हटाने की चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि ईरान के सत्ता ढांचे के भीतर चल रहे शक्ति संतुलन की कहानी भी है. पेजेशकियान और मोहम्मद गालीबाफ का रुख यह दिखाता है कि कूटनीतिक फैसलों पर नियंत्रण को लेकर संघर्ष चरम पर है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है. क्या यह ईरान की विदेश नीति को को प्रभावित करेगा.




