Iran की करेंसी का ‘ऐतिहासिक पतन’! 1 डॉलर = 18 लाख रियाल, जानें भारतीय 1 रुपए की ईरान में कितनी होगी कीमत
ईरान की करेंसी रियाल 18 लाख प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है. युद्ध, अमेरिकी नाकाबंदी और बढ़ती महंगाई के बीच जानें कैसे आम लोगों और अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ रहा है.
Iran Currency Down: ईरान की नेशनल करेंसी रियाल बुधवार को रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई, जहां एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत करीब 18 लाख रियाल हो गई है. यह गिरावट ऐसे समय पर आई है, जब अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध के बाद संघर्षविराम तो लागू है, लेकिन हालात अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं हैं. अगर 18 लाख रियाल को भारतीय करेंसी में कनवर्ट करें तो केवल 135.45 रुपये बनते हैं.
युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी और शुरुआती हफ्तों में रियाल एक स्टेबल कंडीश में था, क्योंकि उस दौरान देश में व्यापार और आयात काफी कम हो गया था. हालांकि, दो दिन पहले से रियाल में गिरावट शुरू हुई और बुधवार को यह अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया.
ईरानी रियाल के गिरने से क्या होगा?
जानकारों का मानना है कि रियाल की इस गिरावट से महंगाई और बढ़ेगी, क्योंकि ईरान में कई जरूरी सामान- जैसे खाद्य पदार्थ, दवाइयां, इलेक्ट्रॉनिक्स और कच्चा माल डॉलर की कीमत से प्रभावित होते हैं. युद्ध भले ही फिलहाल रुका हुआ है, लेकिन अमेरिका की ओर से जारी नौसैनिक नाकाबंदी ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाए रखा है. इस नाकाबंदी के कारण तेल निर्यात, जो सरकार की आय और विदेशी मुद्रा का प्रमुख स्रोत है, बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
पिछले दो हफ्तों में ईरान में दूध, दही, खाने का तेल, ब्रेड, चावल, पनीर और डिटर्जेंट जैसी जरूरी चीजों के दाम बढ़े हैं. यह बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था में व्यापक महंगाई के दबाव की ओर इशारा करती है, जिसके पीछे युद्ध के बाद की अनिश्चितता, सप्लाई में बाधाएं, परिवहन और उत्पादन लागत में वृद्धि और अमेरिकी नाकाबंदी का असर शामिल है. विशेषज्ञों का कहना है कि रियाल में आई ताजा गिरावट आने वाले दिनों में खासतौर पर आयात से जुड़े सामानों, पैकेजिंग और कच्चे माल की कीमतों पर और दबाव डालेगी.
इंडियन रुपया बनाम ईरानी रियाल?
भारतीय मुद्रा के मुकाबले ईरानी रियाल की स्थिति भी काफी कमजोर है. एक भारतीय रुपया लगभग 13,807 ईरानी रियाल के बराबर है, जबकि एक अमेरिकी डॉलर की कीमत करीब 95.27 भारतीय रुपये है. मिडिल ईस्ट संकट शुरू होने के बाद भारतीय रुपये पर भी असर पड़ा है, लेकिन वह इतना ज्यादा नहीं है.
पहले कितनी थी ईरानी रियाल की कीमत?
यह ताजा गिरावट उस समय आई है, जब कुछ महीने पहले ही मुद्रा में आई कमजोरी के चलते देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे. जनवरी में रियाल की कीमत एक हफ्ते से भी कम समय में 14 लाख से गिरकर 16 लाख प्रति डॉलर हो गई थी, जिससे महंगाई बढ़ने और आर्थिक भविष्य को लेकर लोगों की चिंता और गहरा गई थी.
ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही कई दशकों से प्रतिबंधों, लगातार महंगाई और आधिकारिक तथा खुले बाजार के विनिमय दरों के बीच बढ़ते अंतर से जूझ रही है. हालिया युद्ध ने कारोबार, आम लोगों और सरकारी वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है.




