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30 दिन की डेडलाइन- डील होगी या टकराव? अमेरिका के सामने ईरान का 14 प्वाइंट्स का मास्टरप्लान, जानिए क्या हैं शर्तें

ईरान ने अमेरिका के 9 पॉइंट प्रस्ताव के जवाब में 14 सूत्रीय योजना पेश की है और 30 दिनों में समाधान की शर्त रखी है. ट्रंप ने प्रस्ताव की समीक्षा की बात कही है और सैन्य कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया है.

30 दिन की डेडलाइन- डील होगी या टकराव? अमेरिका के सामने ईरान का 14 प्वाइंट्स का मास्टरप्लान, जानिए क्या हैं शर्तें
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( Image Source:  X-@ANI )

Iran-US Tension: ईरान ने अमेरिका समर्थित 9 सूत्रीय प्रस्ताव के जवाब में अब 14 बिंदुओं वाला विस्तृत प्लान पेश किया है. तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस योजना में ईरान ने चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए अपनी शर्तें साफ तौर पर रखी हैं.

यह जवाब पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया है. इससे यह संकेत मिलता है कि तेहरान सिर्फ अस्थायी युद्धविराम नहीं बल्कि पूरे विवाद का स्थायी समाधान चाहता है. जहां अमेरिका ने दो महीने के सीजफायर का प्रस्ताव दिया था, वहीं ईरान ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि सभी मुख्य मुद्दों का समाधान 30 दिनों के भीतर होना चाहिए.

नए प्रस्ताव पर क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान के इस नए प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि अभी उन्हें सिर्फ इस डील की “कांसेप्ट” के बारे में जानकारी दी गई है और पूरा मसौदा उनके पास नहीं पहुंचा है. ट्रंप ने कहा, “मैं इसे देख रहा हूं, बाद में आपको इसके बारे में बताऊंगा.”

क्या ईरान पर होगी कार्रवाई?

जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या अमेरिका फिर से ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है, तो उन्होंने इसे पूरी तरह से खारिज नहीं किया. उन्होंने कहा कि वह इस पर सीधा जवाब नहीं दे सकते, लेकिन जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जा सकती है. ट्रंप ने कहा, “मैं किसी रिपोर्टर को यह नहीं बता सकता. अगर वे गलत व्यवहार करते हैं या कुछ बुरा करते हैं, तो कार्रवाई हो सकती है. फिलहाल हम देखेंगे, यह एक संभावना है.”

ईरान के प्रस्ताव में क्या की गई है मांग?

ईरान के प्रस्ताव में कई बड़ी मांगें शामिल हैं, जिनका मकसद क्षेत्र की सुरक्षा और आर्थिक ढांचे को बदलना है. इनमें भविष्य में किसी भी सैन्य हमले के खिलाफ गारंटी, ईरान के आसपास के इलाकों से अमेरिकी सेना की वापसी और ईरान के मुताबिक लगाए गए नौसैनिक नाकाबंदी को खत्म करना शामिल है.

इसके अलावा, ईरान ने अपने फंसे हुए वित्तीय संसाधनों को जारी करने, हर्जाना देने और आर्थिक प्रतिबंध हटाने की भी मांग की है. ये मुद्दे लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच विवाद का कारण रहे हैं.

ईरान ने अपने प्रस्ताव का दायरा सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि उसने लेबनान समेत सभी मोर्चों पर लड़ाई खत्म करने की बात कही है. साथ ही, उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षा और समुद्री आवाजाही को लेकर एक नया सिस्टम बनाने का प्रस्ताव भी दिया है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है.

प्रस्ताव कुबूल होने की कितनी संभावना?

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह ईरान के इस नए प्रस्ताव की समीक्षा करेंगे, लेकिन उन्होंने इस पर शक भी जताया. ट्रंप ने कहा कि तेहरान ने अब तक अपने पिछले कामों के लिए “काफी बड़ी कीमत नहीं चुकाई है” और इस प्रस्ताव के स्वीकार होने की संभावना कम है.

ट्रंप ने ईरान पर लगाया समुद्री डाकू होने का इल्जाम?

दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी जारी है. ईरान ने अमेरिका पर “समुद्री डकैती को कानूनी रूप देने” का आरोप लगाया है. यह आरोप उस समय लगा जब ट्रंप ने ईरान से जुड़े जहाजों के खिलाफ अमेरिकी नौसैनिक कार्रवाई की तुलना समुद्री डकैती से की.

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि ट्रंप का बयान समुद्र में गैरकानूनी गतिविधियों को स्वीकार करने जैसा है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि वे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के उल्लंघन को खारिज करें.

ट्रंप ने क्या कहा था?

ट्रंप ने शुक्रवार को कहा था कि अमेरिकी सेना ने एक जहाज और उसके सामान को जब्त किया है. उन्होंने कहा, “हम समुद्री डाकुओं जैसे हैं, लेकिन हम खेल नहीं रहे हैं.” उन्होंने इस कार्रवाई को “बहुत फायदेमंद कारोबार” भी बताया.

ईरान ने मैजेस्टिक एक्स और टिफानी नाम के दो टैंकरों को जब्त किए जाने की खबर की कड़ी निंदा की है. इन टैंकरों में ईरानी तेल बताया जा रहा है. ईरान ने इस कार्रवाई को “समुद्र में हथियारबंद लूट” करार देते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और वैश्विक समुद्री नियमों को कमजोर करता है.

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