Smart Meter पर बवाल: नोएडा में बढ़े बिजली कट, प्रीपेड सिस्टम से लोग परेशान, सरकार पर उठे सवाल
नोएडा में स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं ने बिजली कटौती, ओवर बिलिंग और प्रीपेड सिस्टम को लेकर नाराजगी जताई. लोगों का कहना है कि बिना जानकारी दिए मीटर लगाए गए और अब रोज नई समस्याएं सामने आ रही हैं.
पूरे उत्तर प्रदेश में इन दिनों स्मार्ट मीटर लगाने का काम चल रहा है, लेकिन इसके खिलाफ जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. लोग स्मार्ट मीटर से काफी परेशान दिख रहे हैं. इसी बीच स्टेट मिरर की टीम नोएडा पहुंची और आम लोगों से सीधे बात करके उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश की. बातचीत के दौरान उपभोक्ताओं ने अपनी नाराजगी खुलकर जताई. उनका कहना है कि नो पावर कट जोन कहे जाने वाले नोएडा में स्मार्ट मीटर लगने के बाद अचानक-अचानक बिजली चली जा रही है. पहले जहां बिजली कटने की शिकायत बहुत कम थी, वहीं अब रोजाना बत्ती गुल होने की समस्या बढ़ गई है.
लोगों का आरोप है कि स्मार्ट मीटर की रीडिंग सामान्य से कहीं ज्यादा आ रही है. मतलब, जितनी बिजली इस्तेमाल करते हैं, उससे ज्यादा यूनिट दिखा रहा है. साथ ही, यह प्रीपेड सिस्टम वाला मीटर है, जिससे जब बैलेंस खत्म हो जाता है तो बिजली तुरंत कट जाती है. सबसे बड़ी शिकायत यह है कि मीटर लगाते समय किसी ने उन्हें साफ-साफ नहीं बताया कि यह प्रीपेड मीटर होगा. बिना किसी जानकारी के उन्हें यह मीटर थमा दिया गया, जिसकी वजह से अब रोज नई-नई मुश्किलें खड़ी हो रही हैं. सेक्टर 105, पॉकेट A के रहने वाले लोगों ने बताया कि सबसे ज्यादा परेशानी ओवर रीडिंग (ज्यादा बिल) और अचानक बिजली चले जाने की है. उन्होंने कहा, 'मीटर लगाते समय हमें यह नहीं बताया गया कि यह प्रीपेड होगा. अब हमें बार-बार रिचार्ज कराना पड़ रहा है, जो बहुत झंझट भरा काम है.'
क्या कहना है नॉएडा निवासियों का?
स्टेट मिरर के साथ बातचीत में 105 के निवासी विरेंद्र सिंह ने कहा, 'स्मार्ट मीटर लगने के बाद सबसे बड़ी परेशानी यह है कि जब मीटर लगाने के लिए लोग आए थे, तो उन्होंने सिर्फ इतना बताया कि यह स्मार्ट मीटर है. लेकिन कहीं पर भी यह नहीं बताया गया कि यह प्रीपेड होने वाला है. एक तरह से लोगों को धोखे में रखकर यह मीटर लगाए गए हैं. सबसे बड़ी समस्या यही है. स्मार्ट मीटर लगाने से हमें कोई फायदा नहीं हो रहा है, सिर्फ परेशानी हो रही है. हमें लगातार बैलेंस चेक करना पड़ता है. अगर आप थोड़ा सा भी मिस कर गए और आपका पेमेंट समय पर नहीं हो पाया, तो आपके दो घंटे से लेकर चौबीस घंटे तक बिजली चली जाती है. कंज्यूमर को स्मार्ट मीटर से कोई फायदा नहीं है.'
बिलिंग में कितना अन्तर
दूसरी बात यह कि इसे धोखे से लगाया गया है, बिना लोगों को बताए कि यह प्रीपेड मीटर है. पहले के मुकाबले बिलिंग में भी काफी अंतर आया है. मुझे तो लगता है कि अब एक दिन में चार सौ रुपये तक का बिल आ रहा है, जबकि पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था. रीडिंग में भी अंतर दिख रहा है.' वीरेंद्र ने आगे कहा, 'अगर आपका बैलेंस नेगेटिव में आ गया तो आपकी लाइट कट जाती है. उसके बाद अगर आप रिचार्ज कर भी लेते हैं, तब भी कोई गारंटी नहीं है कि लाइट तुरंत आ जाएगी. दो घंटे से लेकर चौबीस घंटे तक लाइट नहीं आती. खबरें आती हैं कि कई लोगों की लाइट तीन-तीन दिन तक कट गई रही. कोई एक जगह नहीं है जहां पर वन-स्टॉप सॉल्यूशन हो. जो कस्टमर केयर नंबर दिए गए हैं, उन पर कोई फोन उठाता ही नहीं है.'
एडवांस जमा करने के बाद भी दिक्कतें
दूसरे निवासी किशन साहनी का कहना है, 'हमें तीन हजार-चार हजार रुपये एडवांस में जमा कराने पड़ते हैं. उसके बाद तीसरे-चौथे दिन मैसेज आ जाता है कि आपका बैलेंस खत्म होने वाला है. बैलेंस देखकर डर लगता है कि कभी भी किसी भी पल में लाइट चली जाएगी. अब गर्मी के दिन आ रहे हैं. शाम के छह बजे से ही लाइट जाना शुरू हो गया है. कब क्या होगा, इसका कुछ पता नहीं. स्मार्ट मीटर का मतलब ही बन गया है कि कब लाइट चली जाए, कब बैलेंस खत्म हो जाए. कोई सुनने वाला नहीं है। कोई कहता है कि इसके पास जाओ, कोई कहता है कि उसके पास जाओ.
बुजुर्गों को हो रही है सबसे ज्यादा समस्या
इस समस्या का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों पर पड़ रहा है. कई बुजुर्गों को मोबाइल ऐप चलाना नहीं आता और न ही वे तकनीकी समस्याओं को समझ पाते हैं. जब सर्वर डाउन हो जाता है या बैलेंस अचानक खत्म हो जाता है, तो उन्हें घंटों अंधेरे में बैठना पड़ता है. इससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बेहद प्रभावित हो रही है. लगातार आ रही शिकायतों को देखते हुए सरकार ने पूरे प्रदेश में नए स्मार्ट मीटर लगाने पर अस्थायी रोक लगा दी है. लेकिन गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में पहले ही लगभग 40 हजार स्मार्ट मीटर लग चुके हैं. इन मीटरों वाले उपभोक्ता अभी भी राहत का इंतजार कर रहे हैं. लोगों की मुख्य मांग है कि उन्हें पहले वाले पोस्टपेड मीटर का विकल्प वापस दे दिया जाए. ताकि वे बिना बार-बार रिचार्ज कराए, बिजली का आराम से इस्तेमाल कर सकें और बिल महीने के अंत में आए. कुल मिलाकर, स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं में काफी रोष है. वे चाहते हैं कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से ले और जल्द से जल्द कोई समाधान निकाले.




