कौन हैं राम जन्मभूमि ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय, जो चढ़ावा विवाद से चर्चा में आए, ड्राइवर बना करोड़पति, किसने लगाया सीधा आरोप?
राम मंदिर चढ़ावा विवाद, टिन्नू यादव की कथित संपत्ति, संतोष दुबे के शिलाचोरी आरोप और चंपत राय की भूमिका को लेकर उठे सवालों की पूरी कहानी.
अयोध्या का राम मंदिर एक बार फिर विवादों के केंद्र में है. मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं, ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों की संपत्तियों और राम मंदिर आंदोलन के दौरान जुटाई गई बहुमूल्य शिलाओं के गायब होने के आरोपों ने सियासी और धार्मिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है. योगी सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित की है. जांच अभी जारी है.
जबकि विपक्ष लगातार ट्रस्ट और सरकार से जवाब मांग रहा है. इस पूरे विवाद के केंद्र में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, उनके करीबी माने जाने वाले टिन्नू यादव और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का नाम चर्चा में है. वहीं धर्मसेना प्रमुख संतोष दुबे सहित कई लोगों ने पुराने मामलों को उठाकर विवाद को और गहरा दिया है.
क्यों चर्चा में हैं चंपत राय?
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) गठित की है. जांच की आंच अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय तक पहुंचती दिखाई दे रही है. विपक्षी दलों, कुछ संतों और ट्रस्ट से जुड़े पूर्व पदाधिकारियों ने दान, चढ़ावे और संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए हैं.
इस बीच अयोध्या में जमीन का घोटाला, सोने, चांदी की 1250 राम शिलाएं चोरी कराने का आरोप धर्म सेना के संतोष दुबे ने लगाया है. संतोष दुबे का दावा है कि सरकार चंपत राय, अनिल मिश्रा और टिन्नू यादव को पकड़ ले, सब कुछ पता चल जाएगा. फिलहाल, चंपत राय के करीबी व ड्राइवर टिन्नू यादव की संपत्ति और पुरानी राम शिलाओं के गायब होने के आरोपों ने विवाद को और बढ़ा दिया है. हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा. फिलहाल, धर्म सेना के संतोष दुबे ने गंभीर आरोप लगाते हुए चंपत राय को निशाने पर ले लिया है.
कौन हैं चंपत राय?
चंपत राय विश्व हिंदू परिषद (VHP) के वरिष्ठ नेता और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव हैं. राम मंदिर आंदोलन के दौरान वे प्रमुख रणनीतिकारों में गिने जाते रहे हैं और मंदिर निर्माण से जुड़े प्रशासनिक व वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालते हैं. अयोध्या में मंदिर निर्माण, दान संग्रह और ट्रस्ट संचालन के अधिकांश मामलों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. पिछले कुछ वर्षों में जमीन खरीद विवाद से लेकर अब चढ़ावे और दान प्रबंधन से जुड़े आरोपों तक कई मामलों में उनका नाम चर्चा में आया है. हालांकि चंपत राय लगातार आरोपों को राजनीति प्रेरित और तथ्यहीन बताते रहे हैं.
ड्राइवर टिन्नू यादव कौन?
रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव को चंपत राय का करीबी सहयोगी और ड्राइवर माना जाता है. स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, टिन्नू यादव का परिवार पहले साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से जुड़ा था और उन्होंने कभी टेम्पो तथा टैक्सी भी चलाई थी. बाद में वे राम मंदिर प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े और प्रभावशाली भूमिका में दिखाई देने लगे. आरोप लगाने वालों का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में टिन्नू यादव ने बड़ी मात्रा में संपत्ति अर्जित की है, जिसमें जमीन और अन्य निवेश शामिल हैं.
इन्हीं आरोपों के चलते उनकी संपत्ति जांच एजेंसियों और विपक्ष के निशाने पर है. हालांकि अभी तक किसी अदालत या जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं किए हैं.
अनिल मिश्रा कौन?
अनिल मिश्रा अयोध्या के वरिष्ठ शिक्षाविद, समाजसेवी और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख ट्रस्टियों में से एक हैं. वे लंबे समय से राम मंदिर आंदोलन और उससे जुड़े सामाजिक अभियानों से जुड़े रहे हैं. अयोध्या में उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और राम जन्मभूमि आंदोलन के पुराने कार्यकर्ता के रूप में भी जाना जाता है. राम मंदिर निर्माण प्रक्रिया के दौरान भूमि, स्थानीय समन्वय और ट्रस्ट के प्रशासनिक मामलों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है.
हाल ही में चढ़ावा और कथित वित्तीय अनियमितताओं के विवाद में कुछ आरोप लगाने वालों ने चंपत राय के साथ उनका भी नाम लिया है, लेकिन अब तक उनके खिलाफ कोई आरोप आधिकारिक रूप से सिद्ध नहीं हुआ है.
संतोष दुबे कौन हैं और उन्होंने क्या आरोप लगाए?
संतोष दुबे धर्मसेना के संस्थापक और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े पुराने कारसेवक रहे हैं. उनका दावा है कि 1989 में देश-विदेश से राम मंदिर आंदोलन के लिए आई सोने, चांदी, हीरे और अष्टधातु की लगभग 1250 पूजित शिलाओं का लेखा-जोखा 2002 तक उनके पास था.
उनके मुताबिक, जो मिट्टी की शिलाएं थीं, वे अब भी हैं. लेकिन धातुओं की शिलाएं गायब हैं. इन शिलाओं की देखरेख की जिम्मेदारी राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की थी. ये शिलाएं तीन ताले के भीतर रखी थीं.
श्रीराम जन्मभूमि न्यास ने पूरे देश में अभियान चलाया था, जिसमें लोगों से सवा रूपया और पूजित शिलाएं मांगी जाती थीं. लोगों ने पैसा और शिलाओं का दान किया. इनमें सोने, चांदी और हीरे की भी शिलाएं थीं.
धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे का दावा है कि इन शिलाओं के लेखा जोखा का काम मेरे स था. 2002 तक ये शिलाएं थीं, फिर गायब हो गईं.
किस वजह से हुई रामचंद्र दास की मौत?
उनका दावा है कि इसके पीछे चंपत राय की भूमिका है. श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष परमहंस रामचंद्र दास इसी सदमें में बीमार हुए और उनकी मृत्यु हो गई. रामविलास वेदांती डर की वजह से बोल नहीं पाए. उनके मुताबिक, अयोध्या में दान और चंदे की चोरी 1989 से ही चल रही है.
दुबे का आरोप है कि बाद के वर्षों में ये बहुमूल्य शिलाएं गायब हो गईं और इसकी जिम्मेदारी तत्कालीन प्रबंधन पर बनती है. उन्होंने सीधे तौर पर चंपत राय पर शिलाओं के गायब होने और दान प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं.
संतोष दुबे का यह भी दावा है कि अयोध्या में दान और चंदे से जुड़ी गड़बड़ियां नई नहीं बल्कि कई दशक पुरानी हैं. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और मामला जांच व दावों-प्रत्यारोपों के दायरे में है.
मामला अब कहां पहुंचा?
राम मंदिर के चढ़ावे और दान से जुड़े कथित घोटाले के आरोपों के बाद गठित SIT दस्तावेजों, सीसीटीवी फुटेज, बैंकिंग रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ कर रही है. पूर्व अकाउंट्स इंचार्ज महिपाल सिंह, बीजेपी के वरिष्ठ नेता विनय कटियार, धर्मसेना प्रमुख संतोष दुबे और अन्य लोगों ने अलग-अलग स्तर पर सवाल उठाए हैं. दूसरी ओर ट्रस्ट और उसके पदाधिकारी आरोपों को खारिज करते रहे हैं. ऐसे में पूरे विवाद की सच्चाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.
क्या है पूरा विवाद?
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे, दान और बहुमूल्य वस्तुओं के प्रबंधन को लेकर विवाद खड़ा हुआ है. पूर्व अकाउंट्स इंचार्ज महिपाल सिंह ने आरोप लगाया कि मंदिर में आने वाले नकद दान और सोने-चांदी के आभूषणों के हिसाब-किताब में अनियमितताएं हुईं. इसी बीच चंपत राय के करीबी सहयोगी माने जाने वाले टिन्नू यादव की कथित संपत्तियों को लेकर भी सवाल उठे.
यह विवाद तब और गहरा गया जब धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे ने दावा किया कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान आई सोने-चांदी और अन्य धातुओं की 1250 पूजित शिलाएं गायब हो गईं. आरोपों के केंद्र में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम भी आया. बढ़ते विवाद और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित कर दी है.
चढ़ावा और धातु शिलाचोरी विवाद में अपडेट क्या?
फिलहाल, इस मामले में यूपी सरकार ने 3 सदस्यीय SIT गठित कर दी है, जिसने अयोध्या पहुंचकर जांच शुरू कर दी है. SIT दानपात्रों की निगरानी व्यवस्था, नकदी गिनती की प्रक्रिया, बैंक रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और कथित मनी ट्रेल की जांच कर रही है. मंदिर परिसर में कई घंटों तक पूछताछ और दस्तावेजों की जांच की गई है.
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय (Champat राइ) ने कहा है कि आंतरिक ऑडिट चल रहा है और अब तक आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई तथ्य सामने नहीं आया है. राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नुपेंद्र मिश्रा ने कहा है कि जांच में कोई ढिलाई नहीं होगी और भक्तों का भरोसा बनाए रखना प्राथमिकता है.
सनातन विरोधियों की हो पड़ताल - अखिलेश यादव
Akhilesh Yadav ने दान में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए और बाद में SIT जांच को लेकर भी टिप्पणी की. दूसरी ओर ट्रस्ट का कहना है कि उसने स्वयं निष्पक्ष जांच की मांग की ताकि तथ्यों का पता चल सके और अफवाहों का जवाब दिया जा सके.
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मामले में कहा है कि आगे-आगे देखिए होता है क्या… चढ़ावे से बात चंदे तक पहुंची और चंदे से जमीन तक और जमीन से अति बहुमूल्य अरबों रूपयों की श्रीराम शिलाओं के गायब होने तक. भाजपाइयों के अनरजिस्टर्ड-अंडरग्राउंड संगी-साथियों की केवाईसी करवाई जाए. अयोध्या के इस ‘महापाप-महाघोटाले’ के पीछे कौन-सा सनातन विरोधी गिरोह काम कर रहा है, इसकी गहरी पड़ताल हो.
अभी स्थिति क्या?
चढ़ावा विवाद और शिलाचोरी विवाद दोनों ही आरोपों और जांच के चरण में हैं. SIT की जांच जारी है, लेकिन अभी तक किसी व्यक्ति, ट्रस्टी या पदाधिकारी के खिलाफ कोई आधिकारिक दोष सिद्ध नहीं हुआ है. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितना दम है और क्या किसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
कांग्रेस ने की निष्पक्ष जांच की मांग
16 जून को दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने राम मंदिर चढ़ावा विवाद और कथित शिलाचोरी मामले को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जब भक्तों के चढ़ावे और राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी पूजित शिलाओं के गायब होने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं, तो निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए.
अजय राय ने आरोप लगाया कि सरकार और ट्रस्ट प्रबंधन जवाबदेही से बच रहे हैं तथा पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए. कांग्रेस ने मांग की कि SIT जांच की निगरानी पारदर्शी तरीके से हो और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण न मिले.




