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Kanpur Lamborghini Accident: गिरफ्तारी के कुछ घंटे बाद शिवम मिश्रा को कोर्ट से राहत, पुलिस की अपील खारिज, उठे सवाल

कानपुर लैंबोर्गिनी हादसे में गुरुवार को पुलिस ने आरोपी शिवम मिश्रा को अदालत में पेश किया. फिलहाल, कोर्ट से आरोपी को जमानत मिल गई है. कोर्ट ने पुलिस की 14 दिन की न्यायिक हिरासत में लेने की मांग वाली अर्जी खारिज की.

Kanpur Lamborghini Accident: गिरफ्तारी के कुछ घंटे बाद शिवम मिश्रा को कोर्ट से राहत, पुलिस की अपील खारिज, उठे सवाल
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( Image Source:  X/@ANI )

कानपुर का चर्चित लैंबोर्गिनी एक्सीडेंट केस (Kanpur Lamborghini Accident) एक बार फिर सुर्खियों में है. गिरफ्तारी के बाद आरोपी शिवम मिश्रा को अदालत से राहत मिल गई है. पुलिस की ओर से दायर न्यायिक हिरासत की अपील को कोर्ट ने खारिज कर दिया. इस फैसले ने न सिर्फ जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पूरे मामले को नया मोड़ भी दे दिया है. लग्जरी कार, कारोबारी परिवार और कोर्टरूम ड्रामा - इस केस ने शहर की चर्चा को गर्म कर रखा है.

अदालत ने पुलिस द्वारा मांगी गई 14 दिन की न्यायिक हिरासत (Judicial Remand) की अर्जी खारिज कर दी और आरोपी को 20,000 रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी.

कोर्ट ने क्यों उठाए सवाल?

सुनवाई के दौरान एसीएमएम कोर्ट ने पुलिस की नोटिस प्रक्रिया पर सख्त रुख अपनाया. अभियोजक यह साबित नहीं कर पाए कि आरोपी को दो बार विधिवत नोटिस दिया गया था. न्यायिक हिरासत की 14 दिन की मांग को अदालत ने आधारहीन माना. कोर्ट ने कहा कि प्रक्रिया में स्पष्टता जरूरी है. इसके बाद अदालत ने 20,000 रुपये के मुचलके पर शिवम मिश्रा को रिहा करने का आदेश दिया और जांच में सहयोग करने की शर्त रखी.

गिरफ्तारी के बाद क्या हुआ?

कानपुर पुलिस जांच में यह सामने आया था कि हादसे के समय शिवम मिश्रा ही ड्राइविंग सीट पर था. इसी आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था. हालांकि, गिरफ्तारी के बाद मामला अदालत पहुंचा और पुलिस की न्यायिक हिरासत की अपील खारिज हो गई.

आरोपी के पिता ने क्या दावा किया था?

इस मामले की शुरुआत में आरोपी के पिता जो शहर के एक तंबाकू व्यवसायी बताए जाते हैं, ने दावा किया था कि हादसे के वक्त उनका बेटा गाड़ी नहीं चला रहा था. परिवार की ओर से यह भी कहा गया था कि मीडिया में एकतरफा तरीके से पेश किया जा रहा है. जबकि जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है. हालांकि, पुलिस जांच में ड्राइविंग सीट पर शिवम की मौजूदगी की पुष्टि होने का दावा किया गया था.

क्यों खारिज की पुलिस की अर्जी?

सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की नोटिस प्रक्रिया पर सवाल उठाए. अभियोजन पक्ष यह प्रमाणित नहीं कर सके कि आरोपी को दो बार नोटिस दिए गए थे. कोर्ट ने माना कि प्रक्रिया में स्पष्टता नहीं है, जिसके आधार पर न्यायिक हिरासत की मांग को उचित नहीं ठहराया जा सकता.

हादसे के वक्त ड्राइविंग सीट पर कौन?

कानपुर पुलिस जांच में पुष्टि हुई थी कि हादसे के समय शिवम मिश्रा ही कार चला रहे थे. हालांकि, अदालत ने इस तथ्य के बावजूद तत्काल न्यायिक हिरासत की मांग को स्वीकार नहीं किया. कोर्ट ने आरोपी को पुलिस जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है.

शिवम मिश्रा ने खुद की पैरवी की

सुनवाई के दौरान शिवम मिश्रा ने स्वयं अपनी पैरवी की. अदालत में उनके द्वारा रखे गए तर्कों के बाद पुलिस की दलीलों की कानूनी प्रक्रिया पर सवाल भी उठे. इसके बाद कोर्ट ने 20 हजार रुपये के मुचलके पर उन्हें रिहा करने का आदेश दिया.

कब हुआ था कानपुर लैंबोर्गिनी हादसा?

कानपुर में हाल ही में हुई हाई-एंड स्पोर्ट्स कार से जुड़े इस मामले ने सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर भी सुर्खियां बटोरी थीं. हादसे के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी और ड्राइविंग सीट पर बैठे व्यक्ति की पहचान की पुष्टि की थी.

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