आस्था या राजनीति! डेरा सचखंड में PM मोदी के दौरे के क्या हैं सियासी मायने?
PM मोदी का डेरा सचखंड दौरा आस्था, सामाजिक संदेश और राजनीति का मिश्रण माना जा रहा है. यह चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत है या सिर्फ एक सामाजिक संवाद, इसका जवाब आने वाले चुनावी नतीजे ही देंगे.
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म श्री पुरस्कार और अब 1 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जालंधर के बल्लन में डेरा सचखंड का दौरा करेंगे. उनका ये दौरा पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अहम माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि पीएम मोदी रविदास समुदाय यानी दलितों मतदाताओं के बीच बीजेपी की पहुंच बढ़ाने के मकसद से यह दौरा करेंगे. बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डेरा सचखंड बल्लन के प्रमुख संत निरंजन दास ने वहां का दौरा करने के लिए 5 दिसंबर को आमंत्रित किया था.
पीएम मोदी के जालंधर दौरे से ठीक एक दिन पहले, जालंधर के स्कूलों को धमकी भरे ईमेल मिले मिले हैं. जांच में ईमेल फर्जी निकले हैं. इस बात को ध्यान में रखते हुए PM के दौरे के लिए सुरक्षा बढ़ा दी गई है.
रविदासिया समुदाय और पंजाब चुनाव
- पंजाब के दोआबा क्षेत्र, जिसका केंद्र जालंधर है, में लगभग 45% दलित आबादी है. पंजाब की कुल 32% आबादी से इसी समुदाय के हैं.
- जालंधर एयरपोर्ट का नाम गुरु रविदास के नाम पर रखा जाएगा. रविवार को PM का कार्यक्रम व्यस्त है, क्योंकि वह नई दिल्ली में केंद्रीय बजट पेश करने के बाद जालंधर पहुंचेंगे.
- एक फरवरी को दोपहर 3:45 बजे आदमपुर हवाई अड्डे पर उतरेंगे और औपचारिक रूप से इसके नए नाम श्री गुरु रविदास जी हवाई अड्डा, आदमपुर का अनावरण करेंगे. ऐसा करने के बाद वहां के लोगों की एक पुरानी मांग पूरी हो जाएगी. रविदास को समाज सुधारक माना जाता है. वह दलित परिवार से निकलकर समानता और मानवीय गरिमा का प्रतीक बने.
- पीएम के जालंधर दौरे की मुख्य बात बल्लन में डेरा सचखंड जाना है. सचखंड के प्रमुख संत निरंजन दास को पद्म श्री दिए जाने के कुछ ही दिनों बाद हुआ.
BJP की रणनीति के लिए मतलब क्या?
बीजेपी का मकसद पंजाब में दलित आबादी को पार्टी से जोड़ना है. बीजेपी ऐसा कर अगले साल प्रस्तावित विधानसभा चुनाव में इसका लाभ उठाना चाहती है. BJP का फोकस रणनीतिक है, लेकिन यह अपने दम पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कुंजी भी है.
2020 में बाद में रद्द किए गए कृषि कानूनों को लेकर शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ गठबंधन खत्म होने के बाद से, पार्टी ने एक स्वतंत्र चुनावी पहचान बनाने के लिए काम किया है.
BJP ने 2022 के विधानसभा चुनावों में अपने वोट शेयर को 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 2024 के संसदीय चुनावों में 18.56 प्रतिशत कर लिया है. रविदासियों को लुभाकर, BJP का लक्ष्य कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) के पारंपरिक गढ़ों में और सेंध लगाना है.
सियासी जानकारों का कहना है कि पंजाब में दलित वोटर शायद ही कभी एक साथ वोट करते हैं. ये स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों और गठबंधनों के आधार पर बदलते रहते हैं. यह समुदाय लंबे समय से एक स्वतंत्र समूह के रूप में पहचाना जाता है. BJP का इरादा "पहचान की मान्यता का फायदा उठाना है, जो समुदाय की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और उसके आध्यात्मिक नेतृत्व के प्रति सम्मान की मांगों के अनुरूप है.
दलित मुद्दों के विशेषज्ञ प्रोफेसर परमजीत सिंह जज ने HT को बताया था कि बल्लन डेरा सूक्ष्म स्तर पर वोटिंग ट्रेंड को प्रभावित कर सकता है. अक्सर यह "भ्रम होता है कि यह बड़े पैमाने पर दोआबा क्षेत्र की राजनीति को प्रभावित करता है."
केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के मुताबिक, “यह पंजाब के लिए गर्व का क्षण है. PM ने रविदास जयंती समारोह में शामिल होने का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है, जिसका उद्देश्य सभी समुदायों में एकता फैलाना है.”
पीएम मोदी का दौरा रविदासिया समुदाय के लिए यह दौरा एक तरह से उनकी अलग धार्मिक पहचान की पुष्टि है, जिसका दावा वे 2009 में वियना में उप नेता संत रामानंद की हत्या के बाद से कर रहे हैं, जिसके कारण कट्टरपंथी सिख समूहों और समुदाय के दलितों के बीच झड़पें हुई थीं.
इस हत्या के बाद रविदासिया समुदाय ने 2010 में एक अलग धर्म घोषित कर दिया और गुरु ग्रंथ साहिब की जगह, जिसमें गुरु रविदास की कुछ आयतें भी हैं, अपनी पवित्र किताब 'अमृत बानी: सतगुरु रविदास ग्रंथ' को अपनाया, जो रविदास की प्रगतिशील कविता पर आधारित है.
जनगणना में आदि-धर्मी या रामदासिया/चमार के रूप में पहचाना जाने वाला रविदासिया समुदाय पंजाब की कुल आबादी का 10-12% है, जिसका मतलब हो सकता है कि यह दलित आबादी का एक तिहाई है.
अमित शाह भी करेंगे दौरा
पीएम की एक फरवरी को जालंधर यात्रा के ठीक तीन हफ्ते बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी पंजाब आने वाले हैं. वह 22 फरवरी को मोगा में किसानों की रैली को संबोधित करेंगे. बीजेपी के इस कदम को पंजाब के मालवा क्षेत्र की पार्टी की घुसपैठ की कोशिश माना जा रहा है.
दूसरी तरफ बीजेपी और सुखबीर सिंह बादल की SAD के बीच संभावित गठबंधन को लेकर अटकलें तेज हैं, लेकिन बीजेपी अपनी मौजूदगी साबित करने के लिए पूरी कोशिश कर रही है.





