Begin typing your search...

क्या बच सकती थी बिरजू की जान? चश्मदीद ने खोल दी प्रशासन की पोल, सवालों के घेरे में दिल्ली सरकार

दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-32 में DDA की खाली जमीन पर खुले पड़े गहरे मैनहोल ने बिरजू कुमार राय की जिंदगी छीन ली. अब चश्मदीद ने प्रशासन की लापरवाही की पोल खोलकर रख दी है.

Rohini Open manhole Birju Kumar Rai death
X

Rohini Open manhole

( Image Source:  X/ @ANI )
विशाल पुंडीर
Edited By: विशाल पुंडीर

Updated on: 11 Feb 2026 7:26 AM IST

देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही ने एक गरीब मजदूर की जान ले ली. रोहिणी सेक्टर-32 में महाशक्ति काली मंदिर के पास डीडीए (DDA) की खाली जमीन पर खुले पड़े गहरे मैनहोल ने 32 वर्षीय बिरजू कुमार राय की जिंदगी छीन ली. यह हादसा न सिर्फ सिस्टम की खामियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे छोटी-सी अनदेखी किसी परिवार को जीवन भर का दर्द दे सकती है.

सोमवार रात करीब 7:30 बजे बिहार के समस्तीपुर निवासी बिरजू कुमार अपने एक दोस्त के साथ झुग्गी की ओर लौट रहा था. अंधेरा और खुले मैनहोल की वजह से उसका संतुलन बिगड़ा और वह सीधे मैनहोल में गिर गया। दुर्भाग्य से उसके साथ मौजूद दोस्त नशे में था, जिसने पूरी रात इस घटना की जानकारी किसी को नहीं दी. अगले दिन दोपहर में होश आने के बाद पुलिस को सूचना दी गई, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी देरी हुई और बिरजू की जान नहीं बचाई जा सकी.

क्या खुले मैनहोल के पास बैरिकेडिंग थी?

स्थानीय लोगों के अनुसार जिस मैनहोल में बिरजू गिरा, वह लंबे समय से बिना ढक्कन के खुला पड़ा था. अंधेरे में वहां किसी भी चेतावनी संकेत या बैरिकेडिंग की व्यवस्था नहीं थी. यह जगह डीडीए की खाली जमीन पर स्थित है, लेकिन रखरखाव को लेकर संबंधित विभागों ने आंखें मूंद रखी थीं.

क्या प्रशासन की लापरवाही से गई जान?

हादसे के बाद भी प्रशासन की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है. रिपोर्ट के मुताबिक आरोप है कि शुरुआती सूचना मिलने के बावजूद पुलिस और अन्य विभागों ने समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया. स्थानीय लोगों का कहना है कि जब 112 नंबर पर दोबारा कॉल की गई, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ.

चश्मदीद ने क्या बताया?

चश्मदीद ने बताया कि ‘मैंने कॉल की थी, मुझे पता चला यहां कोई गिर गया है, पुलिस ने किसी डिपार्टमेंट को इंटीमेशन नहीं दिया था, ना फायर को किया था, मैने आकर 112 पर काल करी, मैने यहां जो अधिकारी थे उनके वीडियो बना रखी है, जो यहां पर चल रहा था, ये आदमी कल से इस गडडे मे गिरा हुआ था, 4 बजे इसके साथियो ने बताया पुलिस को, 4 बजे से 7 बजे तक कुछ नही हुआ, मेरे काल के बाद सारा प्रशासन यहां आता है और कार्रवाई होती है, वो 30-32 साल का है, बाडी रिकवर हुई है. उसका नाम है ब्रिजु कुमार है, उम्र 32 साल है, बिहार समस्तीपुर के है. लंच के समय में मुझे पता चला, प्रशासन को इंफोर्म किया, परिवार मे उसकी मां है, तीन बच्चे है.’

क्या बच सकता था बिरजू?

मृतक बिरजू कुमार अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था. उसके पीछे बूढ़ी मां और तीन छोटे बच्चे हैं, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है. परिवार वालों का कहना है कि अगर समय रहते रेस्क्यू किया जाता तो शायद बिरजू की जान बच सकती थी.

DELHI NEWS
अगला लेख