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अगर दिन में 2-3 बार पीतें है ये चीज तो कम हो सकता है Dementia का खतरा, नई रिसर्च में हुआ खुलासा

कॉफी को लेकर अक्सर चेतावनी दी जाती है कि ज्यादा पीना सेहत के लिए अच्छा नहीं. लेकिन हाल की रिसर्च एक दिलचस्प तस्वीर दिखाती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि सीमित मात्रा में कैफीन लेना दिमाग के लिए फायदेमंद हो सकता है.

अगर दिन में 2-3 बार पीतें है ये चीज तो कम हो सकता है Dementia का खतरा, नई रिसर्च में हुआ खुलासा
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( Image Source:  AI SORA )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत

Updated on: 11 Feb 2026 2:56 PM IST

क्या आपकी दिन की शुरुआत कॉफी से होती है? तो आपके लिए अच्छी खबर हो सकती है. एक नई रिसर्च में सामने आया है कि रोजाना कॉफी पीने से डिमेंशिया का खतरा कम हो सकता है. यह दावा लंबे समय तक बड़ी आबादी पर किए गए स्टडी के आधार पर किया गया है, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि सीमित मात्रा में कैफीन दिमागी कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है. हालांकि, एक्सपर्ट यह भी साफ करते हैं कि ज्यादा पीना मतलब फायदा नहीं होता है. ऐसे में सबसे पहले जानते हैं क्या है डिमेंशिया और इसे कम करने के लिए कितनी बार कॉफी पीना सही?

क्या है डिमेंशिया?

डिमेंशिया कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि लक्षणों का ग्रुप है. इसमें याददाश्त कमजोर पड़ने लगती है, सोचने-समझने की क्षमता घटती है, फैसले लेने में दिक्कत होती है और रोजमर्रा के काम भी मुश्किल हो सकते हैं. अल्जाइमर इसका सबसे आम रूप माना जाता है. उम्र बढ़ने के साथ इसका जोखिम बढ़ता है, इसलिए लोग ऐसे तरीकों की तलाश में रहते हैं जिनसे दिमाग को लंबे समय तक हेल्दी रखा जा सके.

कॉफी से क्या है कनेक्शन

साइंटिस्ट्स ने 43 सालों में 131,821 लोगों पर स्टडी की. शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग रोजाना सीमित मात्रा में कैफीन वाली कॉफी पीते थे, उनमें डिमेंशिया का खतरा कम देखा गया. मध्यम मात्रा का मतलब लगभग 2 से 3 कप कॉफी (या 1 से 2 कप चाय) माना गया. खास बात यह रही कि यह फायदा डिकैफ कॉफी में नहीं दिखा. यानी भूमिका कैफीन की मानी जा रही है.

कितना पीना फायदेमंद?

रिसर्च के मुताबिक, रोज कम से कम एक कप कैफीन वाली कॉफी लेने वालों में जोखिम कुछ हद तक कम पाया गया. 1 से 5 कप के बीच पीने वालों में लगभग 15–20% तक कम खतरा दर्ज किया गया. लेकिन ज्यादा पीने से फायदा दोगुना नहीं हो जाता. एक सीमा के बाद अतिरिक्त लाभ रुक जाते हैं. यानी संतुलन जरूरी है.

ऐसा क्यों हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि कॉफी में मौजूद बायोएक्टिव तत्व दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद कर सकते हैं. वे सूजन कम करने, ब्लड फ्लो बेहतर करने और न्यूरॉन्स को सक्रिय रखने में भूमिका निभा सकते हैं. हालांकि, यह अभी भी अध्ययन का विषय है और इसे पक्का इलाज नहीं माना जा सकता.

इस बात का रखें ध्यान

कॉफी पीना डिमेंशिया से पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं है. लेकिन संतुलित जीवनशैली जैसे अच्छा खाना, नियमित व्यायाम, नींद और मानसिक सक्रियता के साथ यह एक सहायक आदत बन सकती है.

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