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दिल्ली के विकास के दलदल ने कमल के बाद बिरजू को मार डाला! 2 घंटे बाद मिला शव- देखिए दर्दनाक Video

दिल्ली के विकास के अधूरे काम और लापरवाह सिस्टम की वजह से सिर्फ पांच दिनों में दो जानें जा चुकी हैं. पहले जनकपुरी में 25 वर्षीय कमल ध्यानी की मौत हुई, और अब रोहिणी सेक्टर 32 में खुली नाली में गिरकर मजदूर बिर्जू कुमार की जान चली गई. प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ाने के कदम उठाए हैं, लेकिन शहर में खुले गड्ढों की समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है.

दिल्ली के विकास के दलदल ने कमल के बाद बिरजू को मार डाला! 2 घंटे बाद मिला शव- देखिए दर्दनाक Video
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( Image Source:  ANI )
सागर द्विवेदी
Edited By: सागर द्विवेदी

Published on: 11 Feb 2026 12:54 AM

दिल्ली में खुली नालियों और असुरक्षित गड्ढों ने एक बार फिर जान ले ली. रोहिणी सेक्टर 32 के महाशक्ति काली मंदिर के पास एक 32 वर्षीय मजदूर, बिरजू कुमार, नाले में गिरकर घायल हो गए और बाद में उनकी मौत हो गई. घटना मंगलवार शाम को घटी, जब स्थानीय लोग आपातकालीन सेवाओं को सूचित करने के बाद घटनास्थल पर पहुंचे.

यह हादसा ऐसे समय में सामने आया है, जब शहर में खुले गड्ढों और असुरक्षित निर्माण कार्यों के कारण पिछले कुछ दिनों में दो और मौतें हो चुकी हैं. 25 वर्षीय कमल ध्यानी की 6 फरवरी को जनकपुरी में एक 15 फीट गहरे गड्ढे में गिरकर मौत हो गई थी.

यह हादसा कैसे हुआ?

क्यों बिर्जू कुमार नाले में गिर गए? बिर्जू कुमार और उनका मित्र उस रात घर लौट रहे थे, जब वे नशे में थे. डी डी ए की जमीन पर स्थित खुले मैनहोल में कुमार गिर गए. उनके मित्र ने कहा, “मैं दौड़ते हुए आया और उन्हें बुलाया, लेकिन वह पानी में सुन नहीं पाए. मैं भी बहुत नशे में था और समझ ही नहीं पाया कि क्या हो रहा है.” अगले दिन कुमार की खोजबीन शुरू की गई और उनके चप्पल मैनहोल के पास मिली. मंगलवार को उनका शव निकाल लिया गया. कुमार मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले थे.

दिल्ली में खुले गड्ढों की बढ़ती समस्या

क्या दिल्ली में खुले गड्ढे खतरनाक साबित हो रहे हैं? कुमार की मौत 25 वर्षीय कमल ध्यानी की मौत के पांच दिन बाद हुई. ध्यानी जनकपुरी में डीजेबी द्वारा खोदे गए 15 फीट गहरे गड्ढे में मोटरसाइकिल सहित गिर गए थे. उनके परिवार ने कई थानों में मदद के लिए दौड़ लगाई, लेकिन कोई तत्काल सहायता नहीं मिली. दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारी इस मामले में निलंबित किए गए थे. ऐसे हादसे शहर में लगातार चेतावनी देते हैं कि खुले गड्ढे और असुरक्षित नालियां लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं.

क्या प्रशासन ने सुरक्षा के उपाय किए?

क्या इलाके में सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं? स्थानीय अधिकारियों ने घटना के बाद मैनहोल को ढक दिया और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही. पिछले महीने नोएडा में भी 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की गाड़ी खुले नाले में गिरने से मौत हो गई थी. इस तरह की घटनाएं सुरक्षा में कमियों को उजागर करती हैं.

दिल्लीवासियों के लिए चेतावनी

क्या यह हादसा टाला जा सकता था? विशेषज्ञों का कहना है कि खुले गड्ढे और नालियों के चारों ओर चेतावनी बोर्ड, प्रतिबंध और रिफ्लेक्टर लगाना अनिवार्य है. इसके अलावा, स्थानीय प्रशासन और नागरिकों को सतर्क रहना चाहिए ताकि ऐसे हादसे दोहराए न जाएं.

बिरजू कुमार कौन थे और कैसे हुई मौत?

बिरजू कुमार बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले थे. रोज़ी-रोटी कमाने के लिए वह दिल्ली आए थे और दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे. परिवार के लिए वह इकलौता कमाने वाला बताया गया है. अचानक हुई इस घटना ने उनके गांव और परिवार में गहरा मातम फैला दिया है. प्रारंभिक जांच में पता चला है कि जिस नाले में बिरजू गिरा, वह दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की जमीन पर स्थित था. पुलिस यह जांच कर रही है कि नाले को खुले छोड़ने की जिम्मेदारी किस विभाग की थी और क्या इसमें लापरवाही बरती गई.

राजनीति और आरोप

इस घटना ने राजनीतिक तापमान भी बढ़ा दिया. आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने 'एक्स' पर दिल्ली की बीजेपी सरकार पर हमला करते हुए लिखा, "रोहिणी सेक्टर 32 में सड़क पर चलते हुए एक आदमी गहरे नाले में गिर गया. लाश तक नहीं मिली. रेखा गुप्ता की सरकार सिर्फ फोटोबाज़ी और भाषणबाज़ी में लगी है. इन्हें सरकार नहीं, सर्कस चलाना है." यह पहला मामला नहीं है. 6 फरवरी को जनकपुरी में 25 वर्षीय कमल ध्यानी 15 फीट गहरे गड्ढे में गिरकर मौत का शिकार हो गए थे. स्थानीय लोग लगातार प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि शहर के सभी खुले नाले और बिना ढके मेनहोल को तुरंत ढका जाए और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.

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