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मोकामा में अनंत सिंह की कमी नहीं खलने देंगी पत्नी नीलम देवी, ललन सिंह की एंट्री से क्या बदल जाएगा खेल?

मोकामा उपचुनाव अब राजनीतिक टकराव का केंद्र बन चुका है. अनंत सिंह की गिरफ्तारी के बाद जेडीयू ने मोर्चा संभालने के लिए केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को उतारा है, जबकि पत्नी नीलम देवी सहानुभूति वोट जुटा रही हैं. RJD की ओर से वीणा देवी मैदान में हैं और जातीय समीकरण सीट को और पेचीदा बना रहे हैं. वहीं जनसुराज प्रत्याशी पर भी FIR दर्ज होने से चुनाव और गरमाया है. यह मुकाबला सिर्फ सीट नहीं, बिहार की सियासत का अगला संकेत बन रहा है.

मोकामा में अनंत सिंह की कमी नहीं खलने देंगी पत्नी नीलम देवी, ललन सिंह की एंट्री से क्या बदल जाएगा खेल?
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नवनीत कुमार
Edited By: नवनीत कुमार4 Mins Read

Updated on: 3 Nov 2025 12:55 PM IST

मोकामा विधानसभा चुनाव सामान्य चुनाव नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा की जंग बन चुका है. बाहुबली छवि वाले पूर्व विधायक अनंत सिंह की गिरफ्तारी ने सियासी समीकरण उलट-पुलट कर दिया है. शनिवार की देर रात गिरफ्तारी और रविवार को बेउर जेल भेजे जाने के बाद, जेडीयू के लिए यह सीट सिर्फ जीत का सवाल नहीं, बल्कि साख बचाने की लड़ाई बन चुकी है. ऐसे में अब मैदान में उतरने जा रहे हैं केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह, जो 3 नवंबर को पूरे क्षेत्र में ताबड़तोड़ दौरे करेंगे.

लोकसभा चुनाव के दौरान अनंत सिंह ने जेडीयू के ललन सिंह के लिए बड़ी भूमिका निभाई थी और अब पलटकर वही समर्थन उनके परिवार को मिलते दिख रहा है. अनंत के जेल जाते ही चुनावी मोर्चा पत्नी नीलम देवी ने संभाल लिया है, लेकिन चुनाव अब केवल प्रचार का नहीं, बल्कि जातीय और राजनीतिक समीकरणों की भी परीक्षा बन चुका है और इसमें ललन सिंह की एंट्री कहानी को नया मोड़ देने जा रही है.

ललन सिंह ने संभाली कमान

अनंत सिंह की गिरफ्तारी के बाद जेडीयू ने एक दिन भी इंतज़ार नहीं किया. रविवार को कार्यकर्ता सक्रिय रहे, लेकिन सोमवार से पूरा चुनावी प्रबंधन ललन सिंह के हाथ में जाने वाला है. वह एक दिन में रैली, जनसंपर्क और ग्रामीण सभाओं के ज़रिए दर्जनों इलाकों में वोट मांगेंगे. पार्टी इसे "मोकामा रिकवरी मिशन" बता रही है.

नीलम देवी ने की भावनात्मक अपील

गिरफ्तारी के तुरंत बाद अनंत की पत्नी नीलम देवी ने चुनाव प्रचार खुद संभाल लिया. उन्होंने घर-घर जाकर वोट मांगना शुरू किया और समर्थकों से कहा, “अनंत को सजा नहीं, साजिश मिली है.” नीलम सीधे तौर पर सहानुभूति वोट जुटाने की कोशिश में हैं, जबकि विपक्ष इसे कानून की कार्रवाई बता रहा है.

मोकामा का जातीय गणित- भूमिहार vs यादव बैलेंस

मोकामा में भूमिहार और यादव वोट निर्णायक माने जाते हैं. अनंत सिंह भूमिहारों के सबसे प्रभावशाली चेहरे माने जाते रहे हैं. लेकिन इस बार RJD ने भी भूमिहार समाज से वीणा देवी को उतारा है, जो सूरजभान सिंह की पत्नी हैं. अगर भूमिहार वोट बंटा, तो समीकरण पूरी तरह बदल सकता है. इसलिए जेडीयू ने ललन सिंह को 'भूमिहार कंसॉलिडेशन' का जिम्मा दिया है.

2024 के बाद फिर साथ आए दोनों

ललन और अनंत के रिश्ते पहले टकराव, फिर सहयोग के रहे हैं. 2019 में नीलम देवी ने कांग्रेस टिकट पर ललन के खिलाफ चुनाव लड़ा था. लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में अनंत सिंह ने खुलकर ललन को सपोर्ट किया और तभी से दोनों का गठजोड़ मज़बूत हुआ. वही साझेदारी अब विधानसभा तक खिंची दिखाई दे रही है.

यादव वोट लॉक, अब भूमिहार टारगेट

दुलारचंद यादव हत्याकांड और अनंत सिंह की गिरफ्तारी ने यादव वोटों को पूरी तरह RJD की ओर झुका दिया है. ऐसे में जेडीयू का पूरा दांव भूमिहार + अति पिछड़ा वोट को एकजुट रखने पर है. पार्टी मान रही है कि ललन की मौजूदगी और अनंत की सहानुभूति लहर. दोनों मिलकर बाज़ी पलट सकते हैं.

जनसुराज प्रत्याशी पर FIR

चुनाव सिर्फ अनंत सिंह के केस तक सीमित नहीं रहा. अब जनसुराज पार्टी के प्रत्याशी प्रियदर्शी पीयूष पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है. अनंत समर्थक द्वारा दर्ज FIR में पीयूष समेत 6 लोगों पर गंभीर आरोप लगे हैं. पुलिस पूछताछ में जुटी है और विपक्ष भी अब दबाव में है.

एक सीट, लेकिन बड़ा सियासी इम्तिहान

यह चुनाव सिर्फ एक विधायक चुनने भर का नहीं, बल्कि 2025 बिहार विधानसभा से पहले सत्ता और विपक्ष की ताकत नापने वाला संकेतक बन चुका है. एक ओर अनंत सिंह का जनाधार, दूसरी ओर ललन सिंह की राजनीतिक साख और तीसरी ओर RJD का यादव + भूमिहार गठजोड़. मोकामा लड़ाई अब अदालत, सड़क और मैदान तीनों जगह लड़ी जा रही है.

अनंत सिंहबिहार विधानसभा चुनाव 2025
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